BMC मेयर पद: एकनाथ शिंदे या बीजेपी? सियासत गरमाई, अब ऐसे होगा महाराष्ट्र में फैसला

Authored By: Nikita Singh

Published On: Wednesday, January 21, 2026

Updated On: Wednesday, January 21, 2026

BMC Mayor Election: एकनाथ शिंदे और बीजेपी के बीच मुकाबला, महाराष्ट्र में मेयर पद का फैसला करीब.

BMC Mayor Election: बीएमसी मेयर पद को लेकर महाराष्ट्र में सियासी खींचतान तेज हो गई है. बीजेपी और एकनाथ शिंदे शिवसेना दोनों ही इस अहम कुर्सी पर दावा कर रहे हैं. बीजेपी सबसे ज्यादा सीटों के साथ मेयर पद चाहती है, जबकि शिवसेना मुंबई की पारंपरिक जमीन होने का तर्क देती है. बहुमत महायुति के पास है, लेकिन मेयर कुर्सी किसके हाथ आएगी, यह अब सियासी रणनीति पर निर्भर करेगा.

Authored By: Nikita Singh

Updated On: Wednesday, January 21, 2026

BMC Mayor Election: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, मुंबई की बीएमसी, हमेशा ही राजनीतिक चश्मे में रही है. इस बार भी मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. महायुति के अंदर खींचतान अब खुलकर सामने आई है. एक ओर बीजेपी, जो इस बार सबसे ज्यादा सीटों के साथ उभरी है, वहीं दूसरी ओर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, जो पारंपरिक रूप से मुंबई में मजबूत रही है, भी मेयर पद पर अपना दावा ठोक रही है.

बीएमसी का महत्व और बजट की ताकत

बीएमसी सिर्फ एक नगरपालिका नहीं, बल्कि प्रशासन और बजट के लिहाज से पूरे देश में सबसे शक्तिशाली संस्थाओं में से एक है. इसका वार्षिक बजट कई राज्यों के बजट से बड़ा होता है. यही कारण है कि मेयर पद पर सियासी लड़ाई इतनी अहम बन गई है. मुंबई की जनता और राजनीतिक हलकों में हर कदम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि मेयर की कुर्सी सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वास्तविक सत्ता का प्रतिनिधित्व करती है.

दिल्ली में हुई बैठक ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

शिवसेना के पूर्व सांसद राहुल शेवाले की दिल्ली में बीजेपी नेताओं के साथ हुई बैठक ने सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है. खासकर अमित साटम के साथ हुई यह संक्षिप्त बैठक मीडिया और राजनीतिक विशेषज्ञों द्वारा बेहद अहम मानी जा रही है. इस बैठक में मेयर पद और वैधानिक समितियों के बंटवारे पर चर्चा हुई, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि महायुति के भीतर पेंच फंस चुका है और दोनों पक्ष अपना-अपना दावा मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.

सीटों का खेल: दावा किसका मजबूत?

बीएमसी चुनाव में शिवसेना ने बीजेपी के मुकाबले कम सीटें जीती हैं, लेकिन फिर भी वह मेयर पद पर जोरदार दावा कर रही है. शिवसेना का कहना है कि मुंबई उसकी पारंपरिक राजनीतिक जमीन रही है और प्रशासनिक अनुभव के लिहाज से मेयर पद उसी के पास रहना चाहिए. दूसरी ओर बीजेपी का तर्क है कि इस बार उसे सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं, इसलिए मेयर पद पर पहला हक उसका बनता है. इस सियासी रस्साकशी में वैधानिक समितियों पर कब्जा भी बड़ी लड़ाई का हिस्सा है.

बहुमत महायुति के पास, लेकिन कुर्सी किसकी?

बीएमसी में बहुमत महायुति (बीजेपी-शिवसेना) के पास है. बहुमत के लिए जरूरी 114 सीटों से दोनों दलों ने मिलकर 118 सीटें हासिल की हैं. इसमें बीजेपी को 89 और शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं. यानी कुल सीटों में तो गठबंधन का बहुमत है, लेकिन मेयर की कुर्सी का फैसला अब भी खुला है. यह तय करना कि बहुमत होने के बावजूद मेयर पद किसके हिस्से आएगा, अब महायुति के अंदर ही तय होगा.

क्या कहती है राजनीतिक रणनीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार निर्णय पूरी तरह सियासी चालों और गठबंधन के अंदर समझौते पर निर्भर करेगा. बीजेपी चाहती है कि नया इतिहास बनाते हुए मेयर पद पर कब्जा करे, जबकि शिवसेना यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मुंबई की पारंपरिक राजनीति में उसका दबदबा बना रहे. आने वाले हफ्तों में महायुति की बैठकों और चर्चाओं के नतीजे ही तय करेंगे कि बीएमसी की मेयर कुर्सी आखिरकार किसके हाथ में जाएगी.

निष्कर्ष: सियासत का नया मोड़

मुंबई की इस राजनीतिक लड़ाई से स्पष्ट है कि महायुति के भीतर खींचतान तेज है. मेयर पद सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि असली सत्ता का प्रतीक है. बीजेपी और एकनाथ शिंदे शिवसेना के बीच चल रही यह रस्साकशी अब अगले हफ्तों में निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है. इस बार बीएमसी का मेयर पद तय करेगा कि मुंबई की सियासत में कौन कितना दबदबा बनाए रखेगा.

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About the Author: Nikita Singh
करीब 10 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय प्रीति बिजनेस, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट से जुड़ी स्टोरी लिखने में दक्ष हैं. खासतौर से एंटरटेनमेंट से संबंधी विषयों पर लिखने में माहिर हैं. लेखक का लंबा अनुभव उनके लेखन में साफ दिखता है. इसके अलावा वह फिल्मों का सही और सटीक रिव्यू करने में भी माहिर हैं. मनोरंजन से जुड़े विषय पर उनके लेख सटीक जानकारी प्रदान करते हैं. इनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है. इनकी खूबी यह है कि पाठक इनके लेखों से खुद को जुड़ा महसूस करते हैं.
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