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130 KM रफ्तार के तूफान ने मचाई तबाही, यूपी में 117 मौतें, घर-फसलें सब हुईं बर्बाद
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, May 16, 2026
Last Updated On: Saturday, May 16, 2026
उत्तर प्रदेश में आए भीषण आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई. 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं और बिजली गिरने से 117 लोगों की मौत हो गई. कई जिलों में घर ढह गए, पेड़ उखड़ गए और फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, May 16, 2026
storm in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में 13 मई का दिन लोगों के लिए किसी डरावने मंजर से कम नहीं रहा. दोपहर बाद अचानक बदले मौसम ने ऐसा विकराल रूप लिया कि देखते ही देखते कई जिलों में तबाही फैल गई. तेज आंधी, मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि और आसमान से गिरती बिजली ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया. मौसम विभाग के अनुसार कई इलाकों में हवाओं की रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जिसने कमजोर मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को ताश के पत्तों की तरह गिरा दिया. इस भयानक प्राकृतिक आपदा में 117 लोगों की मौत हो गई, जबकि 79 लोग घायल बताए जा रहे हैं.
मिनटों में उजड़ गए घर, सड़कों पर दिखा तबाही का मंजर
तूफान का असर इतना खतरनाक था कि कई जिलों में लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. बरेली और प्रयागराज में तेज हवाओं ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया. वहीं उन्नाव और वाराणसी में भारी ओलावृष्टि हुई, जिससे खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं. गांवों और कस्बों में कई कच्चे मकान गिर गए. जगह-जगह बड़े पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर पड़े, जिससे यातायात घंटों तक ठप रहा. अस्थायी होर्डिंग, टीन शेड और दुकानें हवा में उड़ती नजर आईं. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी पूरी तरह बाधित हो गई.
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, कुल 117 मौतों में से 113 लोगों की जान तेज हवाओं और मकान गिरने से गई, जबकि चार लोगों की मौत आकाशीय बिजली गिरने से हुई. इसके अलावा 330 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हुए और 177 पशुओं की भी मौत हो गई. प्रयागराज, संत रविदास नगर और सोनभद्र को सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल किया गया है.
आखिर इतना खतरनाक क्यों बना यह तूफान?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तूफान के पीछे कई खतरनाक मौसमीय परिस्थितियों का मेल जिम्मेदार रहा. पिछले कई दिनों से प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही थी. इसी बीच बंगाल की खाड़ी से आई नमी वाली हवाएं उत्तर भारत की गर्म और शुष्क हवाओं से टकरा गईं. इस टकराव ने वातावरण में भारी अस्थिरता पैदा कर दी.
इसके साथ हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण ने तूफान को और ताकत दे दी. नतीजा यह हुआ कि सामान्य आंधी कुछ ही घंटों में विनाशकारी सुपर सेल तूफान में बदल गई. विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी तेज हवाएं आमतौर पर चक्रवाती तूफानों के दौरान ही देखने को मिलती हैं.
अलर्ट जारी हुआ, फिर भी नहीं बच सकीं जानें
मौसम विभाग ने खतरे को पहले ही भांप लिया था. लखनऊ स्थित आईएमडी केंद्र ने डॉप्लर वेदर रडार और सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए लगातार निगरानी की. शुरुआत में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया था. लेकिन मौसम तेजी से बिगड़ता गया और बाद में ऑरेंज से होते हुए रेड अलर्ट जारी करना पड़ा.
प्रशासन और मीडिया को हर तीन घंटे पर अपडेट भेजे गए. इतना ही नहीं, सचेत (SACHET) सिस्टम के जरिए लाखों लोगों के मोबाइल पर एसएमएस अलर्ट भी भेजे गए थे. इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में मौतें होना कई सवाल खड़े करता है. ग्रामीण इलाकों में कमजोर मकान, समय पर सुरक्षित स्थान तक न पहुंच पाना और लोगों द्वारा चेतावनियों को गंभीरता से न लेना भी बड़ी वजह माना जा रहा है.
डर के साए में लोग, सरकार के सामने बड़ी चुनौती
इस भीषण आपदा के बाद प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं. प्रशासन ने क्षतिग्रस्त घरों का सर्वे शुरू कर दिया है और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. लेकिन इस तूफान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के दौर में प्राकृतिक आपदाएं पहले से ज्यादा खतरनाक होती जा रही हैं.
उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए यह तूफान सिर्फ एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि ऐसा दर्द बन गया है जिसे शायद लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा.











