RG Kar Medical College And Hospital Case: एक पत्र से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दोहरा चरित्र आया सामने
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Friday, September 6, 2024
Last Updated On: Friday, September 6, 2024
ट्रेनी डॉक्टर का यौन शोषण और हत्या मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद समर्थकों के साथ मार्च निकाल चुकी हैं। नया कानून भी बना चुकी हैं। लेकिन प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री, गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री होने के नाते राज्य में महिलाओं, बच्चियों के साथ रेप जैसे अपराध न हो इसके लिए उन्होंने कुछ नहीं किया। या कहें करना नहीं चाहतीं।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Friday, September 6, 2024
पश्चिम बंगाल (West Bangal) में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल का मामला (RG Kar Medical College And Hospital Case) अभी शांत नहीं हुआ है। वहां के डॉक्टर्स एवं आम लोग आज भी आंदोलनरत हैं। उनका धरना-प्रदर्शन और मार्च आदि रोजाना हो रहा है। राजनीतिक हथकंडे के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपने समर्थकों के साथ मार्च निकाल चुकी हैं। नया कानून भी बना चुकी हैं। लेकिन प्रदेश की गृहमंत्री, मुख्यमंत्री होने के नाते राज्य में महिलाओं, बच्चियों के साथ रेप जैसे अपराध न हो इसके लिए उन्होंने कुछ नहीं किया। या कहें करना नहीं चाहतीं। इसका खुलासा तीन साल पुराने के पत्र से होता है।
तत्कालीन कानून मंत्री रिजिजू का पत्र
वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने पॉक्सो (POCSO) से संबंधित कानून बनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी सलाह दी थी। वर्ष 2021 में तत्कालीन केन्द्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने पश्चिम बंगाल सरकार को एक पत्र भेजा था। ऐसे, इस तरह के पत्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिसंबर 2019 से 2021 तक चार बार भेजे गए थे। कानून मंत्री के पत्र में पॉक्सो एक्ट (बच्चों के साथ यौन शोषण) के मामलों की जांच के लिए फ़ास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSC) की स्थापना करने की सलाह दी गई थी।

123 FTSC का प्रावधान था बंगाल में
केंद्रीय कानून मंत्री रिजिजू के पत्र के मुताबिक 100 से अधिक लंबित POCSO के मामलों वाले जिले में एक्सक्लूसिव पॉक्सो अदालतो की स्थापना का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया था। पश्चिम बंगाल में ऐसे लंबित मामलों को देखें तो प्रदेश में 123 एफटीएससी का प्रावधान किया गया था। इनमें 20 ePOCSO अदालतें भी शामिल थीं। मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव तक को केंद्र की ओर से पत्र लिखा गया। फिर भी ममता बनर्जी सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। केंद्र से पत्र पर पत्र भेजा गया लेकिन ममता बनर्जी और उनकी सरकार इस मामले पर सोती रहीं।
क्या कहते हैं, शुभेन्दु अधिकारी
विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस पत्र के माध्यम से ममता सरकार से सवाल करते हैं। वह कहते हैं, ‘जब यौन शोषण से पीड़ित महिलाओं-बच्चों को न्याय दिलाने का मौका था, तब ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के सुझाव और आग्रह को नहीं माना। क्यों? इसका जवाब मुख्यमंत्री के पास नहीं है। वे आज भी जो कर रही हैं, वह सिर्फ दिखावा है। अभी भी सही काम करने का समय है। यदि अभी भी नहीं किया गया तो राज्य में महिलाओं के साथ अनर्थ हो जाएगा। ममता बनर्जी सिर्फ ड्रामे करना जानती हैं।
संदेशखली मामले में भी ममता पर सवाल
पिछले साल ही संदेशखली में महिलाओं का यौन शोषण किया गया था। वह मामला भी खूब सुर्खियां बटोरी थी। तब भी संदेशखली के लोग आरोपी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे लेकिन तभी ममता अपने नेता शाहजहाँ शेख को बचाने में लगी रहीं। यहां तक कि आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। आखिरकार कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर केन्द्रीय जांच एजेंसी के पास जांच गई, तब आरोपी पकड़े गए थे।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को धमकी
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को सहानुभूति या आश्वासन के बजाय, ममता बनर्जी के नेताओं द्वारा धमकी दी जाती है। दो दिन पहले ही टीएमसी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने कहा था, ‘यदि मरीज डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरता है तो इन्हें जनाक्रोश का सामना करना पड़ेगा। फिर हम आपको नहीं बचाएंगे। इसलिए एक महिला होने के बावजूद ममता बनर्जी पर पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए गंभीरता से कुछ करेंगी, यह सवाल बरकरार है।













