बांग्लादेश हिंसा (Bangladesh Violence): सैंकड़ों गई जान, हजारों विदेशी छात्र आए भारत, अब आगे क्या होगा

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Monday, July 22, 2024

Last Updated On: Monday, July 22, 2024

Bangladesh Violence
Bangladesh Violence

बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ हिंसक आंदोलन में अब तक एक सौ से ज्यादा जानें जा चुकी है। कल से पूरे बांग्लादेश में कर्फ्यू लगा। अब सुप्रीम कोर्ट ने कोटा सिस्टम को खत्म करने का फैसला सुनाया है।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Monday, July 22, 2024

इस लेख में:

पिछले एक सप्ताह से बांग्लादेश सुलग रहा है। वहां आरक्षण की आग धधक रही है। अब तक एक सौ से ज्यादा जानें जा चुकी है। कल से पूरे बांग्लादेश में कर्फ्यू लगा। इस आग में बांग्लादेश की शीर्ष अदालत ने थोड़ा पानी डाला है। अभी देखना होगा कि शीर्ष अदालत ने जो पानी डाला है, उससे आग बुझता है या नहीं।

आरक्षण (Reservation) पर भड़की हिंसा

दरअसल, बांग्लादेश में सरकारी नौकरियां कम हुई हैं। उस पर कोटा सिस्टम (आरक्षण) ने आम छात्रों के लिए नौकरी के मौके को और कम कर दिया है। इसलिए वहां कोटा सिस्टम को खत्म करने के लिए आंदोलन होते रहे हैं। वर्ष 2018 में भी कोटा सिस्टम के खिलाफ बांग्लादेश में उग्र आंदोलन हुए थे। बांग्लादेश सरकार ने तब प्रदर्शनों के बाद कोटा सिस्टम पर रोक लगा दी थी। सरकारी आदेश के खिलाफ कुछ लोग कोर्ट गए। इसी साल जून में बांग्लादेश के उच्च न्यायालय ने सरकार के फैसले को पलट दिया और कोटा सिस्टम को फिर से लागू कर दिया था। इसके बाद ही देश भर में फिर से आंदोलन शुरू हो गए।

आंदोलन हुआ हिंसक

आंदोलन के दौरान ढाका विश्वविद्यालय (University of Dhaka) में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इसके बाद आंदोलन हिंसक हो गया। 16 जुलाई को आंदोलन हिंसक हो गया था। कई स्थानों पर आगजनी और रक्तपात भी हुआ। बाहर के छात्रों में दहशत पैदा हुआ। हालात इतने बिगड़ गए कि 20 जुलाई को पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया। पुलिस बलों के स्थान पर सड़कों पर सैन्य बलों को उतार दिया गया। हालांकि उनके पहले कई लोगों की मौत हो चुकी थी। बांग्लादेशी अधिकारियों ने मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन वहां के समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों के आधार पर कहा जा रहा है कि अब तक कम से कम 103 लोग मारे गए हैं। गृह मंत्री असदुजजमां खान ने कहा कि 21 जुलाई को अपराह्न 3 बजे से शाम 5 बजे तक कर्फ्यू में ढील गई।

विदेशी छात्रों ने छोड़ा बांग्लादेश

हिंसक प्रदर्शन के बीच विदेशी छात्र भी असुरक्षित महसूस करने लगे। इसलिए वे विदेशी छात्र बांग्लादेश छोड़ने लगे। एक आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 4500 से ज्यादा भारतीय छात्र भारत लौट चुके हैं। इनके अलावा नेपाल के 500, भूटान के 38 और मालदीव के एक छात्र भी भारत पहुंचे हैं। इन सभी छात्रों को बांग्लादेश से सुरक्षित बाहर निकालने में बीएसएफ ने अहम भूमिका निभा रही है।

बीएसएफ (BSF) सहित संबंधित अधिकारी हाई अलर्ट पर

भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बीएसएफ हाई अलर्ट पर है। उसने भारत-बांग्लादेश सीमा पर अलग से स्पेशल सेटअप तैयार किया है। इसमें इंटरनल चेक पोस्ट यानी आईसीपी पेट्रोपोल और लैंड कस्टम स्टेशन यानी एलसीएस स्थापित किया गया है। बीएसएफ सहित अन्य संबंधित अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं। बीएसएफ लगातार बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के साथ संपर्क में है।

सुप्रीम कोर्ट ने कोटा सिस्टम को पलटा

बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को कोटा सिस्टम पर सुनवाई की। सुप्रीम ने बांग्लादेश से कोटा सिस्टम को खत्म कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण सिर्फ 7 प्रतिशत रहेगा। इसमें 5 प्रतिशत मुक्ति संग्राम में भाग लेने वाले लोगों के परिजनों के लिए और 2 प्रतिशत अल्पसंख्यकों, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडरों के लिए निर्धारित किया गया। शेष 93 प्रतिशत को अनारक्षित कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरियां योग्यता के आधार पर दिया जाए। जबकि इसके पहले 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वालों के परिजनों को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत तक आरक्षण मिलता था।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
Leave A Comment

अन्य खबरें

अन्य खबरें