चौदह साल बाद ब्रिटेन (Britain) में सत्ता परिवर्तन, भारत (India) पर क्या होगा असर

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Monday, July 8, 2024

Last Updated On: Monday, July 8, 2024

keir starmer new prime minister of britain
keir starmer new prime minister of britain

ब्रिटेन के आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी को अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा हार झेलना पड़ा। वहीं मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी की सबसे बड़ी जीत हुई है। जीत के बाद लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Monday, July 8, 2024

इस लेख में:

ब्रिटेन में समय से पहले चुनाव कराना ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को भारी पड़ गया। 4 जुलाई को हुए चुनाव में उनकी कंजर्वेटिव पार्टी की ऐतिहासिक हार हुई है। यानि इस चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी को अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा हार झेलना पड़ा। वहीं मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी की सबसे बड़ी जीत हुई है। जीत के बाद लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।

लेबर पार्टी (Labour Party) की ऐतिहासिक जीत

ब्रिटेन के चुनाव में इस बार लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली है। कीर स्टार्मर के नेतृत्व लेबर पार्टी ब्रिटेन के आम चुनाव में 400 से ज्यादा सीटें जीतकर 14 साल बाद सत्ता में वापसी की है। इसके पहले लेबर पार्टी टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में इससे बड़ी जीत हासिल की थी। वह वर्ष था 1997 का। तब टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने ब्रिटेन के आम चुनाव में 418 सीटें जीतीं थी। इस बार यह करिश्मा कीर स्टार्मर ने कर दिखाया। उनके नेतृत्व में लेबर पार्टी को इस बार 412 सीटें मिली हैं।

हाउस ऑफ कॉमन्स

भारत की लोकसभा के तर्ज पर ही ब्रिटेन में संसद के निचले सदन को हाउस ऑफ कॉमन्स कहते हैं। इसके सांसद सीधे आम मतदाताओं के वोट से जीतकर सांसद बनते हैं। हाउस ऑफ कॉमन्स में कुल 650 सांसद सदस्य चुने जाते हैं। सरकार बनाने के लिए ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स में पार्टी या गठबंधन को 326 सांसद सदस्यों का समर्थन चाहिए होता है। इस बार लेबर पार्टी को 650 में 412 सीटें मिली हैं। वहीं चुनाव तक सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी को 120 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। शेष सीटों पर अन्य छोटे दलों को जीत मिली है।

कीर स्टार्मर (Keir Starmer) बने प्रधानमंत्री

अपनी पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने के बाद कीर स्टार्मर का प्रधानमंत्री बनना तय था। 5 जुलाई को नतीजा आने के बाद वे छह जुलाई को बकिंघम पैलेस पहुंचे। बकिंघम पैलेस में उन्होंने किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात की। इस मुलाकात में किंग चार्ल्स तृतीय ने कीर स्टार्मर को प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी ग्रहण करने के लिए कहा। किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के बाद कीर स्टार्मर आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।

मोदी (Modi) ने दी बधाई

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को जीत की बधाई दी है। साथ ही उन्होंने कीर के प्रधानमंत्री बनने के बाद कहा कि आपके मार्गदर्शन में ब्रिटेन विकास की बुलंदियां छूएगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि कीर का विचार भारत को लेकर अन्य लेबर नेताओं से थोड़ा भिन्न है। इसलिए इनके नेतृत्व में भारत-ब्रिटेन का संबंध ठीक रहेगा। कुछ समय पहले भी उन्होंने कश्मीर के मसले पर बोल था कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान का है। उसमें दखल देना सही नहीं है।

कंजर्वेटिव पार्टी (Conservative Party) की क्यों हुई हार

इस बार ब्रिटेन के आम चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा टैक्स आदि रहा है। पिछले कई वर्षों से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है। वहां भी बेरोजगारी और कम वेतन को लेकर लोग सरकार से नाराज थे। शायद इसी कारण कंजर्वेटिव पार्टी ने चुनाव के अंतिम समय में मतदाताओं को डराने की कोशिश में कहा कि लेबर पार्टी सत्ता में आई तो वे टैक्स बढ़ा देंगे। लेकिन वहां की जनता ने शायद कंजर्वेटिव की बातों पर विश्वास नहीं किया और लेबर पार्टी का समर्थन किया। इसके अलावा वहां के चुनाव में अवैध प्रवासी मुद्दा, पर्यावरण, अपराध और आवास आदि भी प्रमुख मुद्दों में रहा।

14 साल से सत्ता में कंजर्वेटिव

कंजर्वेटिव पार्टी ब्रिटेन में पिछले 14 सालों से सत्ता में थी। लेकिन पिछले चुनाव (वर्ष 2019) के बाद कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार ब्रिटिश नागरिकों के बीच अलोकप्रिय होती गई। उस चुनाव के बाद बोरिस जॉनसन प्रधानमंत्री बने थे। वे धीरे-धीरे विवादों में फंसते गए। कोरोना महामारी के दौरान भी जॉनसन का प्रबंधन ठीक नहीं रहा है। इस कारण उन्हें कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा देना पड़ा। उनकी जगह एलिज़ाबेथ ट्रस को प्रधानमंत्री बनाया गया। लेकिन उनकी आर्थिक नीतियां बेहद खराब मानी गई और उन्हें केवल 40 दिनों में ही प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद पार्टी ने भारतीय मूल सांसद ऋषि सुनक को प्रधानमंत्री की जिम्मेवारी सौंपी। सुनक ने सत्ता में आने के बाद कई बड़े निर्णय लिये लेकिन उनके कार्यकाल में भी विवाद खत्म नहीं हुआ। अंततः उनके नेतृत्व में पार्टी की 200 साल के इतिहास में सबसे बड़ी हार हुई।

सुनक जीतें पर पार्टी हारी

ब्रिटेन में पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक अपना चुनाव जीत गए हैं। वे उत्तरी इंग्लैंड में रिचमंड और नॉर्थलेर्टन सीट से चुनावी मैदान में थे। यहां से उन्होंने 23,059 वोटों के साथ आसान जीत हासिल किया है। वे तो चुनाव जीत गए लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी की जीत सुनिश्चित नहीं कर पाए। ब्रिटेन में इस बार भी दोनों मुख्य पार्टियों से कई भारतीय मूल के ब्रिटिश चुनाव जीते हैं।

हार के बाद सुनक ने क्या कहा

हार के बाद निवर्तमान प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Outgoing Prime Minister Rishi Sunak) ने कहा कि ‘मैं माफी मांगता हूं। इस हार की जिम्मेदारी लेता हूं। मैं कंजर्वेटिव पार्टी के कई अच्छे, मेहनती उम्मीदवारों की हार की जिम्मेदारी लेता हूं। ये अपनी कोशिशों, अपने स्थानीय रिकॉर्ड और अपने समुदायों के प्रति समर्पण के बावजूद हार गए। मुझे इसका दुख है।’

जीत के बाद स्टार्मर

कीर स्टार्मर नतीजे आने के बाद काफी उत्साहित थे। उन्होंने ब्रिटेन के मतदाताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘देश के लोग परिवर्तन के लिए तैयार हैं। दिखावे की राजनीति को खत्म करने के लिए उन्होंने मतदान किया। चाहे लोगों ने उन्हें वोट दिया हो या नहीं, मैं हर व्यक्ति की सेवा करूंगा। मैं आपके लिए बोलूंगा। आपका साथ दूंगा। हर दिन आपकी लड़ाई लड़ूंगा। अब समय आ गया है कि हम अपना काम करें।’

ब्रिटिश संसद

ब्रिटेन में भी भारतीय संसद की तरह ही दो सदन हैं। यहां के निचले सदन को हाउस ऑफ कॉमन्स कहते हैं, जो भारत में लोकसभा कहलाता है। वहीं उच्च सदन को वहां हॉउस ऑफ लॉर्ड्स कहा जाता है। भारत में उच्च सदन राज्यसभा को कहा जाता है। निचले सदन यानि हाउस ऑफ कॉमन्स में जिस पार्टी को 50 प्रतिशत से एक सीट ज्यादा मिलती है, वह सरकार बनाती है। जितने वाली पार्टी या गठबंधन के नेता ही प्रधानमंत्री बनते हैं। वहां हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्यों का चुनाव नहीं होता। इन्हें प्रधानमंत्री की सिफारिश पर नियुक्त किया जाता है।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
Leave A Comment

अन्य खबरें

अन्य खबरें