ईरान-इजराइल जंग के बीच दावा: भारत के पास सिर्फ 25 दिन का तेल स्टॉक, सरकार तलाश रही नए सप्लायर

Authored By: Nishant Singh

Published On: Saturday, March 7, 2026

Last Updated On: Saturday, March 7, 2026

भारत के तेल भंडार की स्थिति “Iran‑Israel War” के बीच: 25 दिनों के स्टॉक का दावा और सरकार नई सप्लाई खोजती हुई तस्वीर.
भारत के तेल भंडार की स्थिति “Iran‑Israel War” के बीच: 25 दिनों के स्टॉक का दावा और सरकार नई सप्लाई खोजती हुई तस्वीर.

ईरान-इजराइल जंग के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के पास करीब 25 दिनों का तेल स्टॉक बचा है. होर्मुज रूट पर संकट के कारण सप्लाई प्रभावित हो सकती है. सरकार नए सप्लायर तलाश रही है, जबकि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने की कोशिश जारी है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Saturday, March 7, 2026

Iran-Israel War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल के बीच चल रही जंग के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है कि भारत के पास केवल 25 दिनों का कच्चे तेल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक बचा है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता देश है और अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% तेल विदेशों से आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात में थोड़ी सी भी उथल-पुथल का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है. न्यूज एजेंसी के अनुसार सरकारी सूत्रों ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक इंतजाम भी किए जा रहे हैं. हालांकि अभी तक आम लोगों के लिए घबराने जैसी स्थिति नहीं बताई गई है.

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का खतरा

इस संकट की सबसे बड़ी वजह ईरान द्वारा स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद करने की चेतावनी मानी जा रही है. ओमान और ईरान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा तो उस पर हमला किया जा सकता है. अगर यह रूट बंद रहता है तो भारत समेत कई एशियाई देशों की तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है और ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है.

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर फिलहाल राहत

हालांकि इन हालातों के बीच आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि सरकार का फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार कोशिश कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश के भीतर ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा जाए. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. इसके लिए सरकारी तेल कंपनियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निर्णय लिया जा सके.

74 दिन से 25 दिन तक का विवाद

तेल के स्टॉक को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है. विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि आखिर 74 दिनों का बताया गया तेल भंडार अचानक 25 दिनों तक कैसे पहुंच गया. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कुछ समय पहले ही संसद में बताया गया था कि देश के पास 74 दिनों का पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है और चिंता की कोई बात नहीं है. अब अगर सिर्फ 25 दिन का स्टॉक बताया जा रहा है तो इसके पीछे की वजह स्पष्ट की जानी चाहिए. इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है.

कतर से गैस सप्लाई में कटौती

इस बीच भारत के लिए एक और चुनौती सामने आई है. कतर ने भारत को होने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई में भी कटौती कर दी है. ड्रोन हमलों और क्षेत्रीय तनाव के बाद कतर ने ‘फोर्स मेजर’ घोषित करते हुए प्रोडक्शन अस्थायी रूप से रोक दिया है. इसका असर भारत की इंडस्ट्री पर भी पड़ रहा है, क्योंकि देश की लगभग 40% गैस सप्लाई कतर से आती है. खबरों के मुताबिक कई भारतीय उद्योगों को मिलने वाली गैस सप्लाई में 10 से 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.

सरकार की हाई-लेवल मीटिंग और निगरानी

बदलते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार भी पूरी तरह सतर्क हो गई है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी तेल कंपनियों के साथ एक हाई-लेवल बैठक की है. इस बैठक में कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई की स्थिति की समीक्षा की गई. इसके अलावा वाणिज्य मंत्रालय ने भी निर्यात-आयात और कार्गो मूवमेंट पर संभावित असर को लेकर विशेषज्ञों और व्यापार प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की है. सरकार का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.

रूस और अन्य देशों की ओर बढ़ा फोकस

तेल सप्लाई में संभावित कमी को देखते हुए भारत अब वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान दे रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. फिलहाल एशियाई जल क्षेत्र में रूसी तेल से भरे कई टैंकर मौजूद हैं, जिनमें करीब 95 लाख बैरल तेल भरा हुआ है. जरूरत पड़ने पर भारत इन टैंकरों से तुरंत तेल खरीद सकता है. रूस से मिलने वाला तेल अक्सर अंतरराष्ट्रीय कीमतों से सस्ता होता है, जिससे देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती है.

ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती और रणनीति

कुल मिलाकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए किसी भी वैश्विक संकट का असर तुरंत महसूस होता है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि तेल के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ाया जाए और सप्लाई चेन को मजबूत बनाया जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर महंगाई और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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