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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नया प्लान, टोल हटाकर सर्विस फीस से दुनिया में छिड़ी बहस
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, June 5, 2026
Last Updated On: Friday, June 5, 2026
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान ने नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें जहाजों से टोल की बजाय नेविगेशन, सुरक्षा और बचाव सेवाओं के बदले शुल्क लेने की बात कही गई है. आलोचक इसे टोल सिस्टम की नई पैकेजिंग मान रहे हैं. इस कदम का असर वैश्विक तेल व्यापार और समुद्री परिवहन पर पड़ सकता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, June 5, 2026
Iran Hormuz Strait: दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर सुर्खियों में है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत के बीच इस समुद्री रास्ते को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. पहले खबरें थीं कि ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों पर भारी ट्रांजिट टोल लगाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन अब तेहरान ने अपने रुख में बदलाव करते हुए कहा है कि वह किसी जहाज से गुजरने का टैक्स नहीं लेगा. इसके बजाय जहाजों को मिलने वाली विशेष सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा. हालांकि इस बदलाव के बाद भी कई देशों और विशेषज्ञों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में नीति बदली है या केवल उसका नाम बदल दिया गया है.
क्या है ईरान का नया प्रस्ताव?
Iran का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कई तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. इनमें नेविगेशन सहायता, समुद्री सुरक्षा, दुर्घटना की स्थिति में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन और पर्यावरण संरक्षण जैसी सुविधाएं शामिल हैं. ईरान और ओमान मिलकर इन सेवाओं का संचालन करना चाहते हैं और इसी के बदले जहाजों से शुल्क लेने की योजना पर काम किया जा रहा है. ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि यह किसी भी तरह का ट्रांजिट टैक्स नहीं होगा, बल्कि सेवाओं की लागत को पूरा करने का एक तरीका होगा.
टोल का नाम बदलकर सर्विस फीस?
हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दलील को लेकर बहस छिड़ी हुई है. आलोचकों का मानना है कि ईरान ने केवल “टोल” शब्द हटाकर उसकी जगह “सर्विस फीस” या “नेविगेशनल फीस” जैसे नए शब्दों का इस्तेमाल किया है. उनका कहना है कि यदि जहाजों को इस रास्ते से गुजरने के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा, तो उसका आर्थिक प्रभाव लगभग वैसा ही रहेगा जैसा किसी टोल व्यवस्था का होता है. यही कारण है कि कई देश इस प्रस्ताव को संदेह की नजर से देख रहे हैं और इसकी विस्तृत जानकारी का इंतजार कर रहे हैं.
वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है. खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर एशिया, यूरोप और अन्य बाजारों तक पहुंचता है. सामान्य दिनों में प्रतिदिन 120 से 140 जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं, जिनमें बड़ी संख्या तेल टैंकरों की होती है. इन जहाजों के जरिए हर दिन करोड़ों बैरल कच्चा तेल दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है. ऐसे में यहां लागू होने वाली किसी भी नई व्यवस्था का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
नई अथॉरिटी और बढ़ता विवाद
इस पूरे मामले के बीच ईरान ने “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” नाम की एक नई संस्था का गठन किया है. इस संस्था का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियों की निगरानी करना और जहाजों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना बताया गया है. लेकिन अमेरिका ने इस संगठन को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है. वाशिंगटन का आरोप है कि यह संस्था ईरान के सैन्य ढांचे से जुड़ी हुई है और इससे मिलने वाला राजस्व सैन्य गतिविधियों को वित्तीय सहायता पहुंचा सकता है. इसी वजह से अमेरिका ने इस पर प्रतिबंध भी लगाए हैं और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को इसके साथ कारोबार करने से सावधान रहने को कहा है.
ओमान की अहम भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में ओमान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. ओमान एक तरफ अमेरिका का करीबी सहयोगी है, वहीं दूसरी तरफ उसके ईरान के साथ भी अच्छे संबंध हैं. ऐसे में वह दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. ओमान का कहना है कि वह किसी भी ऐसी व्यवस्था का समर्थन नहीं करेगा जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ हो. उसका उद्देश्य केवल सुरक्षित और सुचारु समुद्री यातायात सुनिश्चित करना है.
दुनिया की नजर अगले फैसले पर
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का यह नया प्रस्ताव केवल शुल्क वसूली का मामला नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से भी जुड़ा हुआ है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्तावित सर्विस फीस वास्तव में सेवाओं का शुल्क होगी या फिर यह पुराने टोल सिस्टम का नया रूप साबित होगी. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाले फैसले न केवल क्षेत्रीय हालात बल्कि दुनिया भर के तेल बाजार और समुद्री व्यापार की दिशा भी तय कर सकते हैं. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ईरान, ओमान और अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हुई है.
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