पाकिस्तान के हालात और हिलेरी क्लिंटन की वो बात, खूब हो रही है आज चर्चा

Authored By: सतीश झा

Published On: Tuesday, December 31, 2024

Last Updated On: Tuesday, December 31, 2024

Pakistan ke halat aur Hillary Clinton ki baat: Aaj ki charcha ka vishay
Pakistan ke halat aur Hillary Clinton ki baat: Aaj ki charcha ka vishay

अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की यह चेतावनी सही साबित हो रही है कि जो लोग अपने आंगन में सांप पालते हैं, वह एक दिन उन्हें ही डसते हैं। पाकिस्तान, जो लंबे समय से आतंक को बढ़ावा देने का पनाहगार रहा है, अब खुद आतंकवाद के चलते गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Tuesday, December 31, 2024

साल 2024 पाकिस्तान के लिए आतंकी हमलों और हिंसा के मामलों में सबसे भयावह साबित हुआ। पिछले 9 सालों के मुकाबले इस साल ऐसी घटनाएं चरम पर पहुंच गईं। इन हमलों में नागरिकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के जवान भी मारे गए। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान रहे। इन घटनाओं ने पाकिस्तान की कमजोर होती सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न क्षेत्रों में बगावत के बढ़ते स्वर उजागर कर दिए हैं।

सीआरएसएस रिपोर्ट के आंकड़े

डॉन में प्रकाशित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में पाकिस्तान में 1166 आतंकी हमलों और उनके खिलाफ अभियानों में 2546 लोगों की मौत हुई, जबकि 2267 लोग घायल हुए। इन घटनाओं में नागरिक, सुरक्षाकर्मी और हमलावर शामिल थे। देश में हुई कुल मौतों में से 94% और कुल घटनाओं में से 89% खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में दर्ज की गईं। इस साल 444 आतंकी हमलों में सुरक्षाबलों के कम से कम 685 जवान शहीद हुए। कुल मौतों में सुरक्षाकर्मियों की हिस्सेदारी लगभग 63% रही। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में कुल 2546 मौतें हुईं, जो पिछले नौ वर्षों में सबसे अधिक हैं।

सबसे घातक महीने और प्रभावित क्षेत्र

साल 2024 में नवंबर सबसे घातक महीना साबित हुआ, जिसमें औसतन हर दिन 7 लोगों की मौत हुई। खैबर पख्तूनख्वा (1,616 मौतें) हिंसा और आतंक का सबसे बड़ा केंद्र रहा, इसके बाद बलूचिस्तान (782 मौतें) का स्थान रहा। खैबर पख्तूनख्वा के अफगानिस्तान सीमा से लगे जिलों- कुर्रम, उत्तरी वजीरिस्तान, और खैबर में सबसे अधिक मौतें हुईं। वहीं, डेरा इस्माइल खान, बन्नू, और लक्की मारवत में भी हिंसा और मौत का सिलसिला जारी रहा। बलूचिस्तान के क्वेटा, केच, कलात और मुसाखेल जिलों में भी यही हाल रहा।

हिंसा में बढ़ोतरी का सिलसिला

रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 तक हिंसा और आतंकी घटनाओं में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। 2024 में यह बढ़ोतरी अपने चरम पर पहुंच गई, जिससे पाकिस्तान को अब अपनी नीतियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार करना होगा।

(हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के इनपुट के साथ)

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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