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‘तीसरी दुनिया’ के देश कौन हैं जिनपर भड़के ट्रंप, कही माइग्रेशन रोकने की बात
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Friday, November 28, 2025
Last Updated On: Friday, November 28, 2025
डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. ट्रंप ने कहा कि ‘थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज़’ यानी गरीब और कम विकसित देशों से आने वाले नागरिकों का इमिग्रेशन अब अमेरिका में हमेशा के लिए बैन रहेगा. यह फैसला नेशनल गार्ड पर हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद आया है. आखिर कौन हैं वो देश जिन पर ट्रंप भड़के और क्या है ‘तीसरी दुनिया’ का असली मतलब? यहां पढ़ें पूरी कहानी.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Friday, November 28, 2025
Trump Migration Ban 2025: थैंक्सगिविंग के मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा बयान दे दिया जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मचा दी. ट्रंप ने साफ कहा कि ‘थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज’ से आने वाले लोगों का इमिग्रेशन अब अमेरिका में हमेशा के लिए बंद रहेगा. मतलब़ अब इन देशों के नागरिकों के लिए पढ़ाई, नौकरी या अपने परिवार से मिलने तक का रास्ता मुश्किल हो जाएगा.
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड पर आतंकी हमला हुआ है. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 19 देशों के हर ग्रीन कार्ड और इमिग्रेशन रिकॉर्ड की दोबारा जांच का आदेश भी दे दिया. इसी बीच सवाल उठने लगे हैं कि आखिर ये ‘तीसरी दुनिया’ है क्या? किन देशों को इस सूची में रखा गया है? और क्यों ट्रंप इन देशों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं?
माइग्रेंट्स पर ट्रंप की बढ़ती सख्ती
अमेरिका में माइग्रेशन को लेकर ट्रंप प्रशासन एक बार फिर सख्त रुख में दिखाई दे रहा है. 28 नवंबर को सरकार ने घोषणा की कि वह अफगानिस्तान और 18 अन्य देशों के हर परमानेंट रेजिडेंट यानी ग्रीन कार्ड होल्डर के इमिग्रेशन स्टेटस की दोबारा जांच करेगी. USCIS के डायरेक्टर जोसेफ एडलो ने X पर लिखा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर चिंता वाले हर देश के हर व्यक्ति के ग्रीन कार्ड की कड़ी जांच शुरू कर दी गई है. यह वही 19 देश हैं जिनका जिक्र ट्रंप ने जून 2025 में अपने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में किया था, जिसमें इन देशों को “आइडेंटिफाइड कंसर्न” की कैटेगरी में रखा गया था.
“तीसरी दुनिया” शब्द कैसे आया
पहली, दूसरी और तीसरी दुनिया का विचार शीत युद्ध के दौर से जुड़ा है. यह शब्द 1952 में फ्रांसीसी जनसांख्यिकीविद अल्फ्रेड सॉवी ने दिया था. उस समय दुनिया दो बड़े गुटों में बंटी हुई थी. एक तरफ अमेरिका का पश्चिमी ब्लॉक था और दूसरी तरफ सोवियत रूस का पूर्वी ब्लॉक. जो देश इन दोनों से अलग या तटस्थ रहे, उन्हें तीसरी दुनिया कहा गया.
1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद इस शब्द का राजनीतिक महत्व घट गया और आज इसका इस्तेमाल आमतौर पर उन देशों के लिए होता है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या विकास के रास्ते पर हैं. हालांकि कई विशेषज्ञ इसे अपमानजनक मानते हैं, इसलिए अब ‘विकासशील देश’, ‘कम विकसित देश’ या ‘निम्न आय वाले देश’ जैसे शब्द अधिक प्रयोग किए जाते हैं.
भारत शीत युद्ध के दौर में गुटनिरपेक्ष आंदोलन का हिस्सा था, इसलिए उसे ऐतिहासिक रूप से तीसरी दुनिया के देशों में रखा गया, लेकिन ट्रंप जिन देशों की बात कर रहे हैं, उसमें भारत शामिल होगा या नहीं यह उनकी परिभाषा पर निर्भर करेगा.
पहली, दूसरी और तीसरी दुनिया कौन से देश
पहली दुनिया में वे देश शामिल थे जो अमेरिका के करीबी सहयोगी रहे जैसे उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्विटजरलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और फिनलैंड. दूसरी दुनिया में सोवियत संघ के देश और उससे जुड़े राष्ट्र आते थे. पूर्वी यूरोप, पोलैंड, पूर्वी जर्मनी, चेकोस्लोवाकिया, बाल्कन इलाके और एशिया के कई कम्युनिस्ट देश जैसे मंगोलिया, उत्तर कोरिया, विएतनाम, लाओस और कंबोडिया. तीसरी दुनिया उन देशों को कहा गया जो आर्थिक और कृषि विकास में पीछे थे, जिनमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देश शामिल होते थे.
किन देशों पर ट्रंप का निशाना
ट्रंप प्रशासन की निगरानी सूची में अफगानिस्तान, म्यांमार, बुरुंडी, चाड, कांगो गणराज्य, क्यूबा, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लाओस, लीबिया, सिएरा लियोन, सोमालिया, सूडान, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, वेनेजुएला और यमन शामिल हैं. जून में जारी आदेश में इन्हें यात्रा प्रतिबंध और कड़ी निगरानी वाली श्रेणी में रखा गया था.
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