खामेनेई के अंतिम संस्कार में क्यों नहीं पहुंचे तीन मुस्लिम देश? जानिए खाड़ी देशों की बदलती रणनीति

Authored By: Nikita Singh

Published On: Monday, July 6, 2026

Last Updated On: Monday, July 6, 2026

खामेनेई के अंतिम संस्कार में तीन मुस्लिम देशों की गैरमौजूदगी और खाड़ी देशों की बदलती रणनीति.
खामेनेई के अंतिम संस्कार में तीन मुस्लिम देशों की गैरमौजूदगी और खाड़ी देशों की बदलती रणनीति.

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में UAE, बहरीन और कुवैत की गैरमौजूदगी ने खाड़ी देशों की बदलती कूटनीति को उजागर किया. यह घटनाक्रम बताता है कि आज राष्ट्रीय हित, सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारियां धार्मिक एकजुटता से कहीं अधिक प्रभावशाली बन चुकी हैं.

Authored By: Nikita Singh

Last Updated On: Monday, July 6, 2026

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में रही. तीनों मुस्लिम बहुल देशों ने कोई आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं भेजा, जबकि रूस, चीन, तुर्किये, पाकिस्तान और भारत समेत कई देशों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि आज की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में धार्मिक पहचान से अधिक महत्व राष्ट्रीय हितों और कूटनीतिक रणनीतियों का हो गया है.

पुराने विवाद बने दूरी की वजह

UAE, बहरीन और कुवैत लंबे समय से ईरान के साथ जटिल संबंध रखते हैं. UAE का ईरान के साथ अबू मूसा और टुंब द्वीपों को लेकर सीमा विवाद है. बहरीन लगातार ईरान पर अपने आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाता रहा है. वहीं कुवैत ने हमेशा संतुलित रुख अपनाया, लेकिन उसने भी ईरान के प्रति सतर्क नीति बनाए रखी. हाल के वर्षों में क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताओं ने इन मतभेदों को और गहरा किया है. ऐसे में इन देशों का तेहरान न जाना एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.

सुरक्षा हितों को दी गई प्राथमिकता

इन तीनों देशों के अमेरिका के साथ मजबूत रक्षा और सुरक्षा संबंध हैं. उनके यहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी मौजूद हैं, इसलिए ईरान के साथ सार्वजनिक स्तर पर नजदीकी दिखाना उनकी विदेश नीति के अनुरूप नहीं माना गया. विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों ने अपने रणनीतिक हितों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया. यही वजह है कि उन्होंने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखना उचित समझा.

सऊदी, कतर और ओमान ने अपनाया अलग रास्ता

दूसरी ओर सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अपने प्रतिनिधि भेजकर अलग संदेश दिया. सऊदी अरब हाल के समय में ईरान के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा है. कतर हमेशा संतुलित कूटनीति का समर्थक रहा है, जबकि ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय मध्यस्थ की भूमिका निभाता आया है. इन देशों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि खाड़ी क्षेत्र में हर देश अपनी अलग विदेश नीति पर आगे बढ़ रहा है.

क्या कहती है यह घटना?

खामेनेई के अंतिम संस्कार में तीन प्रमुख मुस्लिम देशों की अनुपस्थिति ने यह दिखा दिया कि पश्चिम एशिया की राजनीति अब केवल धार्मिक आधार पर नहीं चलती. सुरक्षा, आर्थिक हित, क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और वैश्विक गठबंधन अब विदेश नीति के सबसे अहम आधार बन चुके हैं. यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि खाड़ी देशों के फैसले अब मजहबी एकता से ज्यादा अपने राष्ट्रीय हितों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर आधारित हैं.

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करीब 10 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय प्रीति बिजनेस, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट से जुड़ी स्टोरी लिखने में दक्ष हैं. खासतौर से एंटरटेनमेंट से संबंधी विषयों पर लिखने में माहिर हैं. लेखक का लंबा अनुभव उनके लेखन में साफ दिखता है. इसके अलावा वह फिल्मों का सही और सटीक रिव्यू करने में भी माहिर हैं. मनोरंजन से जुड़े विषय पर उनके लेख सटीक जानकारी प्रदान करते हैं. इनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है. इनकी खूबी यह है कि पाठक इनके लेखों से खुद को जुड़ा महसूस करते हैं.
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