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अमेरिका खरीद रहा रूस से तेल, पुतिन ने ट्रंप को किया एक्सपोज!
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Friday, December 5, 2025
Last Updated On: Friday, December 5, 2025
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिल्ली दौरे पर अमेरिका को लेकर बड़ा खुलासा किया है. पुतिन ने कहा कि अमेरिका खुद रूस से न्यूक्लियर फ्यूल खरीदता है, तो भारत के रूसी तेल खरीदने पर उसे क्यों दिक्कत है? तनावपूर्ण US-India रिश्तों के बीच यह बयान वैश्विक ऊर्जा राजनीति को नया मोड़ देता है.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Friday, December 5, 2025
US Buying Russia Oil: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चार साल बाद भारत यात्रा वैसे ही चर्चा में थी, लेकिन इंटरव्यू में दिया गया उनका एक बयान अचानक पूरे अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर हलचल मचा रहा है. दिल्ली पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद पुतिन ने अमेरिका के दोहरे रवैये को उजागर करते हुए कहा कि US खुद रूस से फ्यूल खरीदता है वही फ्यूल जिसे लेकर भारत पर दबाव बनाया जाता है. ऐसे समय में जब अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है और दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है, पुतिन का यह बयान न सिर्फ अमेरिकी नीति पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी को भी मजबूत राजनीतिक संकेत देता है. उनकी इस यात्रा के दौरान तेल, रक्षा सौदों और ट्रेड को लेकर नई संभावनाएं खुलती दिख रही हैं, जो वैश्विक समीकरणों को नया रूप दे सकती हैं.
टैरिफ पर बोले पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इंडिया टुडे को एक खास इंटरव्यू दिया. यह बातचीत उनके दिल्ली पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद प्रसारित हुई. इंटरव्यू में पुतिन ने सीधे तौर पर कहा कि अमेरिका भारत पर बेवजह दबाव डाल रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका खुद हमारे देश से फ्यूल खरीदता है. अगर वह ऐसा कर सकता है, तो भारत के रूसी फ्यूल खरीदने पर उसे दिक्कत क्यों है? पुतिन ने इसे दोहरे रवैये वाला मामला बताया.
पुतिन की भारत यात्रा के मायने
पुतिन की इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है. दोनों देश ट्रेड बढ़ाने और आपसी लेन-देन में नई संभावनाओं को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है. इस दौरे का बड़ा मकसद रूसी तेल, मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट और डिफेंस से जुड़े अन्य उपकरणों की बिक्री बढ़ाना है. इसके साथ ही ऊर्जा और सुरक्षा क्षेत्र से आगे भी नए बिजनेस लिंक खड़े करने का प्रयास हो रहा है. यह सब उस समय हो रहा है जब अमेरिका लगातार भारत पर दबाव डाल रहा है कि वह यूक्रेन हमले के मुद्दे पर रूस से दूरी बनाए.
चार साल बाद भारत आए पुतिन
भारत और रूस के रिश्ते बहुत पुराने और भरोसे पर टिके हुए हैं. सोवियत काल से ही यह संबंध मजबूत रहे हैं. रूस कई दशकों से भारत के लिए हथियारों का सबसे बड़ा स्रोत रहा है. फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ. इसके बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई सख्त प्रतिबंध लगाए. इसके बावजूद भारत समुद्र मार्ग से रूसी तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा. अब स्थिति यह है कि अमेरिका के कड़े टैरिफ और रूस पर लगी पाबंदियों की वजह से भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट इस महीने तीन साल के सबसे निचले स्तर पर जा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि भारत द्वारा सस्ती रूसी ऑयल की खरीद मॉस्को के युद्ध को फंड करती है. भारत इस दावे से साफ तौर पर असहमत है.
“अमेरिका भी हमसे फ्यूल खरीदता है” – पुतिन
ट्रंप टैरिफ को लेकर पूछे गए सवाल पर पुतिन ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका आज भी अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस से न्यूक्लियर फ्यूल खरीदता है. यह भी फ्यूल ही है. पुतिन बोले- अगर अमेरिका को रूसी फ्यूल खरीदने का अधिकार है, तो वही अधिकार भारत को क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि इस मुद्दे की पूरी जांच होनी चाहिए. और रूस इस पर चर्चा को तैयार है, चाहे वह प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ ही क्यों न हो.
इंटरव्यू में पुतिन से पूछा गया कि क्या वेस्ट के दबाव के कारण भारत ने रूस से ऑयल खरीदना कम कर दिया है? इस पर उन्होंने कहा कि इस साल के पहले नौ महीनों में ओवरऑल ट्रेड में थोड़ी गिरावट दिखी है. लेकिन यह मामूली एडजस्टमेंट है. उन्होंने कहा कि पूरा ट्रेड टर्नओवर लगभग पहले जैसी ही स्थिति में है. पुतिन ने दावा किया कि भारत और रूस के बीच पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और क्रूड ऑयल का कारोबार बिना किसी बड़ी रुकावट के चल रहा है. उन्होंने कहा, रूसी ऑयल का ट्रेड इंडिया में ठीक-ठाक चल रहा है और हमें कोई बड़ी दिक्कत नहीं दिख रही.
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