भारत के कई पड़ोसी देश राजनीतिक संकट से क्यों जूझ रहे हैं?

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Wednesday, August 7, 2024

political crisis in neighboring countries
political crisis in neighboring countries

बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता भारत के लिए भी सही नहीं है। इसे संयोग कहें या फिर साजिश कि एक-एक कर भारत के अधिकांश पड़ोसी देशों में पहले राजनीतिक अस्थिरता के हालात बने। उसके बाद उन देशों में भारत विरोधी सरकार का गठन हुआ।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Wednesday, August 7, 2024

बांग्लादेश में छात्र आंदोलन से शुरू हुआ प्रदर्शन कब हिंसक, फिर राजनीतिक बन गया पता नहीं चला। कम से कम निवर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना को इसका इल्म तक नहीं लगा। तभी तो जिन मांगों को लेकर आंदोलन शुरू हुआ था, उसके पूरा होने के बाद भी बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ। शेख हसीना को देश छोड़कर भारत आना पड़ा। उनके देश छोड़ने के बाद जिस तरह से बांग्लादेश में उत्पात मचा है, वह खुद ही पूरी कहानी बयां करता है। वहां के पीएम आवास से लेकर संसद भवन, शेख हसीना के समर्थकों के साथ हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है।

भारत सरकार भी बांग्लादेश की घटना पर नजर बनाए हुए है। सोमवार को कैबिनेट की सुरक्षा परिषद की बैठक में पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की गई। आज सर्वदलीय बैठक में भी बांग्लादेश की घटना पर चर्चा हुई। फिर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में भी पूरी जानकारी दी। इस तरह से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता भारत के लिए भी सही नहीं है। इसे संयोग कहें या फिर साजिश कि एक-एक कर भारत के अधिकांश पड़ोसी देशों में पहले राजनीतिक अस्थिरता के हालात बने। उसके बाद उन देशों में भारत विरोधी सरकार का गठन हुआ। यही स्थिति बांग्लादेश में बनती दिख रही है। भारत से अच्छे संबंध रखने वाली शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ।

कई पड़ोसी देशों में राजनीतिक संकट

भारत के एक-दो पड़ोसी नहीं बल्कि आधा दर्जन से ज्यादा पड़ोसी देशों में राजनीतिक संकट गहराया रहा है। बांग्लादेश के पहले नेपाल में भी प्रचंड सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। उससे पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका, मालदीव और म्यांमार में भी तख्तापलट हो चुका है। यहां राजनीतिक संकट ऐसा गहराया कि सरकार को हटना पड़ा।

नेपाल में राजनीतिक संकट

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार का तख्तापलट से पहले नेपाल में राजनिक संकट छाया हुआ था। नेपाल में प्रचंड प्रधानमंत्री थे। वे भारत से अच्छे संबंध रखने में प्रयास कर रहे थे। इसी बीच उनकी सरकार को अस्थिर किया गया। 18 महीने से सत्ता की कुर्सी पर बैठे पुष्प कुमार दहल ‘प्रचंड’ की सरकार को गिरा दी गई। यहां प्रधानमंत्री का पद मुख्य दलों के बीच घूमता रहा है। पिछले ही महीने जुलाई 2024 में खड्ग प्रसाद शर्मा ओली के नेतृत्व में एक नए गठबंधन ने सरकार बनाई। ओली ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल, यूनिफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट, नेपाली कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई है। औली चीन के करीबी और समर्थक हैं।

म्यांमार में गृह युद्ध

म्यांमार भी पिछले महीने ही गृह युद्ध से जूझ रहा था। इसके पहले 2021 में सेना ने तख्तापलट किया था। सेना के तख्तापलट को वहां के आम नागरिकों ने नहीं माना। इसके बाद म्यांमार में भयानक गृह संघर्ष शुरू हुआ। 25 जुलाई 2024 को चीनी जातीय कोकांग अल्पसंख्यक के विद्रोही बल म्यांमार नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस आर्मी ने घोषणा की कि उसने सेना के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल की। यह ऑपरेशन करीब एक महीने तक चला।

पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता

पाकिस्तान अपने जन्म के समय से ही तख्तापलट और सैन्य शासन का गवाह रहा है। लेकिन 21 वीं सदी में भी यहां के राजनीतिक व्यवस्था को कोई बदलाव नहीं हुआ है। आज भी यहां की सत्ता पर परोक्ष रूप से सेना हावी रहती है। वर्ष 2019-20 में सेना ने चुनाव के जरिए इमरान खान को प्रधानमंत्री बनवाया। उस समय इमरान खान सेना के सबसे प्रिय नेता थे। लेकिन पाकिस्तान में आर्थिक संकट के ऐसे माहौल बने कि इमरान खान को अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटा दिया गया। इनके बाद शहबाज शरीफ अप्रैल 2022 से अगस्त 2023 तक गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री बने। इस दौरान इमरान खान के खिलाफ लंबित मामलों में गिरफ़्तारी हुई। जिसके बाद पाकिस्तान के कई प्रांतों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। मई 2023 में इमरान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने सेना और आईएसआई मुख्यालय पर धावा बोल दिया। ऐसा पाकिस्तान के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। वे अभी भी जेल में हैं। इसी साल फरवरी-मार्च में चुनाव के बाद शहबाज शरीफ दूसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। लेकिन अभी भी शहबाज सेना के साये से बाहर नहीं निकल पाएं हैं।

श्रीलंका में आर्थिक संकट से तख्तापलट

करीब दो साल पहले श्रीलंका में भी राजनीतिक उथल-पुथल बहुत ज्यादा मची हुई थी। श्रीलंका लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा था। चीन से लिया गया कर्ज ने श्रीलंका को और आर्थिक संकट में ला दिया था। वर्ष 2022 में यह आर्थिक संकट राजनीतिक संकट में बदल गया। बिगड़ते आर्थिक संकट के कारण आम लोग सड़कों पर उतर आए। आम लोग श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के निवास में घुस गए और वहां लुटपाट खूब किया। ठीक उसी तरह आज बांग्लादेश में प्रधानमंत्री आवास में उत्पात और लुटपाट मचाया गया। इस हिंसक झड़प के कारण राजपक्षे को जुलाई 2022 में अपने आधिकारिक निवास से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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