ईरान जंग के बीच भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट क्यों? अमेरिका ने बताई वजह

Authored By: Khursheed

Published On: Wednesday, March 11, 2026

Last Updated On: Wednesday, March 11, 2026

ईरान युद्ध के बीच भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट क्यों मिली, US-India Oil Deal पर अमेरिका की वजह.
ईरान युद्ध के बीच भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट क्यों मिली, US-India Oil Deal पर अमेरिका की वजह.

US-India Oil Deal: ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होने के बीच अमेरिका ने भारत को अस्थायी तौर पर रूसी तेल खरीदने की छूट दी है. व्हाइट हाउस का कहना है कि यह फैसला बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए लिया गया है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा.

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Last Updated On: Wednesday, March 11, 2026

US-India Oil Deal: ईरान से चल रहे युद्ध और वैश्विक तेल संकट के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है. इस मुद्दे पर व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी करोलाइन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि भारत को यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि भारत ने पहले भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और नियमों का सम्मान किया है. अमेरिका का मानना है कि भारत एक जिम्मेदार और भरोसेमंद भागीदार रहा है, इसलिए मौजूदा हालात को देखते हुए यह फैसला लिया गया. व्हाइट हाउस के अनुसार यह छूट स्थायी नहीं बल्कि सीमित समय के लिए है और इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार में संतुलन बनाए रखना है.

ग्लोबल ऑयल सप्लाई को स्थिर रखने की कोशिश

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान करोलाइन लेविट ने कहा कि इस फैसले का मकसद रूस को आर्थिक फायदा पहुंचाना नहीं है, बल्कि दुनिया में तेल की आपूर्ति को स्थिर रखना है. हाल के दिनों में ईरान से जुड़े युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. ऐसे में अगर बड़े देशों की जरूरतें पूरी नहीं होतीं तो कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है. इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ने भारत को अस्थायी राहत देने का निर्णय लिया ताकि वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहे और ऊर्जा संकट गहरा न हो.

ईरान युद्ध बना मुख्य कारण

व्हाइट हाउस के मुताबिक इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव और ईरान से जुड़ा युद्ध है. इस संघर्ष के कारण कई सप्लाई रूट प्रभावित हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कमी महसूस की जा रही है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि भारत को मिलने वाला रूसी तेल पहले से ही समुद्री रास्तों से आ रहा था. इसलिए इससे रूस की सरकार को कोई अतिरिक्त या बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, जबकि इससे वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहेगी.

अमेरिकी वित्त विभाग की भी रही भूमिका

इससे पहले अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी संकेत दिया था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर तेल बाजार पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले भारत से रूसी तेल खरीद कम करने को कहा था और भारत ने इसमें सहयोग भी किया. लेकिन अब हालात बदल गए हैं और वैश्विक सप्लाई में कमी के कारण अस्थायी रूप से भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह कदम पूरी तरह परिस्थितियों को संभालने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है.

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खुर्शीद ने हिंदी पत्रकारिता जगत में 2020 से अपने करियर की शुरुआत की थी, सबसे पहले उन्हें लोकमत में काम करने का मौका मिला, यहां पर वह राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ करंट खबरों पर लिखा करते थे. इसके बाद न्यूज 24 और वार्ता 24 में काम करने का मौका मिला. अब गलगोटियाज टाइम्स में कार्यरत हैं.
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