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अब नहीं कह सकते हैं कि कानून के आंखों पर पट्टी है, किसने हटा दिया इस काली पट्टी को
Authored By: सतीश झा
Published On: Thursday, October 17, 2024
Last Updated On: Thursday, October 24, 2024
भारत की न्याय प्रणाली के प्रतीक के रूप में न्याय की देवी की आंखों पर बंधी काली पट्टी को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतीकात्मक बदलाव के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अब कानून अंधा नहीं है, बल्कि खुली आंखों और संविधान के मार्गदर्शन के अनुसार न्याय करता है।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Thursday, October 24, 2024
देश में न्याय की प्रक्रिया और उसके प्रतीक के रूप में एक बड़ा परिवर्तन हुआ है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट ने न्याय की देवी का पारंपरिक प्रतीक बदल दिया है। अब न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी नहीं है, बल्कि उनके नेत्र खुले हैं और हाथ में तलवार के बजाय संविधान है।
संदेश: “कानून अब अंधा नहीं, बल्कि संविधान के अनुसार न्याय करता है।”
न्याय की देवी का नया रूप
यह परिवर्तन भारतीय न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास और उसकी पारदर्शिता को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। परंपरागत रूप से, न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी बंधी होती थी, जिससे यह प्रतीक होता था कि कानून अंधा है और पक्षपात नहीं करता। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इसे बदलकर यह संदेश दिया है कि भारत की न्याय प्रणाली अब संविधान के अनुसार काम करती है और हर मामले को संविधान के प्रावधानों के अनुसार परखा जाता है।
#दिल्ली– #सुप्रीम_कोर्ट में #CJIDYChandrachud ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए कोर्ट रूम में रखी न्याय की देवी की प्रतिमा से आंखों की पट्टी हटा दी। साथ ही हाथ में तराजू की जगह संविधान की किताब रखी गयी। #डीवाई_चंद्रचूड़ #SupremeCourt #SupreCourtOfIndia #Chandrchud pic.twitter.com/WTE1uRhc0J
— Galgotias Times (@galgotiastimes) October 16, 2024
क्यों हटाई गई काली पट्टी?
पहले न्याय की देवी की आंखों पर बंधी पट्टी यह संकेत देती थी कि कानून सभी के लिए समान है और वह बिना किसी भेदभाव के, निष्पक्ष निर्णय लेता है। लेकिन समय के साथ, यह प्रतीक आलोचना का भी शिकार हुआ क्योंकि यह धारणा दी गई कि कानून वास्तविकता से अंधा है और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर देता है।
CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने इस पुराने प्रतीक को बदलने का कदम उठाते हुए कहा कि आज के समय में, भारतीय न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और संवेदनशील होने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतीक को बदलकर यह स्पष्ट कर दिया कि न्याय अब संविधान के अनुसार, खुली आंखों से, हर तथ्य और साक्ष्य का मूल्यांकन करके होता है।
न्याय की पारदर्शिता पर जोर
CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि देश की न्याय प्रणाली की पारदर्शिता और संविधान के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया जा सके। न्याय अब केवल अंधा नहीं है, बल्कि खुले नेत्रों से, संविधान के निर्देशानुसार न्याय करता है।
प्रतिक्रिया और महत्व
इस ऐतिहासिक बदलाव पर कानूनविदों और न्यायाधीशों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह कदम देश के न्यायिक तंत्र के विकास और उसमें सुधार का प्रतीक है। इससे जनता को न्याय व्यवस्था पर और अधिक भरोसा मिलेगा और देश के संविधान के प्रति सम्मान भी बढ़ेगा।
यह परिवर्तन न्यायपालिका की आधुनिक सोच और समाज में कानून की सुदृढ़ भूमिका का प्रतीक है। अब देश की न्याय प्रणाली का उद्देश्य स्पष्ट है—संविधान की मूल भावना के आधार पर न्याय सुनिश्चित करना।













