फादर्स डे (Father’s Day) विशेष (16 जून) : संस्कारों के साथ बढ़े आगे

Authored By: रवींद्र झा, वरिष्ठ लेखक

Published On: Sunday, June 16, 2024

Last Updated On: Thursday, June 27, 2024

mukesh gupta chairman graphisads limited
mukesh gupta chairman graphisads limited

हर वर्ष 16 जून को फादर्स डे पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह पिता और पुत्र के बीच गहरे आत्मीय संबंधों को याद करने और रिश्तों की गर्मजोशी से जीवन को खुश रखने और आगे बढाने का संकल्प लेने का दिन है। आज फादर्स डे पर आइए मिलते हैं देश की जानी मानी विज्ञापन एजेंसी ग्राफिकएड्स के फाउंडर और चेयरमैन मुकेश गुप्ता और डायरेक्टर आलोक गुप्ता से और उनसे जानते हैं कि पिता-पुत्र का रिश्ता उनके लिए कैसे हर दिन नई ऊर्जा लेकर आता है...

Authored By: रवींद्र झा, वरिष्ठ लेखक

Last Updated On: Thursday, June 27, 2024

इस लेख में:

  • ग्राफिकएड्स के चेयरमैन मुकेश गुप्ता ने अपने पिता से विरासत में मिले संकल्प और संस्कार से पाई अनवरत आगे बढने की ऊर्जा

  • बेटे आलोक गुप्ता (डायरेक्टर, ग्राफिकएड्स) को भी संस्कारों और मूल्यों के साथ दी आगे बढने की प्रेरणा

पचास से अधिक वर्षों से विज्ञापन के क्षेत्र में सक्रिय ग्राफिसएड्स लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश गुप्ता (Mukesh Gupta, Chairman, GraphisAds Limited) मीडिया जगत में एक प्रसिद्ध नाम हैं। कंपनी के डायरेक्टर उनके सुपुत्र आलोक गुप्ता भी 360° विज्ञापन सेवाएं प्रदान करने के लक्ष्य के साथ कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

आप पिता-पुत्र को रिश्ते को किस तरह से देखते हैं? इसने आपको लगातार प्रेरित करने और आगे बढने में किस तरह मदद की है?

mukesh gupta and alok guptaमेरे लिए पिता स्वर्ग हैं, पिता धर्म हैं, वे मेरे जीवन के परम पूज्य हैं। मेरा मानना है कि जब वे खुश होते हैं, तो सभी देवता खुश होते हैं। मेरा मानना है कि एक पिता अपने बेटे के लिए सबसे बड़ा हीरो और आदर्श होता है। मेरे पिता, स्वर्गीय ईश्वर प्रकाश गुप्ता मेरे आदर्श थे। उन्होंने मुझे बचपन में ही समझाया कि कोई भी व्यक्ति संघर्ष और परीक्षाओं से नहीं बच सकता, यहां तक कि प्रभु श्रीराम भी इसके अपवाद नहीं रहे। बचपन से ही उन्होंने मुझे राष्ट्रवाद, पारिवारिक समरसता, ईमानदारी और व्यवसाय में कड़ी मेहनत की सीख दी।

मुकेश गुप्ता बेटे आलोक के साथ

कृपया कारोबार की दिशा में अपने शुरुआती सफर और संषर्ष के बारे में बताएं।

दरअसल, व्यवसाय मेरे खून में है। मेरे पिता जगाधरी, हरियाणा में एक प्राइवेट कंपनी में कार्य करते थे। उन्होंने वहां एक छोटी सी किराने की दुकान भी खोली, जिसे मेरे दादा जी संभालते थे। मैं 5 साल की उम्र में ही उनके साथ बैठने लगा था। 6 साल की उम्र में हम दिल्ली आ गए।

इस प्रारंभिक अनुभव ने मेरे जीवन और व्यक्तित्व में नैतिकता और दृढ़ संकल्प को आकार दिया। दिल्ली में मेरे पिताजी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रकाशनों के लिए काम करने का मौका मिला, जहां वे पूरे देश से पत्र पत्रिकाओं के सब्सक्रिप्शन और विज्ञापन लेने का काम करते थे। 1975 में आपातकाल के दौरान आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया और प्रकाशन बंद हो गए। मैं उस समय केवल 13 साल का था और मेरे पिता का नाम भी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने वालों की लिस्ट में में था, क्योंकि वे आरएसएस में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप से शामिल थे।

यह अवधि राजनीतिक अशांति और दमन से भरी हुई थी। आजीविका के लिए संघर्ष था। इस महत्वपूर्ण समय के दौरान मेरे पिता के अनुभवों और विभिन्न क्षेत्रों में उनके अनुभव ने मेरे दृढ़ संकल्प को भी प्रभावित किया। एक शुभचिंतक के सुझाव पर मेरे पिता ने शून्य निवेश से राष्ट्रीय एडवरटाइजिंग एजेंसी प्रारंभ की। मेरी उम्र तब सिर्फ़ 13 वर्ष थी और मैं शुरुआत से ही उनके साथ जुड़ गया, साथ ही अपनी पढ़ाई जारी रखी। काम की शुरुआत साइकिल और बस से किराए के घर से हुई।

कड़ी मेहनत और ईमानदारी से काम करने के अच्छे परिणाम मिले। पांच वर्षों के भीतर, हमने एक कार और एक स्वतंत्र घर खरीदा। उसके बाद हमने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

ग्राफिकएड्स से कैसे जुडे और किस तरह इसे आगे बढाया?

सिर्फ समाचार पत्र विज्ञापन से शुरू करके, हमने ग्राफिस एड्स को 1997 में टेक ओवर किया और इसे एक संपूर्ण 360° विज्ञापन एजेंसी में परिवर्तित किया, जिसमें आउटडोर मीडिया ओनरशिप, क्रिएटिव स्टूडियो, इवेंट मैनेजमेंट, डिजिटल मीडिया आदि जैसे विभिन्न पहलू जोड़े। आज हम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टेड कंपनी हैं।

आप अपने पिता के किन गुणों को खासतौर पर याद करना चाहेंगे, जिसे आप अपने बेटे में देखना चाहते हैं?

alok gupta1मेरे पिता ने ईमानदार और मेहनती होना सिखाया। इस सिद्धांत ने मेरी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को शानदार रूप प्रदान किया। उन्होंने मुझे सिखाया कि हमारे क्लाइंट्स को उनके द्वारा खर्च किए जा रहे पैसे की पूरी कीमत मिलनी चाहिए। यही चीज क्लाइंट की सफलता और स्थायित्व सुनिश्चित करती है। मैंने वही मूल्य अपने बेटे में भी समाहित करने की कोशिश की है। मेरे पुत्र आलोक ने बर्मिंघम से बीबीए किया है, और विदेश में रहते हुए भी, उन्होंने हमारे परिवार के सांस्कृतिक मूल्यों और जीवनशैली को बखूबी अपनाया।

अपने सांस्कृतिक मूल्यों (Cultural Values) और नई पीढी के साथ संतुलन स्थापित करने को आप किस रूप में देखते हैं?

हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। मेरा जन्म 1962 में हुआ था। मैंने 6 दशक देख लिए हैं और अब सातवें में प्रवेश कर चुका हूं। हर दशक में एक नई पीढ़ी आती है जो नई सोच और स्थिति को चुनौती देती है। आज हमारी पीढ़ी के पास कोई विकल्प नहीं है सिवाय इसके कि हम नई पीढ़ी के साथ मिलकर काम करें। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें “संस्कार” सिखाएं और सुनिश्चित करें कि वे “धर्म” की राह पर चलें। हमें नए नए प्रयोग करने के लिए तैयार रहना होगा। हमने एक विज्ञापन एजेंसी के रूप में शुरुआत की, फिर आउटडोर मीडिया ओनरशिप में कदम रखा जो एक पूरी तरह से अलग व्यवसाय था, फिर हमने क्रिएटिव सेवाएं जोड़ीं, हमारे ग्राहकों ने इवेंट मैनेजमेंट की मांग की, इसलिए हमने उस व्यवसाय में कदम रखा, अब हम डिजिटल मार्केटिंग भी प्रदान करते हैं। ये सभी आज के ग्राहकों की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। अब हम अपने क्लाइंट्स को संपूर्ण 360 डिग्री विज्ञापन समाधान प्रदान करते हैं।

निजी तौर पर आपको क्या पसंद है? अपनी पसंद को कारोबार से जोडने की दिशा में किस तरह से सफल रहे हैं?

मुझे बॉलीवुड के पुराने गाने गाना सुनना पसंद है। विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर, हमने जगजीत सिंह, पंकज उदास, अनूप जलोटा और गुलाम अली जैसे लोकप्रिय कलाकारों के साथ संगीत कार्यक्रम आयोजित किए हैं। हालांकि इन सबको सामाजिक कार्यक्रम के रूप में किया गया लेकिन इन्हें देखकर हमारे क्लाइंट्स ने भी मांग की कि हम उनके लिए इवेंट मैनेजमेंट और सेलिब्रिटी मैनेजमेंट करें। इसलिए 15 वर्ष पहले हमने छोटे पैमाने पर इवेंट्स और एग्जिबिशंस के आयोजन शुरू किए। अब यह हमारे व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हम साल भर में विभिन्न क्लाइंट्स के लिए 50 से भी ज्यादा कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस वर्ष तो एक दिन में भारत भर में 4 समानांतर कार्यक्रम आयोजित करने का हमने रिकॉर्ड बनाया।

हाल ही में हमने साउथ दिल्ली में एनसीयूआई ऑडिटोरियम भी लिया है, जिसमें 600 लोगों के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। साथ ही मीटिंग हॉल्स भी हैं जिसमें 50 से 200 लोगों तक के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

ईश्वर और ईश्वरीय शक्ति (Divine Power) को आप किस रूप में लेते हैं और इससे आपको किस तरह ऊर्जा मिलती है?

मुझे ईश्वरीय शक्ति में गहरा विश्वास है। मैंने हमेशा महसूस किया कि कोई अज्ञात शक्ति मुझे सुरक्षा प्रदान कर रही है। जब भी मुझे किसी समस्या का सामना होता था तो अचानक ही एक समाधान प्रकट होता था, जो मेरे मन मस्तिष्क में नहीं आता था, और हम हर समस्या को पार कर लेते थे। मेरा मानना है कि कोई तो अज्ञात शक्ति है जिसने इस जगत को बनाया है और पालन कर रहा है।

प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगभग एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव। जटिल विषयों को सरल और रोचक शैली में परोसने की कला में निपुण। विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी एकत्र करना और उसका सटीक विश्लेषण करना।
Leave A Comment

अन्य खबरें