अठारह क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग (Election Commission) में अभी तक अपना ऑडिट रिपोर्ट नहीं कराया जमा

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Saturday, July 20, 2024

Last Updated On: Saturday, July 20, 2024

Election Commission of India
Election Commission of India

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर 57 क्षेत्रीय राजनीतिक दल पंजीकृत हैं। इनमें वित्त वर्ष 2022-23 के लिए सिर्फ 39 क्षेत्रीय दलों ने अपनी आय और व्यय की जानकारी चुनाव आयोग को दी है। जबकि सभी पार्टियों को ऑडिट रिपोर्ट आयोग को देना अनिवार्य है।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Saturday, July 20, 2024

चुनाव आयोग के निर्देश के बाद भी कई क्षेत्रीय पार्टियों ने वर्ष 2022-23 की अपनी आय-व्यय की जानकारी नहीं दी है। जानकारी नहीं देने वाली महत्वपूर्ण क्षेत्रीय पार्टियों में फारूख अब्द्दुला की जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस, उद्धव ठाकरे की शिव सेना, शरद पवार की एनसीपी आदि है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर क्षेत्रीय दलों के आय-व्यय का विश्लेषण किया है।

क्षेत्रीय दलों (Regional Parties) की कमाई हजारों करोड़ में

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर 57 क्षेत्रीय राजनीतिक दल पंजीकृत हैं। इनमें वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 39 क्षेत्रीय दलों ने अपनी आय और व्यय की जानकारी चुनाव आयोग को दी है। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक इन 39 क्षेत्रीय दलों को वित्त वर्ष 2022-23 में कुल आय 1740.49 करोड़ रुपए हुई थी। इनमें सबसे ज्यादा कमाई तेलंगना की बीआरएस को हुई थी। उन्होंने इस वित्त वर्ष में 737 करोड़ रुपए से अधिक की आय होने की सूचना चुनाव आयोग को दी है। यह राशि अन्य सभी क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की आय का 42 प्रतिशत से अधिक है। यानी क्षेत्रीय दलों की कुल आय का करीब आधा बीआरएस को दान मिला था।

90 प्रतिशत दान 5 क्षेत्रीय दलों को

सबसे अधिक आय जहां बीआरएस को हुआ है। उसके बाद दूसरे नंबर पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की आय 333 करोड़ रुपए से अधिक हुई है। इनका प्रतिशत करीब 20 है। आय के मामले में तीसरे नंबर पर डीएमके है। इन्हें 214 करोड़ से अधिक की आय हुई थी। इन्हें कुल आय का करीब 12.32 प्रतिशत आय हुई है। एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में विश्लेषण कर बताया है कि शीर्ष 5 दलों की कुल आय 1541 करोड़ रुपए से अधिक थी। इन पांच क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को कुल आय का 88.56 प्रतिशत थी।

खर्च के मामले में तृणमूल सबसे आगे

आय के मामले में जहां बीआरएस (BRS) पहले स्थान पर है वहीं खर्च के मामले में सबसे आगे तृणमूल कांग्रेस है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 181.1 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह सभी क्षेत्रीय दलों के कुल खर्च का 37.6 प्रतिशत है। पैसा खर्चने में इसके बाद वाईएसआरसीपी (YSRPC) है। इस पार्टी ने 79.3 करोड़ रुपये 16.49 प्रतिशत खर्च किए है। तीसरे नंबर पर बीआरएस है। बीआरएस ने 57.4 करोड़ रुपये यानी करीब 12 प्रतिशत खर्च किया है। तमिलनाडु की स्टालिन की पार्टी डीएमके ने 52.6 करोड़ रुपये करीब 11 प्रतिशत खर्च किया है। उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (SP) ने 31.4 करोड़ रुपये यानी 6.5 प्रतिशत खर्च की है।

पिछले साल 31 अक्टूबर तक देना था आय-व्यय

चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को अपना आय-व्यय 31 अक्टूबर, 2023 तक जमा करने के लिए कहा था। 31 अक्टूबर तक सिर्फ 16 दलों ने ही आय-व्यय का लेखा-जोखा आयोग में जमा करवाया। 23 पार्टियों ने देर से रिपोर्ट जमा की। एडीआर के मुताबिक 18 क्षेत्रीय पार्टियों की ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी। इनमें शिवसेना (Shivsena), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) जैसी प्रमुख पार्टियां शामिल हैं।

चुनाव आयोग ने 19 नवंबर 2014 को सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों एवं महासचिवों को पत्र भेजकर कहा था कि पार्टियों को अपनी ऑडिट रिपोर्ट प्रत्येक साल चुनाव आयोग में जमा करना अनिवार्य है।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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