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अजित पवार का निधन, बारामती प्लेन क्रैश में अंत, जानें छह बार डिप्टी सीएम रहे नेता की राजनितिक सफर, कुल संपत्ति
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, January 28, 2026
Last Updated On: Wednesday, January 28, 2026
Ajit Pawar: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और छह बार डिप्टी सीएम रहे अजित पवार का बारामती में हुए प्लेन क्रैश में निधन हो गया. चुनाव प्रचार के दौरान हुए इस हादसे ने राज्य की राजनीति को झकझोर कर रख दिया. साधारण पृष्ठभूमि से सत्ता के केंद्र तक पहुंचे अजित पवार ने दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित किया. उनके निधन से एक सक्रिय और प्रभावशाली नेता का अध्याय खत्म हो गया. जानिए उनकी कुल संपत्ति और राजनीतिक सफर….
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, January 28, 2026
Ajit Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति के लिए 28 जनवरी 2026 की सुबह एक गहरे सदमे के साथ आई. बारामती में हुए भीषण प्लेन क्रैश में राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार का निधन हो गया. वे चुनाव प्रचार के सिलसिले में बारामती जा रहे थे, तभी लैंडिंग के दौरान उनका निजी विमान रनवे से फिसल गया और आग की चपेट में आ गया. इस हादसे में अजित पवार समेत कुल छह लोगों की मौत हो गई. जैसे ही यह खबर सामने आई, पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई और राजनीतिक गतिविधियां अचानक थम सी गईं.
चुनाव प्रचार के दौरान हुआ हादसा
अजित पवार उस दिन पुणे जिले में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए चार जनसभाओं को संबोधित करने वाले थे. सुबह मुंबई से रवाना हुआ लियर जेट 45 विमान बारामती एयरपोर्ट पर उतरने ही वाला था, तभी सुबह करीब 8:48 बजे यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका. इस दुर्घटना ने न सिर्फ एक नेता की जान ली, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति से एक बेहद सक्रिय चेहरा भी छीन लिया.
परिवार, जो हर मोड़ पर रहा साथ
अजित पवार के परिवार में उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार, बड़े बेटे पार्थ पवार और छोटे बेटे जय पवार शामिल हैं. सुनेत्रा पवार अक्सर चुनावी रैलियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके साथ नजर आती थीं. बेटे पार्थ पवार भी राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं. परिवार के अन्य सदस्यों में उनके बड़े भाई श्रीनिवास पवार और बहन विजया पाटिल हैं. सबसे अहम रिश्ता उनके चाचा शरद पवार का रहा, जो न सिर्फ परिवार के वरिष्ठ सदस्य थे, बल्कि उनके राजनीतिक गुरु भी माने जाते थे.
साधारण शुरुआत से सत्ता के शिखर तक
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवरा गांव में हुआ था. पिता अनंतराव पवार के निधन के बाद उन्हें कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़कर परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी. राजनीति में उनका प्रवेश 1982 में सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड सदस्य के रूप में हुआ. यही से उनके लंबे और उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक सफर की नींव पड़ी.
1991 का चुनाव और चाचा के लिए त्याग
1991 में अजित पवार ने बारामती लोकसभा सीट से जीत हासिल कर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा. यह जीत उनके लिए अहम थी, लेकिन उससे भी बड़ा फैसला तब आया, जब उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी, ताकि वे केंद्र सरकार में मंत्री बन सकें. इस फैसले ने उस दौर में अजित पवार की राजनीतिक निष्ठा और पारिवारिक प्रतिबद्धता को दिखाया.
छह बार डिप्टी सीएम बनने का रिकॉर्ड
अजित पवार महाराष्ट्र के इतिहास में सबसे ज्यादा बार उपमुख्यमंत्री बनने वाले नेता रहे. उन्होंने कुल छह बार यह पद संभाला. सिंचाई, वित्त और प्रशासन जैसे अहम विभागों में रहते हुए उनकी छवि एक सख्त, तेज फैसले लेने वाले और समय के पाबंद नेता की बनी. हालांकि 2012 के सिंचाई घोटाले और कुछ विवादित बयानों को लेकर वे आलोचनाओं में भी रहे, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ कभी कमजोर नहीं पड़ी.
शरद पवार से अलग राह और सत्ता की बिसात
समय के साथ अजित पवार ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई. 2023 में उन्होंने एनसीपी में बगावत कर बहुमत विधायकों के साथ अलग गुट बनाया. चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मिलने के बाद उनकी पार्टी ‘एनसीपी अजित पवार गुट’ के रूप में जानी गई. वे बीजेपी और शिवसेना के साथ महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री बने और सत्ता के केंद्र में बने रहे.
करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए पीछे
अजित पवार सिर्फ राजनीति में ही नहीं, संपत्ति के मामले में भी महाराष्ट्र के सबसे अमीर नेताओं में गिने जाते थे. चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति करीब 124 करोड़ रुपये थी. इसमें कृषि भूमि, व्यावसायिक संपत्तियां, आवासीय मकान, बैंक डिपॉजिट, शेयर निवेश, गाड़ियां और कीमती आभूषण शामिल थे. हालांकि उनके ऊपर करीब 21 करोड़ रुपये की देनदारी भी दर्ज थी.
देशभर में शोक, राजनीति में खालीपन
अजित पवार के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई बड़े नेताओं ने शोक जताया. यह हादसा न सिर्फ एक व्यक्ति की मौत है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक ऐसे अध्याय का अंत है, जो हमेशा सक्रिय, विवादित और प्रभावशाली रहा. मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन सत्ता की राजनीति में अजित पवार की छाप लंबे समय तक याद की जाएगी.
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