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वक्फ बोर्ड की ‘असीमित’ शक्तियों को ‘सीमित’ करने की तैयारी शुरू
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Monday, August 5, 2024
Last Updated On: Monday, August 5, 2024
केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने की योजना बना रही। इसको लेकर सरकार जल्द ही वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन से संबंधित बिल संसद में पेश करेगी।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Monday, August 5, 2024
वक्फ बोर्ड की ‘असीमित’ शक्तियों को सीमित करने की मांग वर्षों पुरानी है। यह मांग हिंदू संगठनों का नहीं बल्कि मुस्लिम समुदायों के कुछ संगठनों की ओर से की जाती रही है। लेकिन अब तक किसी सरकार ने इनकी असीमित शक्तियों को सीमित करने का साहस नहीं दिखाया। इसके उलटे वर्ष 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने वक्फ बोर्ड की शक्तियों को और ज्यादा असीमित कर दिया। साथ ही बोर्ड को पूर्ण स्वायत्तता दे दी गई। इनकी शक्ति इतनी असीमित हो गई कि यदि बोर्ड किसी व्यक्ति या संस्था की संपत्ति को अपना कह दिया तो वह व्यक्ति यह संस्था न्यायालय नहीं जा सकते। उसे अपने मामले को लेकर वक्फ बोर्ड के पास ही जाना होगा। यही नहीं यदि वक्फ बोर्ड के फैसले से आप असंतुष्ट हैं, तब भी आप न्यायालय नहीं जा सकते। ऐसी असीमित शक्ति दुनिया के किसी देश में किसी संस्था को प्राप्त नहीं है।
असीमित शक्ति को सीमित करने की तैयारी
केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने की योजना बना रही। इसको लेकर सरकार जल्द ही वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन से संबंधित बिल संसद में पेश करेगी। बताया जा रहा है कि पिछले कैबिनेट मीटिंग में संशोधनों पर चर्चा कर उस पर मोहर लगा दी गई है। सूत्र बताते हैं कि वक्फ बोर्ड अधिनियम में करीब 40 संशोधन लेकर सरकार आएगी। इसे इसी बजट सत्र के दौरान सांसद में लाने की तैयारी है।
क्या-क्या हो सकते हैं संशोधन
एक सूत्र ने बताया कि नए बिल में बोर्ड की उन शक्तियों को कम किया जाएगा, जिसके तहत वह किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बताते रहे हैं। वक्फ अधिनियम में शामिल कई प्रावधानों को खत्म किया जा सकता है। यदि संशोधन सांसद में पास होता है तो इसके बाद वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के वेरीफिकेशन अनिवार्य हो जाएगा। इसमें कहा गया है कि इससे संपत्तियों के दुरुपयोग पर रोक लगाया जा सकेगा। कहा जाता है कि वर्तमान समय में भारतीय सेना और भारतीय रेल के बाद सबसे अधिक संपत्ति वक्फ बोर्ड के पास ही है। बोर्ड के ही आंकड़ें को माने तो देश भर में 8.7 लाख से अधिक संपत्तियां बोर्ड के पास है। यह लगभग 9.4 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र का है।
कैसे हुई वक्फ के पास इतनी संपत्तियां
देश में जहां भी कब्रिस्तान है, वह वक्फ बोर्ड के ही अधीन है। साथ ही मजारें भी वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आता है। जब कब्रिस्तान के विकास आदि के लिए उसका घेराबंदी या अन्य कार्य होता है तो उसके आसपास की जमीन को भी बोर्ड अपना बताकर उसे अपने कब्जे में ले लेता है। यही मजारों के आसपास की जमीन के साथ भी होता है। आज भी अधिकांश परिवारों के पास पुश्तैनी जमीनों का पूरा पेपर नहीं है। वक्फ बोर्ड इसी का लाभ उठता रहा है। क्योंकि जब भी वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को अपना बताकर कब्जे में लेता है, तब बोर्ड को बताने की जरूरत नहीं है कि यह संपत्ति उसकी है। बल्कि जमीन के असली मालिक को साबित करना होता है कि कैसे उसकी जमीन वक्फ की नहीं है। हालांकि 1995 के वक्फ कानून में यह जरूर कहा गया है कि वह किसी निजी संपत्ति पर अपना दावा नहीं कर सकता। लेकिन जब निजी संपत्ति पर कब्जा करना है तो वह क्यों कहेगा कि उसके द्वारा अधिकार में लिया गया जमीन किसी की निजी संपत्ति है।
कैसे-कैसे बढ़ी वक्फ बोर्ड की शक्तियां
आजादी के 7 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू ने वर्ष 1954 में वक्फ बोर्ड का गठन किया था। हालांकि तब बोर्ड के पास असीमित शक्तियां नहीं थीं। 1995 में कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने ने वक्फ एक्ट 1954 में संशोधन बोर्ड की शक्तियां असीमित कर दीं। यह सब सिर्फ मुस्लिम वोटबैंक के लिए किया गया था। 1995 के संशोधन के मुताबिक अगर कोई संपत्ति, किसी भी उद्देश्य के लिए मुस्लिम कानून के मुताबिक पाक (पवित्र), मजहबी (धार्मिक) या (चेरिटेबल) परोपरकारी मान लिया जाए तो वह वक्फ की संपत्ति हो जाएगी। इसके आर्टिकल 40 के मुताबिक जमीन किसकी है, यह वक्फ का सर्वेयर और बोर्ड तय करेगा। फिर इसमें वर्ष 2013 में आम चुनाव से कुछ पहले काँग्रेसनीत यूपीए सरकार ने वक्फ कानून में संशोधन बोर्ड की शक्तियों को और असीमित और इसे पूर्णतः स्वायत्त कर दिया।
वर्ष 2013 के संशोधन के बाद अगर किसी की संपत्ति को वक्फ अपनी बता दी तो वह व्यक्ति वक्फ के खिलाफ न्यायालय नहीं जा सकते। उसे वक्फ बोर्ड के ही शरण में जाना होगा। फिर बोर्ड का जो भी फैसला आएगा, उसे भी वह व्यक्ति न्यायालय में चुनौती नहीं दे सकता। बोर्ड के फैसले के खिलाफ वह वक्फ ट्राइब्यूनल में जा सकता है। वक्फ कानून का यह भी कहता है कि ट्राइब्यूनल के फैसले को वह व्यक्ति यह संस्था उच्च या उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती नहीं दे सकता है। यानी इस देश में वक्फ बोर्ड को सभी न्यायालय से भी ऊपर कर दिया गया है।













