Lifestyle News
Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत 2026 कब है? जानें सही तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, April 24, 2026
Last Updated On: Friday, April 24, 2026
Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत 2026 में 16 मई और 29 जून को मनाया जाएगा. यह व्रत महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक है. जानें सही तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और वट वृक्ष पूजा का धार्मिक महत्व आसान भाषा में.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, April 24, 2026
Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति में महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है. यह व्रत सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. साल 2026 में यह व्रत दो अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाएगा, जिससे इसकी खासियत और भी बढ़ जाती है. यह दिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का अवसर होता है.
कब है वट सावित्री व्रत 2026?
वट सावित्री व्रत साल में दो बार मनाया जाता है, और दोनों ही तिथियों का अपना अलग महत्व होता है.
- पहली तिथि: 16 मई 2026 (ज्येष्ठ अमावस्या)
- दूसरी तिथि: 29 जून 2026 (ज्येष्ठ पूर्णिमा)
इन दोनों तिथियों के बीच लगभग 15 दिन का अंतर होता है. खास बात यह है कि 16 मई 2026 को शनि जयंती भी मनाई जाएगी, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है.
पूजा का शुभ मुहूर्त
व्रत का सही समय जानना बहुत जरूरी होता है ताकि पूजा विधि पूर्ण रूप से सफल हो सके.
ज्येष्ठ अमावस्या (16 मई 2026)
- तिथि प्रारंभ: सुबह 5:11 बजे
- तिथि समाप्त: 17 मई सुबह 1:30 बजे
- पूजा मुहूर्त: सुबह 7:12 से 8:24 तक
ज्येष्ठ पूर्णिमा (29 जून 2026)
- तिथि प्रारंभ: सुबह 3:06 बजे
- तिथि समाप्त: 30 जून सुबह 5:26 बजे
- पूजा मुहूर्त: सुबह 8:55 से 10:40 तक
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. मान्यता है कि जो महिला श्रद्धा और भक्ति के साथ यह व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत पति की आयु को बढ़ाने और वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने का प्रतीक है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है. यह व्रत नारी की शक्ति, त्याग और अटूट प्रेम का भी प्रतीक है, जो सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा हुआ है.
व्रत करने की विधि (पूजा कैसे करें?)
वट सावित्री व्रत की पूजा विधि सरल है, लेकिन इसे पूरी श्रद्धा के साथ करना जरूरी है.
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- वट (बरगद) के पेड़ के नीचे पूजा की सामग्री लेकर जाएं.
- रोली, चावल, फूल, धूप और दीप से विधिपूर्वक पूजा करें.
- वट वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा करें.
- कच्चा सूत (मौली) पेड़ के चारों ओर लपेटें.
- सावित्री और सत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें.
- अंत में पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन की प्रार्थना करें.
वट वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है?
वट वृक्ष को हिंदू धर्म में अमरता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि इस दिन इसकी पूजा विशेष रूप से की जाती है. मान्यता है कि इस वृक्ष के हर भाग में देवताओं का वास होता है.
- जड़ में ब्रह्मा का निवास माना जाता है
- तने में विष्णु का वास होता है
- शाखाओं में भगवान शिव का निवास माना जाता है
इसलिए वट वृक्ष की पूजा करने से त्रिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
परंपरा में छिपा संदेश
वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक गहरा संदेश भी देता है. यह व्रत हमें सिखाता है कि रिश्तों में विश्वास, त्याग और समर्पण कितना जरूरी है. सावित्री की अटूट निष्ठा और प्रेम ने मृत्यु को भी मात दे दी, जो आज भी हर महिला के लिए प्रेरणा है.
इस व्रत के जरिए महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं, बल्कि अपनी आस्था और शक्ति का भी प्रदर्शन करती हैं. यही वजह है कि यह व्रत सदियों से परंपरा का हिस्सा बना हुआ है और आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.
















