Thalapathy Vijay: तमिलनाडु की राजनीति में ऐसे उभरे सुपरस्टार विजय, कैसे बने जनता के नए भरोसेमंद जन नेता
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, May 4, 2026
Updated On: Monday, May 4, 2026
Thalapathy Vijay: तमिल सुपरस्टार विजय ने राजनीति में कदम रखकर खुद को “जन नेता” के रूप में स्थापित किया है. पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के बीच वे युवाओं की नई उम्मीद बनकर उभरे हैं. अब 2026 चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य और जनता के भरोसे की असली परीक्षा साबित होने वाला है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Monday, May 4, 2026
Thalapathy Vijay: विजय, जिन्हें फैंस “थलपति” के नाम से जानते हैं, ने 2024 में एक्टिंग से रिटायरमेंट लेकर राजनीति में कदम रखा तो यह सिर्फ एक करियर बदलाव नहीं था, बल्कि एक बड़े मिशन की शुरुआत थी. तमिल सिनेमा में 90 के दशक से लोकप्रिय रहे विजय ने अपनी फिल्मों में हमेशा सिस्टम से लड़ने वाले किरदार निभाए. उनकी फिल्मों में दिखने वाला आम आदमी का गुस्सा और न्याय की लड़ाई, धीरे-धीरे उनकी असली पहचान बन गई. यही वजह है कि जब उन्होंने राजनीति में एंट्री की, तो लोगों ने उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक संभावित “जन नेता” के रूप में देखना शुरू कर दिया.
तमिलनाडु की राजनीति और नई उम्मीद
तमिलनाडु की राजनीति पिछले करीब 60 सालों से दो प्रमुख दलों DMK और AIADMK के बीच सिमटी रही है. द्रविड़ आंदोलन से निकली इस राजनीति ने सामाजिक न्याय और पहचान की लड़ाई तो जीती, लेकिन आज की युवा पीढ़ी के सामने रोजगार, भ्रष्टाचार और अवसरों की कमी जैसे सवाल खड़े हैं. ऐसे में विजय एक नए विकल्प के रूप में उभरे हैं, जो पारंपरिक राजनीति से हटकर “पोस्ट-द्रविड़” सोच की बात करते हैं. उनका फोकस जाति या धर्म से ज्यादा गवर्नेंस और युवाओं के भविष्य पर है, जो उन्हें अलग बनाता है.
फिल्मों से बनी राजनीतिक जमीन
विजय की फिल्मों ने उनके राजनीतिक सफर की मजबूत नींव रखी. “थुपक्की”, “मर्सल” और “कत्थी” जैसी फिल्मों में उन्होंने भ्रष्ट सिस्टम, कॉर्पोरेट शोषण और सरकारी खामियों के खिलाफ आवाज उठाई. एस ए चंद्रशेखर के बेटे विजय को शुरुआत में “इलयाथलपति” यानी युवा नेता का टैग मिला, जो बाद में “थलपति” यानी लीडर में बदल गया. फिल्मों में उनका यह इमेज इतना मजबूत हुआ कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी बदलाव लाने वाले नेता के रूप में देखने लगे. यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी बन गई.
रजनीकांत और कमल हासन क्यों नहीं चले?
तमिलनाडु में रजनीकांत और कमल हासन जैसे बड़े सितारे भी राजनीति में आए, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली. रजनीकांत की राजनीति आध्यात्म और राष्ट्रवाद की ओर झुकी, जो राज्य की स्थानीय सोच से मेल नहीं खा पाई. वहीं कमल हासन के पास विचार तो थे, लेकिन जमीनी पकड़ कमजोर रही. इसके उलट विजय ने न तो किसी विरासत का सहारा लिया और न ही केवल स्टारडम पर भरोसा किया. उन्होंने खुद को जनता से जोड़ने की कोशिश की, जिससे उनका कनेक्शन ज्यादा मजबूत बना.
2026 चुनाव और विजय की असली परीक्षा
तमिलनाडु चुनाव 2026 में विजय की भूमिका पर पूरे देश की नजर है. उनकी आखिरी फिल्म “जन नायगन” भी उनके राजनीतिक संदेश को जनता तक पहुंचाने का एक माध्यम बनी. आज लोग यह देखना चाहते हैं कि क्या विजय सिर्फ एक लोकप्रिय चेहरा हैं या वास्तव में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं. उनकी जीत या प्रदर्शन न सिर्फ उनके राजनीतिक भविष्य को तय करेगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि क्या तमिलनाडु की जनता पारंपरिक राजनीति से हटकर नए नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार है. विजय अब सिर्फ सुपरस्टार नहीं, बल्कि उम्मीद और बदलाव का प्रतीक बन चुके हैं.
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