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Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव में बिना मुकाबले बनी तस्वीर, पवन सिंह समेत 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, June 11, 2026
Last Updated On: Thursday, June 11, 2026
Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए. भाजपा से पवन सिंह समेत चार, जेडीयू से चार, जबकि लोजपा (रामविलास) और आरजेडी से एक-एक उम्मीदवार जीते. इस परिणाम के बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की सदस्यता और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, June 11, 2026
Bihar MLC Election: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन कई नेताओं के लिए खुशखबरी लेकर आया. विधान परिषद की 10 रिक्त सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही परिणाम लगभग तय हो गया. नामांकन वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होते ही सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए. चूंकि जितनी सीटें खाली थीं, उतने ही उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए मतदान कराने की जरूरत ही नहीं पड़ी.
यह चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने संगठन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश की है. कई नए चेहरों को मौका मिला है, जबकि कुछ पुराने नेताओं ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है.
भाजपा के खाते में सबसे ज्यादा सीटें
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ी सफलता मिली. पार्टी के चार उम्मीदवार बिना किसी मुकाबले के विधान परिषद पहुंच गए.
भाजपा से निर्वाचित उम्मीदवार
- पवन सिंह
- संजय मयूख
- शीला पंडित
- अनिल ठाकुर
भाजपा ने इन नामों के जरिए संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को साधने का प्रयास किया है. खास तौर पर पवन सिंह के निर्विरोध निर्वाचन की चर्चा राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा हो रही है.
जेडीयू ने भी दिखाई ताकत
सत्ताधारी गठबंधन की प्रमुख पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने भी चार सीटों पर जीत दर्ज की. पार्टी के सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए.
जेडीयू से निर्वाचित सदस्य
- भारती मेहता
- निशांत कुमार
- ललन प्रसाद
- शिवानी देवी
इन नामों के चयन को आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठन विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है. जेडीयू ने महिला और युवा नेतृत्व को भी प्रतिनिधित्व देने का संदेश दिया है.
लोजपा और आरजेडी को भी मिला प्रतिनिधित्व
विधान परिषद की इस प्रक्रिया में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय जनता दल को भी एक-एक सीट मिली.
अन्य दलों से निर्वाचित उम्मीदवार
- अशरफ अंसारी (लोजपा-रामविलास)
- सुनील सिंह (आरजेडी)
इन दोनों नेताओं के निर्विरोध चुने जाने से संबंधित दलों की विधान परिषद में मौजूदगी और मजबूत होगी.
किसे हुआ सबसे बड़ा नुकसान?
जहां कई नेताओं के लिए यह चुनाव जीत का संदेश लेकर आया, वहीं कुछ नेताओं के लिए यह राजनीतिक झटका भी साबित हुआ. सबसे ज्यादा चर्चा पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है.
राजनीतिक समीकरण साफ होने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि उनकी विधान परिषद सदस्यता प्रभावित होगी. वर्तमान में वे बिहार सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं और तेज हो सकती हैं.
निर्विरोध चुनाव का क्या मतलब?
निर्विरोध निर्वाचन तब होता है जब उपलब्ध सीटों की संख्या और उम्मीदवारों की संख्या बराबर हो जाती है. ऐसी स्थिति में मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ती और सभी उम्मीदवार सीधे निर्वाचित घोषित कर दिए जाते हैं.
इस बार भी ठीक ऐसा ही हुआ. किसी उम्मीदवार ने नामांकन वापस नहीं लिया और न ही अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में रहे, जिसके कारण चुनावी मुकाबले की नौबत नहीं आई.
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
विधान परिषद चुनाव के इस नतीजे ने बिहार की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है. भाजपा और जेडीयू ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, जबकि सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व मिला है. दूसरी ओर कुछ नेताओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी होती दिखाई दे रही हैं. आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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