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महिला बनाम दलित या सियासत की नई चाल? राबड़ी आवास विवाद ने बिहार की राजनीति में मचाई हलचल
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, June 3, 2026
Last Updated On: Wednesday, June 3, 2026
पटना के 10 सर्कुलर रोड बंगले को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है. सरकार ने यह आवास मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया है, जबकि राबड़ी देवी इसे खाली करने से इनकार कर रही हैं. विवाद अब नियम-कानून से आगे बढ़कर महिला सम्मान, दलित प्रतिनिधित्व और राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन गया है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, June 3, 2026
Bihar Politics New: Bihar की राजनीति में इन दिनों कोई चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि एक सरकारी बंगला सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है. पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित वह सरकारी आवास, जो वर्षों तक लालू-राबड़ी परिवार की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा, अब नए विवाद का कारण बन गया है. सरकार की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया है, लेकिन उन्होंने फिलहाल वहां से हटने से इनकार कर दिया है. इसी के साथ यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया से निकलकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है.
आखिर क्यों शुरू हुआ बंगला विवाद?
दरअसल, बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास कैबिनेट मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया है. सरकार का कहना है कि राबड़ी देवी को पहले ही नया सरकारी आवास उपलब्ध कराया जा चुका है, इसलिए अब पुराने बंगले को खाली करना नियमों के अनुसार जरूरी है. विभाग की ओर से कई बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी बंगला खाली नहीं किया गया, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी.
राज्य सरकार का दावा है कि राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित नया आवास काफी पहले आवंटित कर दिया गया था और उसे पूरी तरह तैयार भी कर दिया गया है. इसके बावजूद पुराने आवास में उनका रहना नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है.
महिला सम्मान बनाम दलित अधिकार की बहस
यह विवाद उस समय और बड़ा हो गया जब मंत्री नंदकिशोर राम ने इसे दलित सम्मान से जोड़ दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि केवल इसलिए बंगला खाली नहीं किया जा रहा क्योंकि वह दलित समाज से आते हैं. उनका कहना है कि सरकार ने उन्हें वैधानिक रूप से आवास आवंटित किया है, लेकिन फिर भी उन्हें उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
नंदकिशोर राम के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस का केंद्र बदल गया. अब सवाल केवल बंगले का नहीं रहा, बल्कि महिला नेतृत्व और दलित प्रतिनिधित्व के बीच राजनीतिक संदेश खोजे जाने लगे. विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष नियमों के पालन की बात कर रहा है.
राबड़ी परिवार ने दिखाई सख्त नाराजगी
राबड़ी देवी ने साफ शब्दों में कहा है कि वे फिलहाल बंगला खाली नहीं करेंगी. उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि सरकार को खाली कराना है तो प्रशासनिक बल का इस्तेमाल कर सकती है. इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है.
राबड़ी देवी की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार को चुनौतीपूर्ण अंदाज में जवाब दिया. वहीं लालू परिवार के समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक आवास का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है.
तेज प्रताप यादव ने भी खोला मोर्चा
इस विवाद में पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव भी खुलकर सामने आ गए हैं. उन्होंने कहा कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री के सरकारी आवास की बात हो रही है, तो सबसे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास की स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए. उनके बयान ने विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया.
तेज प्रताप का कहना है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए. यदि सरकार निष्पक्ष है तो उसे सभी मामलों में एक जैसी कार्रवाई करनी चाहिए.
जमीन के कागजों वाले आरोपों से बढ़ी सियासी गर्मी
इस विवाद के बीच जनता दल यूनाइटेड के नेता नीरज कुमार ने भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि बंगला खाली नहीं किया जा रहा? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कहीं इस आवास में जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज तो नहीं रखे गए हैं. हालांकि इन आरोपों का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक बहस को जरूर नई दिशा मिल गई है.
पप्पू यादव ने किया राबड़ी देवी का समर्थन
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने इस मामले में राबड़ी देवी का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने सरकार से अपील की कि जिस मंत्री को यह बंगला दिया गया है, उन्हें कोई दूसरा आवास उपलब्ध करा दिया जाए. उनके अनुसार राबड़ी देवी बिहार की वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती हैं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए.
प्रशासन की बढ़ी सक्रियता
सरकारी आदेश के बाद प्रशासनिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. वरिष्ठ अधिकारी पुलिस बल के साथ राबड़ी आवास पहुंचे और उन्हें कानूनी स्थिति समझाने का प्रयास किया. अधिकारियों और राबड़ी देवी के बीच लंबी बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका. बताया जा रहा है कि राबड़ी देवी ने अभी बंगला खाली करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है.
निष्कर्ष
10 सर्कुलर रोड का यह बंगला अब सिर्फ एक सरकारी आवास नहीं रह गया है, बल्कि बिहार की राजनीति का नया रणक्षेत्र बन चुका है. एक तरफ सरकार नियमों और आवंटन प्रक्रिया की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव और सम्मान से जोड़ रहा है. महिला सम्मान, दलित प्रतिनिधित्व और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है. फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इस राजनीतिक शह-मात के खेल का अगला कदम क्या होगा.
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