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Z+ सुरक्षा पर सियासत गरम: लालू-राबड़ी के बाद तेजस्वी ने भी लौटाई सरकारी सुरक्षा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, June 6, 2026
Last Updated On: Saturday, June 6, 2026
Z+ Security: बिहार में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है. विरोध जताते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा लौटा दी. आरजेडी ने इसे राजनीतिक दुर्भावना बताया, जबकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव तय मानकों के अनुसार किया गया है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, June 6, 2026
Z+ Security: बिहार की राजनीति में इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा हटाए जाने के बाद अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा वापस करने का फैसला लिया है. इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) इसे केवल सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और राजनीतिक संदेश से जुड़ा मुद्दा बता रही है. पार्टी का कहना है कि सरकार विपक्षी नेताओं के साथ भेदभाव कर रही है और उनकी सुरक्षा में कटौती करके उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है.
लालू-राबड़ी की सुरक्षा में बदलाव से बढ़ा विवाद
हाल ही में हुई सुरक्षा समीक्षा के बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को दी गई Z+ सुरक्षा समाप्त कर दी गई. इसके बाद उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी बिहार पुलिस के जवानों को सौंप दी गई. हालांकि सरकार का कहना है कि यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और तय मानकों के आधार पर लिया गया है, लेकिन आरजेडी इस तर्क से सहमत नहीं है. पार्टी नेताओं का मानना है कि लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे नेताओं की सुरक्षा में अचानक बदलाव कई सवाल खड़े करता है. यही कारण है कि इस फैसले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमला बोल रहा है.
तेजस्वी यादव का विरोध जताने का तरीका
लालू और राबड़ी देवी द्वारा सुरक्षा लौटाने के बाद तेजस्वी यादव ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा वापस कर दी. खास बात यह है कि सुरक्षा समीक्षा समिति ने तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कोई कटौती नहीं की थी. उन्हें पहले की तरह Y+ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध रहने वाली थी. समिति का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के बराबर होता है और उनकी सार्वजनिक गतिविधियां भी काफी अधिक हैं. इसके बावजूद तेजस्वी यादव ने अपने माता-पिता की सुरक्षा में कटौती के विरोध में यह कदम उठाया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सरकार के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है.
आरजेडी का आरोप और सरकार का पक्ष
आरजेडी नेताओं का आरोप है कि सरकार विपक्ष के प्रभावशाली नेताओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ समान व्यवहार होना चाहिए. दूसरी ओर राज्य सरकार का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किसी राजनीतिक भावना से नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की पेशेवर समीक्षा के आधार पर किया गया है. सरकार का कहना है कि खतरे के स्तर और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए ही ऐसे निर्णय लिए जाते हैं.
आगे क्या होगा?
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है. एक तरफ आरजेडी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया कह रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है, खासकर तब जब बिहार में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं. फिलहाल इतना तय है कि सुरक्षा का यह विवाद केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सम्मान, राजनीति और सत्ता-विपक्ष के टकराव का बड़ा विषय बन चुका है.














