पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा पर क्यों छिड़ा घमासान? तारीख को लेकर इस्कॉन और मंदिर प्रशासन आमने-सामने

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, July 15, 2026

Last Updated On: Wednesday, July 15, 2026

Jagannath Rath Yatra Timing. पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा की तारीख को लेकर इस्कॉन और मंदिर प्रशासन के बीच विवाद
Jagannath Rath Yatra Timing. पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा की तारीख को लेकर इस्कॉन और मंदिर प्रशासन के बीच विवाद

Jagannath Rath Yatra Timing: पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा की तय तारीख को लेकर पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और इस्कॉन के बीच विवाद गहरा गया है. मंदिर प्रशासन ने किसी भी दिन रथ यात्रा आयोजित करने के दावे को शास्त्रों के विरुद्ध बताया है. वहीं, इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के अलग-अलग तर्कों ने नई धार्मिक बहस छेड़ दी है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Wednesday, July 15, 2026

Jagannath Rath Yatra Timing: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक है. लेकिन इस बार रथ यात्रा अपनी भव्यता नहीं, बल्कि उसकी तय तारीख को लेकर विवादों में है. पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और इस्कॉन (ISKCON) के बीच इस बात को लेकर मतभेद गहरा गया है कि क्या विदेशों में रथ यात्रा किसी भी सुविधाजनक दिन निकाली जा सकती है या फिर इसे शास्त्रों में निर्धारित तिथि के अनुसार ही आयोजित किया जाना चाहिए. यही सवाल अब देश-विदेश के भक्तों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

मंदिर प्रशासन ने क्यों जताई आपत्ति?

पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और उनसे जुड़े सभी प्रमुख उत्सव एक निश्चित धार्मिक पंचांग और शास्त्रीय परंपरा के अनुसार ही मनाए जाते हैं. प्रशासन ने इस्कॉन के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें विदेशों में अलग-अलग तारीखों पर रथ यात्रा आयोजित करने को शास्त्रसम्मत बताया गया था. एसजेटीए का आरोप है कि इस तरह के दावे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम पैदा करते हैं और परंपराओं की गलत व्याख्या प्रस्तुत करते हैं. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि समय और तिथि बदलकर रथ यात्रा मनाना उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है.

पहले भी हो चुकी है इस मुद्दे पर चर्चा

यह विवाद नया नहीं है. मार्च 2025 में भुवनेश्वर में मंदिर प्रशासन और इस्कॉन के विद्वानों के बीच इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई थी. उस बैठक में इस्कॉन ने विदेशों में रहने वाले भक्तों की सुविधा का हवाला देते हुए अलग-अलग तिथियों पर रथ यात्रा आयोजित करने का पक्ष रखा था. वहीं, पुरी मंदिर के विद्वानों ने शास्त्रों और पुराणों के संदर्भ देकर इस तर्क को स्वीकार नहीं किया. इसके अलावा मंदिर प्रशासन ने यह भी कहा कि गजपति महाराजा दिब्यसिंह देव की विदेश यात्रा को उनकी सहमति बताना सही नहीं है, क्योंकि किसी कार्यक्रम में शामिल होना परंपराओं में बदलाव की मंजूरी नहीं माना जा सकता.

अब सबकी नजर आगे क्या होगा, इस पर

फिलहाल इस्कॉन की ओर से इस पूरे विवाद पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा है कि वे मंदिर प्रशासन का आधिकारिक बयान देखने के बाद ही कोई टिप्पणी करेंगे. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बदलते समय और वैश्विक परिस्थितियों के बीच धार्मिक परंपराओं को किस सीमा तक बदला जा सकता है. एक पक्ष सुविधा को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि दूसरा शास्त्रों और परंपराओं को सर्वोपरि मान रहा है. ऐसे में यह विवाद केवल दो संस्थाओं का मतभेद नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा के बीच संतुलन तलाशने की एक बड़ी बहस बन चुका है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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