Lifestyle News
सावन में आस्था के साथ दौड़ती अर्थव्यवस्था, 4 साल में 1 करोड़ बढ़े कांवड़िए, 10 अरब का कारोबार
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, July 16, 2026
Last Updated On: Thursday, July 16, 2026
सावन में निकलने वाली कांवड़ यात्रा अब केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत भी बन चुकी है. पिछले चार वर्षों में कांवड़ियों की संख्या में करीब एक करोड़ की बढ़ोतरी हुई है, जिससे होटल, ढाबे, दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों को लगभग 10 अरब रुपये का व्यापार मिलता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, July 16, 2026
Sawan Kanwar Economy: सावन का महीना शुरू होते ही उत्तर भारत की सड़कें भगवा रंग में रंग जाती हैं. लाखों-करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, वाराणसी और प्रयागराज जैसे तीर्थों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर निकल पड़ते हैं. यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं रह गई है, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बड़ा आयोजन बन चुकी है. पिछले कुछ वर्षों में कांवड़ियों की संख्या लगातार बढ़ी है, जिसका सीधा असर स्थानीय व्यापार, रोजगार और छोटे कारोबारियों की आय पर देखने को मिला है. एक अध्ययन के अनुसार, कांवड़ यात्रा के दौरान प्रदेश में लगभग 10 अरब रुपये का आर्थिक कारोबार होता है.
चार साल में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
सरकारी अनुमान बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में उत्तर प्रदेश से कांवड़ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब एक करोड़ की बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2022 और 2023 में लगभग दो करोड़ श्रद्धालु यात्रा पर निकले, जबकि 2024 और 2025 में यह आंकड़ा साढ़े तीन करोड़ के आसपास पहुंच गया. देशभर के स्तर पर भी करोड़ों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं. लगातार बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि कांवड़ यात्रा का दायरा हर साल व्यापक होता जा रहा है. इसी वजह से प्रशासन और व्यापारिक वर्ग दोनों इस आयोजन को पहले से अधिक महत्व देने लगे हैं.
छोटे कारोबारियों के लिए कमाई का बड़ा अवसर
कांवड़ यात्रा का सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिलता है जिनका कारोबार सीधे यात्रियों से जुड़ा होता है. होटल, धर्मशालाएं, ढाबे, फल-सब्जी विक्रेता, पूजा सामग्री बेचने वाले, दूध और डेयरी व्यवसायी, टेंट हाउस, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल स्टोर, मोबाइल रिपेयर और चार्जिंग सेंटर जैसे कई क्षेत्रों में कारोबार कई गुना बढ़ जाता है. सामान्य दिनों में जहां एक ढाबा करीब दो लाख रुपये का कारोबार करता है, वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान उसकी कमाई पांच से छह लाख रुपये तक पहुंच सकती है. इसके अलावा अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत बढ़ने से दिहाड़ी मजदूरों को भी बेहतर रोजगार और अधिक मजदूरी का अवसर मिलता है.
इन जिलों की अर्थव्यवस्था को मिलता है सबसे बड़ा सहारा
उत्तर प्रदेश के कई जिले कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्ग पर होने के कारण इस आर्थिक गतिविधि का सबसे अधिक लाभ उठाते हैं. गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा जैसे जिलों में यात्रा के दौरान व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज होती है. वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ जैसे शहरों में भी बाजारों में रौनक बढ़ जाती है. जिन-जिन रास्तों से कांवड़िए गुजरते हैं, वहां स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों और सेवा प्रदाताओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है.
सरकार की तैयारी और बढ़ता आर्थिक महत्व
कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार हर वर्ष व्यापक तैयारियां करती है. सड़क मरम्मत, बैरिकेडिंग, पुलिस तैनाती, सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, पेयजल, बिजली, सफाई और विश्राम स्थलों जैसी सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं. प्रशासन का लक्ष्य यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रखना होता है. अब कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं मानी जाती, बल्कि यह मौसमी अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुकी है. इससे लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलती है.
यह भी पढ़ें :- Sawan 2026: 23 साल बाद सावन सोमवार पर नाग पंचमी का महासंयोग, भद्रा रहित रक्षाबंधन बनेगा खास, जानिए तिथि, शुभ योगों का महत्व
















