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Sawan Somvar 2026: 6 साल बाद सावन सोमवार और सोम प्रदोष का महासंयोग, शिवलिंग पर चढ़ाएं ये शुभ चीजें, बरसेगी भोलेनाथ की कृपा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, August 8, 2026
Last Updated On: Saturday, August 8, 2026
Sawan Somvar 2026: 10 अगस्त 2026 को सावन सोमवार और सोम प्रदोष व्रत का खास संयोग बन रहा है. करीब छह साल बाद आए इस अवसर पर शिवभक्त जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित कर सकते हैं. शाम के प्रदोष काल में मंत्र जाप, दीपक और आरती करना भी शुभ माना जाता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, August 8, 2026
Sawan Somvar 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान सोमवार को शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस बार 10 अगस्त 2026 को सावन के दूसरे सोमवार के साथ सोम प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है. यानी एक ही दिन सोमवार और प्रदोष दोनों का संयोग बनने जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोनों ही अवसर भगवान शिव को समर्पित हैं. करीब छह साल बाद बन रहे इस संयोग के कारण इस दिन की पूजा को लेकर भक्तों में खास उत्साह है.
पूजा में इन चीजों को करें शामिल
इस विशेष दिन शिवलिंग की पूजा करते समय श्रद्धालु अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार कुछ सामान्य पूजन सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं का शिव आराधना में विशेष महत्व बताया गया है.
- स्वच्छ जल: शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा की शुरुआत की जा सकती है.
- दूध: धार्मिक परंपरा में दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने की मान्यता है.
- बेलपत्र: भगवान शिव को बेलपत्र प्रिय माना जाता है, इसलिए इसे पूजा में जरूर शामिल किया जाता है.
- धतूरा: शिव पूजा में धतूरे को अर्पित करने की पुरानी परंपरा रही है.
- आक के फूल: सावन में शिवलिंग पर आक के फूल चढ़ाने की भी मान्यता है.
- चंदन और भस्म: पूजा के दौरान चंदन और भस्म का इस्तेमाल शिव आराधना की पारंपरिक विधि का हिस्सा माना जाता है.
जलाभिषेक के बाद करें मंत्र जाप
10 अगस्त को सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाकर या घर में शिवलिंग की पूजा की जा सकती है. सबसे पहले जल अर्पित करने के बाद दूध, बेलपत्र और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं. इस दौरान भगवान शिव का ध्यान करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में सामग्री से ज्यादा श्रद्धा और मन की एकाग्रता को महत्व दिया जाता है.
शाम की पूजा भी रहेगी महत्वपूर्ण
सोम प्रदोष में प्रदोष काल यानी शाम के समय शिव आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. इसलिए सुबह पूजा करने के अलावा शाम को भी भगवान शिव के सामने दीपक जलाकर आरती और मंत्र जाप किया जा सकता है. भक्त इस दौरान अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और भगवान शिव का ध्यान कर सकते हैं.
क्यों कहते हैं इसे सोम प्रदोष?
जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. सामान्य तौर पर सोमवार और प्रदोष दोनों ही शिव उपासना से जुड़े हैं. ऐसे में दोनों का एक ही दिन होना धार्मिक दृष्टि से विशेष संयोग माना जाता है.
पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा करते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. मंदिर में पूजा कर रहे हैं तो वहां के नियमों का पालन करें. साथ ही किसी भी पूजन सामग्री का इस्तेमाल स्थानीय परंपरा के अनुसार ही करें. यह सभी उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें आस्था के रूप में देखा जाना चाहिए.
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