स्किन कैंसर की वापसी रोकने में मिली बड़ी कामयाबी, पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन थेरेपी बनी उम्मीद की किरण
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, August 20, 2026
Updated On: Thursday, August 20, 2026
स्किन कैंसर के आक्रामक रूप मेलेनोमा की वापसी रोकने में पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन थेरेपी ने उम्मीद जगाई है. मर्क और मॉडेर्ना की इस थेरेपी ने फेज-3 ट्रायल में बेहतर परिणाम दिखाए. यह मरीज के ट्यूमर के जेनेटिक बदलावों के आधार पर तैयार होकर इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स पहचानने और खत्म करने में मदद करती है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Thursday, August 20, 2026
Personalized mRNA Vaccine: सर्जरी के बाद भी कैंसर के दोबारा लौट आने की आशंका मरीजों को हमेशा सताती रहती है, और स्किन कैंसर यानी मेलेनोमा के मामलों में यह खतरा खासतौर पर ज्यादा देखा जाता है. अब मर्क और मॉडेर्ना की एक नई mRNA वैक्सीन थेरेपी ने मेलेनोमा की वापसी रोकने में सफलता हासिल की है, जिसे स्किन कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यह थेरेपी मॉडेर्ना की पर्सनलाइज्ड वैक्सीन इंटिस्मेरन और मर्क की दवा कीट्रूडा के मेल से तैयार की गई है.
फेज-3 ट्रायल का मतलब क्या है
किसी भी दवा के इंसानों पर होने वाले परीक्षण का यह अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसके बाद दवा को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया शुरू होती है. इस थेरेपी ने अपने फेज-3 ट्रायल में उम्मीद जगाने वाले नतीजे दिए हैं.
यह वैक्सीन थेरेपी खास क्यों है
यह किसी सामान्य वैक्सीन जैसी नहीं है, बल्कि हर मरीज के ट्यूमर के अनुसार तैयार की गई mRNA-आधारित पर्सनलाइज्ड थेरेपी है. ट्रायल के दौरान मरीज के ट्यूमर की जांच कर उसमें मौजूद जेनेटिक बदलावों यानी म्यूटेशन की पहचान की जाती है, और उसी के अनुरूप अलग थेरेपी तैयार की जाती है. इसका मकसद इम्यून सिस्टम को इस तरह सक्रिय करना है कि वह कैंसर सेल्स को पहचान कर खत्म करने लगे. यह थेरेपी खासतौर पर उन हाई-रिस्क मरीजों के लिए फायदेमंद बताई जा रही है, जिनकी सर्जरी हो चुकी है और जिनमें कैंसर के दोबारा लौटने की आशंका बनी रहती है.
थेरेपी काम कैसे करती है
सीधे शब्दों में कहें तो यह थेरेपी इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स पहचानने की ट्रेनिंग देती है, ताकि कैंसर सेल्स को खत्म करने वाली टी-सेल्स की प्रतिक्रिया मजबूत हो सके और बचा हुआ कैंसर दोबारा फैलने से रुक सके. फेज-3 INTerpath-001 ट्रायल में स्टेज IIB से IV तक के मेलेनोमा मरीजों में कैंसर की वापसी और उसके फैलने का जोखिम कम पाया गया. चूंकि हर मरीज के ट्यूमर में म्यूटेशन का पैटर्न अलग हो सकता है, इसलिए वैज्ञानिक करीब 34 म्यूटेशन तक को एक ही mRNA वैक्सीन में कोड कर देते हैं, जो खासतौर पर उसी मरीज के लिए तैयार होती है- यही वजह है कि इसे पर्सनलाइज्ड वैक्सीन थेरेपी कहा जा रहा है.
कैसे हुआ ट्रायल
इस ट्रायल में हाई-रिस्क वाले और सर्जरी के जरिए ट्यूमर हटवा चुके 1137 मरीज शामिल किए गए, जो स्टेज IIB से IV तक के मेलेनोमा से जूझ रहे थे. मरीजों को दो समूहों में बांटा गया- एक समूह को नई वैक्सीन थेरेपी दी गई, जबकि दूसरे को सिर्फ कीट्रूडा दवा दी गई. नतीजों में सामने आया कि हाई-रिस्क मरीजों में अकेले कीट्रूडा उतनी कारगर नहीं थी, जबकि वैक्सीन और कीट्रूडा के कॉम्बिनेशन ने कैंसर की वापसी में लगने वाले समय के लिहाज से बेहतर परिणाम दिए. गौरतलब है कि 2022 में दुनियाभर में मेलेनोमा के 3.30 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए थे, जिनमें से करीब 1.12 लाख मामले अकेले अमेरिका से थे.
विशेषज्ञ की राय
धर्मशीला नारायण हॉस्पिटल में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की निदेशक डॉ. कनिका सूद शर्मा के अनुसार मेलेनोमा एक बेहद आक्रामक स्किन कैंसर है और यह नई थेरेपी कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को करीब 50 फीसदी तक घटा सकती है. उनका कहना है कि इस दवा को पाने वाले हर दस में से कम से कम सात मरीज कैंसर-मुक्त रह सकते हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. हालांकि इसे व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने से पहले संबंधित नियामक प्राधिकरण की मंजूरी की जरूरत होगी.
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