कूनो में गूंजी चीतों की किलकारी, 5 शावकों के जन्म से भारत में पहली बार जुड़ी Botswana Genetic Line

Authored By: Galgotias Times Bureau

Published On: Wednesday, October 7, 2026

Updated On: Thursday, October 8, 2026

Botswana Cheetah

मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से एक सुखद खबर आई है। पार्क में भारतीय धरती पर जन्मी मादा चीता केजपी21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। जिस वक्त सरकार ने ये कदम उठाया था, उस समय इस निर्णय की काफी आलोचना भी हुई थी. कई शावकों की मौत हो जाने से पशुप्रेमियों ने भी निराशा जताई थी. लेकिन अब हालात अच्छे हैं। इस बारे में विस्तार से बताएंगे इस रिपोर्ट में...

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Updated On: Thursday, October 8, 2026

Botswana Cheetah: परिवार बढ़ाने की इस मुहिम के साथ ही भारत में बोत्सवाना वंश (जेनेटिक लाइन)(Botswana Genetic Line) की पहली बार शुरुआत हो गई है, क्योंकि इन सभी शावकों के पिता बोत्सवाना से लाया गया एक नर चीता है। इस नए जेनेटिक वंश के जुड़ने से भारत में चीतों की आनुवंशिक विविधता और मजबूत होगी.

केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि इन पांच नए मेहमानों के आने के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है. इनमें से 41 चीते ऐसे हैं जिनका जन्म भारत की धरती पर ही हुआ है

पूर्व में विलुप्त हो रहे जानवरों के लिए हुए हैं प्रयास ​’प्रोजेक्ट चीता’ की बड़ी सफलता

1952 में भारत में चीतों को विलुप्त घोषित किए जाने के सात दशक बाद, यह उपलब्धि दर्शाती है कि यह ऐतिहासिक पुनर्वास परियोजना अब एक स्थायी प्रजनन चरण (Self-sustaining population) में प्रवेश कर रही है
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दूसरी पीढ़ी (F2 जेनरेशन) का महत्व

केजपी21 खुद भारत में जन्मी है (ज्वाला की बेटी), इसलिए इन पांच शावकों का जन्म भारत में चीतों की ‘दूसरी पीढ़ी’ (F2 Generation) के विस्तार को पुख्ता करता है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद दुर्लभ माना जाता है
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आनुवंशिक विविधता (Gene Pool Diversification)

  • पहले अधिकांश चीते नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए थे बोत्सवाना के नर चीते के पिता बनने से ‘इनब्रीडिंग डिप्रेशन'(Botswana Cheetah Cubs) (अंतःप्रजनन से होने वाले आनुवंशिक विकार) का जोखिम काफी कम होगा और शावकों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी.
  • ​फील्ड स्टाफ और वेटनरी टीम का योगदान: कूनो के वन्यजीव पशुचिकित्सकों, फील्ड ट्रैकर्स और ‘चीता मित्रों’ (स्थानीय ग्रामीणों) की चौबीसों घंटे निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन का इस सफलता में अहम योगदान रहा है.
  • ​गांधी सागर अभयारण्य का विकल्प: कूनो में चीतों का घनत्व और संख्या तेजी से बढ़ने के कारण मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में तैयार किया जा रहा है, ताकि चीतों को पर्याप्त प्राकृतिक क्षेत्र और शिकार मिल सके.

Written By: Rajiv Mandal

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