छोटे शहरों और गांवों के युवाओं में बढ़ा क्रेडिट कार्ड का चलन, कम उम्र में कर्ज लेने की बढ़ती आदत
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Friday, October 23, 2026
Updated On: Friday, October 23, 2026
देश में क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में गज़ब का बदलाव देखने को मिला है. इसका चलन अब महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है. छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी तेजी से इस सुविधा को अपना रहे हैं. डिजिटल भुगतान के विस्तार और आसानी से उपलब्ध क्रेडिट ने युवाओं की खरीदारी की आदतों को बदला है. हालांकि, इसके साथ ही कम उम्र में कर्ज लेने और खर्च बढ़ने की प्रवृत्ति भी सामने आ रही है.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Updated On: Friday, October 23, 2026
Youth credit card debt: क्रेडिट ब्यूरो ट्रांसयूनियन सिबिल के आंकड़े इस बदलाव की ओर इशारा करते हैं. मार्च 2026 तक भारत में क्रेडिट कार्ड धारकों की संख्या लगभग 5.2 करोड़ पहुंच गई, जबकि मार्च 2016 में यह आंकड़ा करीब 1.4 करोड़ था. इस अवधि में सक्रिय क्रेडिट कार्ड की संख्या भी 2.1 करोड़ से बढ़कर 10.7 करोड़ हो गई. इससे साफ है कि बीते एक दशक में क्रेडिट कार्ड बाजार का दायरा काफी विस्तृत हुआ है.
दस साल में कई गुना बढ़ा बकाया कर्ज
क्रेडिट कार्ड के विस्तार के साथ इस पर बकाया राशि में भी बड़ा उछाल आया है. मार्च 2016 में क्रेडिट कार्ड पर बकाया रकम करीब 40 हजार करोड़ रुपये थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर लगभग 3.1 लाख करोड़ रुपये हो गई. यह बढ़ोतरी बताती है कि क्रेडिट कार्ड अब केवल भुगतान का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों की उधार लेने की आदत का भी अहम हिस्सा बन चुका है.
इस बदलाव में युवा उपभोक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले लोगों में आधे की उम्र 30 वर्ष या उससे कम थी. इनमें छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों की भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी रही. इससे संकेत मिलता है कि औपचारिक ऋण सुविधाओं तक युवाओं की पहुंच पहले की तुलना में बढ़ी है.
पहली बार कार्ड लेने के बाद बढ़ रहा खर्च
क्रेडिट कार्ड की सुविधा युवाओं को तत्काल खरीदारी का विकल्प देती है, लेकिन इसका प्रभाव उनके खर्च करने के तौर-तरीकों पर भी पड़ सकता है. उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार कार्ड लेने के बाद शुरुआती तीन महीनों में कुछ युवाओं के बकाये में तेजी से वृद्धि देखी गई. इनमें करीब 28 प्रतिशत ऐसे थे, जिनका बकाया 25 हजार रुपये से अधिक हो गया था. तुलना के लिए, 2018 में पहली बार कार्ड लेने वाले मिलेनियल्स के बीच यह अनुपात लगभग 20 प्रतिशत बताया गया था. यह अंतर संकेत देता है कि नई पीढ़ी के कुछ उपभोक्ता क्रेडिट कार्ड मिलने के बाद अपेक्षाकृत तेजी से खर्च कर रहे हैं. हालांकि, इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी युवा इसी तरह खर्च करते हैं.
एक कार्ड से आगे बढ़कर कई तरह के कर्ज
युवाओं के बीच कर्ज लेने का तरीका भी बदल रहा है. क्रेडिट कार्ड के साथ-साथ वे पर्सनल लोन और दूसरे क्रेडिट उत्पादों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले जेन जी युवाओं में लगभग 69 प्रतिशत ने अगले 12 महीनों के भीतर कोई अन्य क्रेडिट उत्पाद भी लिया. एक अन्य अहम संकेत यह है कि कई युवा क्रेडिट कार्ड लेने से पहले ही ऋण सुविधाओं का इस्तेमाल कर चुके होते हैं. वर्ष 2024 में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले 24 से 30 वर्ष की उम्र के लोगों में लगभग 31 प्रतिशत के पास पहले से कम से कम दो क्रेडिट खाते थे. इसके विपरीत, करीब 30 प्रतिशत युवाओं ने इससे पहले किसी तरह का क्रेडिट नहीं लिया था. यह स्थिति बताती है कि युवाओं की वित्तीय गतिविधियों में कर्ज की भूमिका बढ़ रही है. ऐसे में केवल क्रेडिट उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है; उसे समझदारी से इस्तेमाल करने की जानकारी भी जरूरी है.
सुविधा के साथ वित्तीय अनुशासन भी जरूरी
भारत में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल अभी भी कई विकसित और अन्य उभरते बाजारों की तुलना में सीमित है. इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और विस्तार की संभावना बनी हुई है, लेकिन बाजार का विस्तार तभी लाभकारी होगा, जब उपभोक्ता अपनी आय और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखकर खर्च करें.
क्रेडिट कार्ड का समय पर भुगतान न करने पर ब्याज और अन्य शुल्क आर्थिक बोझ बढ़ा सकते हैं. इसलिए युवाओं के लिए जरूरी है कि वे कार्ड की सीमा को अपनी वास्तविक आय न समझें, गैर-जरूरी खरीदारी से बचें और हर महीने बकाया चुकाने की योजना बनाएं. बदलती आर्थिक आदतों के इस दौर में चुनौती सिर्फ क्रेडिट कार्ड तक पहुंच बढ़ाने की नहीं, बल्कि जिम्मेदार तरीके से उसका इस्तेमाल सुनिश्चित करने की भी है.
Wriiten By: Rajiv Mandal
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