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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का ‘जन-महाभियोग’, खरगे ने पेश किया प्रस्ताव, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Saturday, October 31, 2026
Last Updated On: Saturday, October 31, 2026
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन ने दिल्ली में 'जन-महाभियोग' कार्यक्रम आयोजित किया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रस्ताव पेश किया, जबकि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यवाही की अध्यक्षता की. राहुल गांधी ने समापन भाषण दिया. विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में अनियमितताएं हुई हैं. हालांकि, यह कार्यक्रम सांकेतिक है और संवैधानिक महाभियोग की वास्तविक प्रक्रिया से अलग है.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Saturday, October 31, 2026
देश की चुनावी व्यवस्था और मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में है. शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को INDIA गठबंधन के कई विपक्षी दलों ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन-महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया. यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुआ. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इसकी अध्यक्षता की और खरगे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया. विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर सवाल उठाए. हालांकि, इस पूरी कार्रवाई को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि जन-महाभियोग क्या है और क्या इससे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है?
खरगे ने पेश किया प्रस्ताव, मीरा कुमार ने संभाली अध्यक्षता
दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में INDIA गठबंधन के कई दलों के नेता शामिल हुए. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने समापन भाषण दिया.
कार्यक्रम के दौरान खरगे ने कहा कि उनका ज्ञानेश कुमार से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है. विपक्ष की मांग निष्पक्ष चुनाव और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़ी है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है. हालांकि, ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं, इन्हें साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता.
आखिर विपक्ष ज्ञानेश कुमार से क्यों नाराज है?
इस विवाद की मुख्य वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) है. चुनाव आयोग इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों की जांच और संशोधन करता है. इसका उद्देश्य योग्य मतदाताओं के नाम शामिल करना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाना है.
विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान कई जगहों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही. कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसे वोट चोरी से जोड़कर देख रहे हैं. इसी आधार पर वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना है. इसलिए इस विवाद में विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग की आधिकारिक सफाई को अलग-अलग समझना जरूरी है.
बारिश के कारण टला था कार्यक्रम
विपक्ष ने इस कार्यक्रम को पहले 30 अक्टूबर को आयोजित करने की योजना बनाई थी. इसके लिए दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर आयोजन की अनुमति लेने की कोशिश भी की गई थी. लेकिन कार्यक्रम के लिए उपयुक्त जगह नहीं मिलने और बारिश के कारण योजना में बदलाव करना पड़ा. इसके बाद 31 अक्टूबर को खरगे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें अलग-अलग विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी. यह आयोजन एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली विपक्ष की रैली से पहले किया गया.
क्या जन-महाभियोग से हट जाएंगे ज्ञानेश कुमार?
यह इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल है. दरअसल, विपक्ष का जन-महाभियोग एक सांकेतिक राजनीतिक कार्यक्रम है. इसका मतलब यह नहीं है कि संसद में संवैधानिक महाभियोग की प्रक्रिया पूरी हो गई है या ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दिया गया है.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरीके से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है. इसके लिए साबित कदाचार या अक्षमता का आधार होना जरूरी है. संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना भी आवश्यक है. गौरतलब है कि मार्च 2026 में भी विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस दिया था. लोकसभा अध्यक्ष ने उस नोटिस को स्वीकार नहीं किया था. इसलिए मौजूदा जन-महाभियोग कार्यक्रम का सीधा कानूनी प्रभाव नहीं है.
एक नवंबर को रामलीला मैदान में होगी रैली
जन-महाभियोग कार्यक्रम के बाद अब विपक्ष की नजर दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली पर है. एक नवंबर को प्रस्तावित इस रैली में SIR, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठाए जाएंगे.
कुल मिलाकर, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का यह कार्यक्रम चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष के विरोध को सामने लाता है. लेकिन राजनीतिक विरोध और संवैधानिक पद से हटाने की प्रक्रिया दोनों अलग-अलग हैं. अब देखना होगा कि इस विरोध का आगे क्या राजनीतिक और संस्थागत असर पड़ता है.













