आपको पता है नोआखली की घटना, जहां मारे गए थे 300 पाकिस्तानी सैनिक

Authored By: सतीश झा

Published On: Thursday, August 29, 2024

noakhali war
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पड़ोसी देश बांग्लादेश में उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। इसके बीच ही भारतीय सेना ने नोआखली की घटना को शेयर किया है। भारतीय सेना के अदम्य पराक्रम से 300 पाकिस्तानी सैनिक को मौत के घाट उतार दिया गया था।

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Thursday, August 29, 2024

भारतीय सेना (Indian Army) ने हाल ही में अपने गौरवशाली इतिहास की एक और कड़ी को साझा करते हुए 1971 के युद्ध की यादें ताजा की हैं। भारतीय सेना ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि नोआखली के युद्ध में भारतीय सेना ने 300 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था। इस महत्वपूर्ण घटना ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई थी। नोआखली का यह युद्ध 1971 के युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के स्वतंत्रता संग्राम के समर्थन में लड़ा गया था। भारतीय सेना ने रणनीतिक दृष्टिकोण से नोआखली में पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) के मजबूत ठिकानों को निशाना बनाया और भारी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों को हताहत किया।

भारतीय सेना के पूर्वी कमान ने साझा की है अखबार की कतरन

भारतीय सेना के पूर्वी कमान ने गुरुवार को एक अखबार की कतरन एक्स पर शेयर की है। यह 26 अगस्त 1971 से शुरू हुए नोआखली युद्ध (Noakhali War) की रिपोर्टिंग से संबंधित है। इस रिपोर्ट के मुताबिक नोआखली में सोनामुरी रेलवे स्टेशन और एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। उसी दिन सिलहट के कुलाचार डाकघर पर भी गुरिल्ला योद्धाओं द्वारा हमला किया गया, जिसमें सभी दस्तावेजों को जलाया गया और इमारत को नुकसान पहुंचाया गया। इसमें बताया गया है कि करीब एक पखवाड़े के दौरान मुक्ति वाहिनी के गुरिल्लों ने नोआखली जिले में अलग-अलग झड़पों में लगभग 300 पाकिस्तानी सैनिकों, रज़ाकरों और उनके सहयोगियों को मार गिराया। इन घटनाओं के चलते पाकिस्तानी सैनिकों में डर का माहौल बन गया था।

पूर्वी कमान ने जो कतरन शेयर की है, उसमें इस बात का जिक्र है कि एक तरफ मुक्ति वाहिनी लड़ रही थी और दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन की विभिन्न इकाइयों ने तत्कालीन राष्ट्रपति याह्या खान को 100 से अधिक टेलीग्राम भेजकर शेख मुजीबुर रहमान (Sheikh Mujibur Rahman) की रिहाई की मांग की। कोलकाता में आयोजित एक बैठक में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रोमा चौधरी (Dr. Roma Choudhary, VC of Rabindra Bharati University) की अध्यक्षता में मुजीब की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक शक्तियों से अपील की गई।

मुजीब का मुकदमा पाकिस्तान के लिए “अपमानजनक”

ब्रिटिश लेबर सांसद पीटर शोर, जो नई दिल्ली से कोलकाता पहुंचे थे, ने तब कहा था कि मुजीब का मुकदमा पाकिस्तान के लिए “अपमानजनक“ है। कलकत्ता विश्वविद्यालय लॉ कॉलेज स्टूडेंट्स एसोसिएशन (हजरत यूनिट) ने बांग्लादेश के समर्थन में 1,001 रुपये का दान दिया था।

उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना के पूर्वी कमान ने लगातार सोशल मीडिया के जरिए सेना के बेहतरीन कार्यों को शेयर करने का सिलसिला शुरू किया है। इसे बड़े पैमाने पर लोगों का समर्थन भी मिल रहा है।

(हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के इनपुट के साथ)

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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