LPG की खपत में 12% की बड़ी गिरावट, पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी; जानिए क्या है वजह
Authored By: Mazhar Pathan
Published On: Monday, November 2, 2026
Updated On: Monday, November 2, 2026
अक्टूबर 2026 में भारत में LPG का इस्तेमाल सालाना आधार पर 12.11 प्रतिशत घटकर 2.64 मिलियन टन रह गई. दूसरी ओर पेट्रोल की मांग 3.11 प्रतिशत और डीजल का उपयोग 11.69 प्रतिशत बढ़ी. मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, LPG की सप्लाई में रुकावट और PNG को बढ़ावा देने जैसे कारण इस बदलाव से जुड़े हैं.
Authored By: Mazhar Pathan
Updated On: Monday, November 2, 2026
देश में ईंधन के उपयोग को लेकर अक्टूबर 2026 के आंकड़ों में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है. एक तरफ रसोई में इस्तेमाल होने वाली LPG यानी रसोई गैस की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ गई है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में LPG की उपयोग पिछले साल के मुकाबले 12.11 प्रतिशत कम रही. इस दौरान पेट्रोल और डीजल के उपयोग में बढ़ावा हुआ है. ऐसे में सवाल है कि आखिर रसोई गैस की मांग क्यों घट रही है और वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन का उपयोग क्यों बढ़ रहा है?
अक्टूबर में पेट्रोल का उपयोग कितना बढ़ा?
सबसे पहले पेट्रोल की बात करें तो अक्टूबर 2026 में इसकी खपत में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 3.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. यह बढ़कर 3.77 मिलियन टन पहुंच गई. पेट्रोल की मांग में यह इजाफा बताता है कि देश में निजी वाहनों और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में ईंधन का इस्तेमाल बना हुआ है.
त्योहारी सीजन के दौरान लोगों की आवाजाही, बाजारों में गतिविधियों और सड़क परिवहन की जरूरतों का भी पेट्रोल की खपत पर असर पड़ सकता है. हालांकि, केवल एक महीने के आंकड़ों के आधार पर मांग बढ़ने की एक ही वजह तय नहीं की जा सकती.
डीजल की मांग में भी आया उछाल
अक्टूबर में डीजल की खपत में पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई. PPAC के आंकड़ों के अनुसार, डीजल की मांग सालाना आधार पर 11.69 प्रतिशत बढ़कर 8.51 मिलियन टन हो गई.
डीजल का इस्तेमाल ट्रकों, बसों, कृषि कार्यों, माल ढुलाई और कई औद्योगिक गतिविधियों में होता है. इसलिए इसकी मांग में बदलाव का संबंध परिवहन और आर्थिक गतिविधियों से भी हो सकता है. पेट्रोल और डीजल दोनों की खपत बढ़ना यह दिखाता है कि अक्टूबर में इन ईंधनों की मांग मजबूत रही.
LPG की खपत में 12.11 प्रतिशत की गिरावट
अब बात रसोई गैस की करें तो अक्टूबर में LPG की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में इसकी खपत सालाना आधार पर 12.11 प्रतिशत घटकर 2.64 मिलियन टन रह गई.
भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव या समुद्री रास्तों से सप्लाई प्रभावित होने का असर देश में उपलब्धता पर पड़ सकता है. पश्चिम एशिया में जारी संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े आपूर्ति जोखिमों ने भी LPG की उपलब्धता को प्रभावित किया है.
मिडिल ईस्ट तनाव का LPG सप्लाई पर असर
भारत के लिए LPG आयात का महत्व काफी ज्यादा है. पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण इस क्षेत्र से आने वाली सप्लाई और समुद्री परिवहन को लेकर असमंजस बना हुआ है. इसका असर घरेलू बाजार में LPG की उपलब्धता पर पड़ सकता है.
जब सप्लाई प्रभावित होती है तो वितरण और उपलब्धता पर दबाव बढ़ता है. ऐसे माहौल में उपभोक्ताओं के इस्तेमाल का पैटर्न भी बदल सकता है. हालांकि, LPG की खपत में आई पूरी गिरावट को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय तनाव या कीमतों से जोड़ना सही नहीं होगा. इसके पीछे घरेलू स्तर पर ईंधन के दूसरे विकल्प अपनाने जैसे कारण भी हो सकते हैं.
LPG की जगह सरकार का PNG को बढ़ावा देना
LPG पर आयात की निर्भरता कम करने के लिए सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है. जिन इलाकों में पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को LPG सिलेंडर के बजाय PNG कनेक्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
PNG सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचती है. इससे सिलेंडर बुक कराने और उसकी डिलीवरी का इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि, यह विकल्प उन्हीं इलाकों में उपलब्ध है जहां पाइपलाइन का नेटवर्क मौजूद है.
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं?
अक्टूबर के आंकड़ों से साफ है कि देश में हर तरह के ईंधन की मांग एक जैसी नहीं है. LPG की खपत में कमी आई है, जबकि पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी है. इससे पता चलता है कि अलग-अलग ईंधनों के इस्तेमाल का तरीका बदल रहा है. आने वाले समय में LPG की खपत कितनी रहेगी, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से गैस की सप्लाई कैसी रहती है और देश में इसकी उपलब्धता कितनी है. इसके अलावा कीमतों में बदलाव और घरों तक PNG कनेक्शन पहुंचने का असर भी LPG की मांग पर पड़ सकता है.
दूसरी ओर, पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी या कमी काफी हद तक यातायात, वाहनों की आवाजाही और बाजार में कारोबार की गतिविधियों पर निर्भर करेगी. यानी आने वाले महीनों में ईंधन की मांग का रुख काफी हद तक इन परिस्थितियों से तय होगा.
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