राम नवमी 2025: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पौराणिक महत्व, इतिहास, परंपराएँ, इससे जुड़े तथ्य और रोचक बातें!

राम नवमी 2025: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पौराणिक महत्व, इतिहास, परंपराएँ, इससे जुड़े तथ्य और रोचक बातें!

Authored By: प्रताप सिंह नेगी

Published On: Saturday, March 29, 2025

Updated On: Saturday, March 29, 2025

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राम नवमी 2025 (Ram navami 2025) सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के जन्म का पावन उत्सव है, जो धर्म, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. इस शुभ दिन पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, भजन-कीर्तन होते हैं और राम भक्त उनकी लीलाओं का गुणगान करते हैं. आइए जानते हैं राम नवमी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, इतिहास, पौराणिक महत्व और इससे जुड़ी रोचक बातें!

Authored By: प्रताप सिंह नेगी

Updated On: Saturday, March 29, 2025

राम नवमी 2025 किस तारीख को है, और इस दिन का पंचांग क्या कहता है?

राम नवमी 2025 (Ram navami 2025) में रविवार, 6 अप्रैल को मनाई जाएगी. नवमी तिथि 5 अप्रैल को शाम 7:26 बजे शुरू होकर 6 अप्रैल की शाम 7:22 बजे समाप्त होगी. राम नवमी में पूजा करने का समय 6 अप्रैल को सुबह 11:08 बजे से दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा. मध्याह्न काल में भगवान राम का जन्म माना जाता है, इसलिए इस समय पूजा करना विशेष रूप से शुभ होता है.

विवरण जानकारी
पर्व का नाम राम नवमी 2025
तिथि 6 अप्रैल 2025
दिन रविवार
नवमी तिथि प्रारंभ 5 अप्रैल, शाम 7:26 बजे
नवमी तिथि समाप्त 6 अप्रैल, शाम 7:22 बजे
पूजा का शुभ समय 6 अप्रैल, सुबह 11:08 बजे से दोपहर 1:39 बजे तक

राम नवमी का अर्थ और इसका धार्मिक महत्व क्या है? (Ram Navami Meaning & Significance)

राम नवमी हिंदू धर्म का एक अहम् त्योहार है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में हर साल मनाया जाता है. यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत नवरात्रि का अंतिम दिन भी माना जाता है.

राम नवमी हिन्दू धर्म के लोगों के लिए निम्न रूप से धार्मिक महत्वता रखता है:

  • राम नवमी को भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है.
  • यह दिन भक्तों के लिए अयोध्या और अन्य राम मंदिरों में विशेष पूजा, भजन, कीर्तन और राम कथा के आयोजन का अवसर होता है.
  • इस दिन व्रत रखने और रामचरितमानस या रामायण का पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
  • राम नवमी का पर्व सत्य, धर्म और मर्यादा की स्थापना का प्रतीक है, क्योंकि श्रीराम को “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है.
  • कई स्थानों पर शोभायात्राएँ और झाँकियाँ निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान राम के जीवन से जुड़े प्रसंग दिखाए जाते हैं.

राम नवमी का इतिहास क्या है? (History of Ram Navami)

राम नवमी हिंदू धर्म में एक पवित्र पर्व है, जिसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव (Birth Anniversary) के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ को संतान प्राप्ति की इच्छा थी, जिसके लिए उन्होंने महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया. इस यज्ञ के फलस्वरूप माता कौशल्या के गर्भ से भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया. ऐसी मान्यता है कि यह शुभ घटना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुई थी, जिसे राम नवमी के रूप में हर साल मनाया जाता है.

राम नवमी पर कौन-कौन से शुभ कार्य करने चाहिए?

राम नवमी पर शुभ कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना, रामचरितमानस या रामायण का पाठ करना, व्रत और भजन-कीर्तन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. भक्तों को दान-पुण्य, जरूरतमंदों को भोजन कराना और अयोध्या या अन्य राम मंदिरों में दर्शन करना शुभ माना जाता है. घर में साफ-सफाई कर पूजा स्थल को सजाना, पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करना और भगवान राम के भजन गाना भी इस दिन विशेष महत्व रखता है.

राम नवमी की शुभकामनाएं और संदेश कैसे भेजें?

राम नवमी की शुभकामनाएं और संदेश भेजने के लिए भक्तिमय और सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें. आप अपने संदेशों में भगवान राम के आदर्शों, मर्यादा और धर्म की सीख को शामिल कर सकते हैं. राम नवमी की शुभकामनाएं और संदेश पड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक (Link) पर क्लिक करें!

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क्या राम नवमी पर उपवास (व्रत) रखना जरूरी होता है?

राम नवमी पर उपवास (व्रत) रखना आवश्यक नहीं होता, लेकिन मान्यता है की उपवास (व्रत) रखने से पुण्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत भक्तों की श्रद्धा और आस्था का प्रतिक है. कई लोग पूरे दिन निराहार या फलाहार उपवास रखते हैं, जबकि कुछ केवल सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं. उपवास रखना या ना रखना यह भक्तों की श्रद्धा पर निर्भर करता है, आप चाहें तो आप व्रत रख सकते है वरना भगवान राम की पूजा, रामचरितमानस या रामायण का पाठ कर भी राम नवमी को मनाया जा सकते हैं.

राम नवमी के दिन रामचरितमानस का पाठ क्यों किया जाता है?

राम नवमी के दिन रामचरितमानस का पाठ करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना जाता है क्योंकि यह ग्रंथ भगवान श्रीराम के दिव्य जीवन, उनके आदर्शों और मर्यादा की महिमा का विस्तार से वर्णन करता है.तुलसीदास द्वारा रचित यह महाकाव्य भक्ति, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.

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क्या राम नवमी केवल उत्तर भारत में मनाई जाती है, या दक्षिण भारत में भी इसका महत्व है?

राम नवमी सिर्फ उत्तर भारत में ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में भी बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. अयोध्या और वाराणसी की तरह कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी इस दिन राम मंदिरों में विशेष पूजा, रामायण पाठ और भजन-कीर्तनों का आयोजन होता है. रामेश्वरम और भद्राचलम जैसे मंदिरों में भव्य उत्सव मनाए जाते हैं. यह त्योहार पूरे भारत में भगवान राम के प्रति भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है.

राम नवमी से जुड़ी कुछ प्रसिद्ध परंपराएं और रीति-रिवाज क्या हैं?

राम नवमी पर भगवान श्रीराम की मूर्ति को स्नान कराकर पूजा की जाती है और सुंदर वस्त्र पहनाए जाते हैं. भक्त उपवास रखते हैं और रामायण या रामचरितमानस का पाठ करते हैं. अयोध्या और कई जगहों पर शोभायात्राएँ निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झाँकियाँ होती हैं. लोग भजन-कीर्तन करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. दक्षिण भारत में रामलीला नाटक खेले जाते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा होती है.

FAQ

राम नवमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान राम के जन्म का उत्सव है. यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है, जो इस बार 6 अप्रैल 2025 को मनायी जायेगी.

भगवान राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं. वे अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र थे. भगवान राम को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में धर्म और नैतिकता के आदर्शों का पालन किया.

राम नवमी पर लोग उपवास रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं, विशेष पूजा और हवन करते हैं. कई स्थानों पर भगवान राम की झांकी और शोभायात्रा निकाली जाती है. भजन-कीर्तन और रामायण पाठ का आयोजन भी किया जाता है. कई लोग इस दिन चना, पूरी और हलवा का भोग भी लगाते हैं.

राम नवमी पर कई लोग व्रत रखते हैं और फलाहार करते हैं. परंपरागत भोजन में चना, पूरी, खीर, हलवा और सत्तू शामिल होते हैं. कुछ स्थानों पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) का सेवन भी किया जाता है. व्रत का भोजन सात्विक होता है और प्याज-लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है.

प्रताप सिंह नेगी दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी साहित्य के छात्र हैं, वह कंटेंट क्रिएशन, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, वीडियो क्रिएशन और पत्रकारिता में गहरी रुचि रखते है। सोशल मीडिया कैंपेन्स, ब्लॉगिंग और मीडिया हाउस के अनुभव के साथ, उन्होंने लीडरशिप, टीमवर्क और क्रिएटिव कम्युनिकेशन के कौशल को निखारा है।
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