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प्रदोष व्रत: भय पर विजय का प्रतीक, जानें क्या है इसका महत्व
Authored By: स्मिता
Published On: Thursday, August 1, 2024
Last Updated On: Thursday, August 1, 2024
सावन माह के सोमवारी व्रत ही नहीं, इस महीने का प्रदोष व्रत भी भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के लिए विशेष है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भक्त को सुख -समृद्धि मिलती है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। प्रदोष व्रत रखने से भक्त अपने भय पर विजय प्राप्त करते हैं।
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Thursday, August 1, 2024
सावन माह भगवान शिव और उनके भक्तों के लिए भी विशेष है। लगातार बारिश होने और चारों तरफ हरियाली रहने के कारण मन का तनावमुक्त और प्रसन्न रहना स्वाभाविक है। इसलिए भगवान की पूजा-आराधना में भी भक्तों का मन अधिक रमता है। सावन में हर सोमवारी व्रत पर भगवान शंकर के जयकारे तो लगाते ही हैं, प्रदोष पर्व पर भी शिव साधक भगवान शंकर की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हिंदू धर्म-संस्कृति में सावन माह में रखे जाने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस अवसर पर भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए व्रत और उपवास भी रखा जाता है। माना जाता है कि प्रदोष व्रत रखने से सुख, समृद्धि और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
कब होता है प्रदोष व्रत
हिंदू धर्म में यह व्रत प्रत्येक चंद्र पखवाड़े के 13वें दिन रखा जाता है। इससे हर महीने दो प्रदोष व्रत होते हैं। पहला कृष्ण पक्ष में होता है, जो चंद्रमा का अमावस्या चरण होता है। दूसरा शुक्ल पक्ष में होता है, जो पूर्णिमा चरण होता है। प्राचीन शास्त्रों में प्रदोष व्रत को भय के उन्मूलन के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। यह भक्तों के लिए पवित्र और शुभ दिन है।
सावन प्रदोष व्रत 2024 तिथि और समय
सावन का पहला प्रदोष व्रत जिसे गुरु कृष्ण प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह आज 1 अगस्त को मनाया जा रहा है।
प्रदोष व्रत कथा
धर्म-अध्यात्म के ज्ञाता पंडित सुरेश मिश्र बताते हैं, ‘ इस व्रत से अनेक कथायें जुड़ी हुई हैं। एक कथा है कि देवताओं और असुरों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था। देवता हार रहे थे। इसलिए वे मदद मांगने ब्रह्मा-विष्णु-महेश के पास गए। देवताओं को सलाह दी गई कि वे समुद्र को मथकर अमृत प्राप्त करें, जिससे वे अमर हो जाएंगे। वे समुद्र मंथन करने के लिए पर्याप्त संख्या में नहीं थे। उन्होंने असुरों से मदद मांगी और बदले में उन्हें अमृत का हिस्सा देने का वादा किया।
जैसा कि हम सभी जानते हैं, जब देव और दानवों ने समुद्र मंथन शुरू किया, तो सबसे पहले हलाहल (ज़हर) निकला। यह ज़हर इतना घातक था कि देवताओं और असुरों सहित पृथ्वी पर मौजूद हर प्राणी को मार सकता था। भगवान शिव मदद के लिए सामने आए और ज़हर को पी लिया। तब देवी पार्वती ने अपनी पूरी शक्ति से भगवान का गला पकड़ लिया ताकि वह उनके पेट में न जाए और उसे उनके गले में ही रहने दिया। सर्वोच्च देवता की शक्ति से धन्य होकर, देवों और असुरों ने उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता दिखाने के लिए उनकी स्तुति गान शुरू कर दिया। उनसे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपने सर्वोच्च बैल नंदिकेश्वर के सिर पर उसके दो सींगों के बीच नृत्य किया। उस दिन से भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत मनाया जाने लगा।’
सावन प्रदोष व्रत 2024 महत्व
पंडित सुरेश मिश्र बताते हैं, ‘ हर प्रदोष व्रत का अपना महत्व होता है। यह आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। सावन में दो प्रदोष व्रतों के दौरान भगवान शिव की पूजा करने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भक्तों को हर प्रकार के दुखों से मुक्ति मिल सकती है। यह पवित्र व्रत आपको अपने भीतर से जोड़ता है। खुशी और आध्यात्मिक विकास को यह बढ़ावा देता है। यह आत्मा को तृप्ति की भावना प्रदान करता है। इस दिन भक्त अपनी पूर्व में की गई गलतियों के लिए क्षमा मांग सकते हैं। इस व्रत का पालन करने से भविष्य की चुनौतियों का अधिक आसानी और लचीलेपन से सामना करने में मदद मिलती है।
कब की जाती है पूजा
प्रदोष व्रत करने के लिए सुबह उठकर पवित्र स्नान करने के बाद शिव-पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है, लेकिन विशेष पूजा गौधूलि काल के दौरान की जाती है। भक्त प्रदोष व्रत कथा का पाठ करते हैं और महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुद्ध मन से 108 बार करते हैं। भगवान को भोग प्रसाद और सात्विक भोजन अर्पित किया जाता है। आरती संपन्न होने के बाद भोग प्रसाद परिवार के सदस्यों में वितरित किया जाता है। प्रदोष के दिन सात्विक भोजन किया जाता है।














