श्रावण मास के चौथे सोमवार पर है खास ब्रह्म और शुक्ल योग, काशी विश्वनाथ सहित सभी शिवालयों में देवाधि देव महादेव पर जलाभिषेक

Authored By: स्मिता

Published On: Monday, August 12, 2024

Last Updated On: Monday, August 12, 2024

last monday of sawan month
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सावन माह का चौथा सोमवार विशेष है। इस दिन ख़ास ब्रह्म और शुक्ल योग का संयोग बना है। इसलिए चारों ओर शिव स्वयंभू के जयकारे लग रहे हैं। बाबा के केशरिया वस्त्र धारी भक्त कांवड़ियों का उत्साह दखते ही बन रहा है। असंख्य भक्तगण काशी विश्वनाथ सहित सभी शिवालयों में देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक कर रहे हैं।

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Last Updated On: Monday, August 12, 2024

अध्यात्म ज्ञाता और पौराणिक आख्यानकार देवदत्त पटनायक कहते हैं कि हिंदुओं के अनगिनत देवी-देवताओं में से शिव सबसे लोकप्रिय हैं। महादेव के नाम से जाने जानेवाले शिव (Shiv), विष्णु(Vishnu)और ब्रह्मा (Brahma) के साथ हिंदू देवताओं के त्रिमूर्ति माने जाते हैं। शिव भोलेनाथ एक ओर ब्रह्मचारी योगी हैं, तो दूसरी ओर पत्नी और पुत्रों के साथ गृहस्थ आश्रम का आनंद भोगते हुए गृहस्थी भी हैं। कैलाश पर्वत पर रहने वाले शिव को सावन माह विशेष प्रिय है। भक्तगण हर सोमवार को व्रत-उपवास रखते हैं और महादेव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। सावन माह के चौथे सोमवार को विशेष योग बनता है। मान्यता है कि इस दिन शिव-भक्तों पर भोलेनाथ की विशेष कृपा बरसती है।

शुक्ल योग में पूजन से जातक को मिलते हैं विशेष लाभ

हर कोई श्रावण मास के चौथे सोमवार को बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक एवं पूजा अर्चना करना चाहता है। भक्त गण सुबह से ही जय शिव शंकर, बम-बम भोलेनाथ के जयघोष के साथ काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath), बाबा बैद्यनाथ (Baba Baidyanath) ज्योतिर्लिंग सहित सभी शिवालयों में पहुंच रहे हैं। असल में चौथे सोमवार को ब्रह्म और शुक्ल योग का ख़ास योग बन रहा है। शुक्ल योग शाम 4. 26 बजे तक रहेगा। इसके बाद ब्रह्म योग की शुरुआत होगी, जो अगले दिन मंगलवार शाम तक रहेगा। यह दोनों योग किसी भी काम के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं। इसके साथ ही चित्रा और स्वाती नक्षत्र का संयोग है। ज्योतिषविदों के अनुसार शुक्ल योग में भगवान के पूजन से जातक को विशेष लाभ मिलते हैं। इससे जातक को धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं, ब्रह्म योग में शिव की आराधना से जातक को ज्ञान की प्राप्ति होती है।

द्वादश ज्योतिर्लिंग की विशेष पूजा अर्चना

श्रावण मास में पड़ने वाले सोमवार का हिंदुओं में अपना महत्व है। लोग शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस दिन पूजा करते हैं, भगवान शिव उन्हें सुख, समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। सभी मनोवांछित इच्छा पूरी करते हैं। श्रावण सोमवार के अवसर पर द्वादश ज्योतिर्लिंग की विशेष पूजा-अर्चना होती है। बाबा का रूद्राक्ष श्रृंगार, भोग आरती, मंगला आरती, जलाभिषेक, दर्शन-पूजन भी होता है। भगवान शिव की पूजा के लिए बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, आक के फूल, सफेद फूल, कमल, मौसमी फल का प्रयोग किया जाता है। शहद, शक्कर, गंगाजल, गाय का दूध, धूप, दीप, गंध, नैवेद्य आदि भी शिव पूजा के लिए जरूरी होते हैं।

(हिंदुस्तान समाचार के इनपुट्स के साथ)

About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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