एंटी इनकम्बेंसी से बचने की जुगत में AAP, क्या हो पाएगी इस बार सफल ?

Authored By: सतीश झा

Published On: Monday, December 30, 2024

AAP ki anti-incumbency se bachne ki koshish, kya iss baar mil paayegi safalta?
AAP ki anti-incumbency se bachne ki koshish, kya iss baar mil paayegi safalta?

दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने शुरुआती वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का प्रभाव हर चुनाव में चुनौती बनता गया। सत्ता में रहते हुए हर बार जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना और नए मुद्दों पर काम करना किसी भी पार्टी के लिए मुश्किल साबित होता है।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अपने सभी 70 उम्मीदवारों की सूची काफी पहले जारी कर दी है। इस बार पार्टी ने पिछले चुनाव के मुकाबले डेढ़ दर्जन से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवार बदले हैं। इनमें से पांच सीटें ऐसी हैं, जहां पार्टी हर चुनाव में अपने उम्मीदवार बदलती रही है। ये सीटें हैं – मटिया महल, सीलमपुर, तिमारपुर, रोहिणी और मुंडका। इनमें से चार सीटों पर उम्मीदवार बदलने का प्रयोग सफल रहा है, लेकिन एक सीट पर यह रणनीति कामयाब नहीं हो पाई।

क्यों एंटी-इनकंबेंसी AAP के लिए चुनौती है ?

AAP 2015 से दिल्ली में सत्ता में है। इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण जनता के बीच पार्टी के प्रति असंतोष और नाराजगी बढ़ सकती है। पानी, बिजली, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसी प्राथमिक सेवाओं में सुधार के बावजूद, जनता को पूरी संतुष्टि नहीं मिली है। कई क्षेत्रों में समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस एंटी-इनकंबेंसी का मुद्दा उठाकर AAP की सरकार को घेरने की कोशिश करती रही हैं।

AAP की एंटी-इनकंबेंसी से बचने की रणनीति

आम आदमी पार्टी हर बार चुनाव में नई रणनीति अपनाकर एंटी-इनकंबेंसी से बचने की कोशिश करती है। इस बार 70 में से कई सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे गए हैं। जिन सीटों पर हर बार उम्मीदवार बदले गए हैं, जैसे मटिया महल, सीलमपुर, तिमारपुर, मुंडका और रोहिणी, वहां भी इस बार नया चेहरा लाया गया है। AAP सरकार द्वारा मुफ्त बिजली-पानी, शिक्षा में सुधार, मोहल्ला क्लीनिक और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया जा रहा है। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने जनता के लिए काम किया है।

धार्मिक और जातिगत समीकरण साधना

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जैसे मटिया महल और सीलमपुर, पार्टी ने प्रभावशाली परिवारों को टिकट देकर अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की है। जाट बहुल सीटों पर नए चेहरे उतारकर जातिगत समीकरणों को साधने की योजना बनाई गई है। अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं ने चुनाव प्रचार में अपने पिछले कार्यकाल के उपलब्धियों को गिनाना शुरू कर दिया है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के सुधार को प्राथमिकता दी जा रही है।

 मुंडका: हर चुनाव में बदला उम्मीदवार

जाट बहुल मुंडका सीट पर आप ने हर चुनाव में नया उम्मीदवार उतारा है।

  • 2013: कृष्ण कुमार को टिकट दिया गया।
  • 2015: सुखबीर सिंह दलाल को उतारा गया, और उन्होंने जीत दर्ज की।
  • 2020: धर्मपाल लाकड़ा को टिकट दिया गया, जिन्होंने जीत हासिल की।
  • 2025: इस बार धर्मपाल लाकड़ा की जगह जसबीर कालरा को उम्मीदवार बनाया गया है।

मुंडका सीट 2008 में बनी थी और तब से यहां जाट वोटरों का दबदबा है।

 तिमारपुर: ‘हॉट सीट’ पर भी हर बार बदलाव

तिमारपुर सीट पर आम आदमी पार्टी हर चुनाव में नया उम्मीदवार उतारती रही है।

  • 2013: हरीश खन्ना ने यहां जीत दर्ज की।
  • 2015: पंकज पुष्कर को टिकट मिला, और वे भी विजयी हुए।
  • 2020: दिलीप पांडेय को उम्मीदवार बनाया गया, जिन्होंने बड़ी जीत हासिल की।
  • 2025: इस बार सुरिंदर पाल सिंह बिट्टू को मैदान में उतारा गया है।

 रोहिणी: हर बार बदला उम्मीदवार, लेकिन जीत नहीं मिली

रोहिणी सीट पर आप की रणनीति अब तक सफल नहीं रही है।

  • 2013: राजेश गर्ग को टिकट दिया गया।
  • 2015: सीएल गुप्ता को उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन वे हार गए।
  • 2020: राजेश बंसीवाला को उतारा गया, पर बीजेपी के बीजेंद्र गुप्ता ने उन्हें हराया।
  • 2025: प्रदीप मित्तल को टिकट दिया गया है।

 मटिया महल: मुस्लिम बहुल सीट पर उम्मीदवारों में बदलाव

मटिया महल सीट पर आप ने बार-बार बदलाव किए हैं।

  • 2013: शकील अंजुम उम्मीदवार बने, लेकिन हार गए।
  • 2015: असीम अहमद खान ने जीत दर्ज की और केजरीवाल कैबिनेट में शामिल हुए।
  • 2020: शोएब इकबाल को टिकट मिला, और उन्होंने बड़ी जीत हासिल की।
  • 2025: इस बार शोएब की जगह उनके बेटे आले मोहम्मद को उम्मीदवार बनाया गया है।

सीलमपुर: हर बार नया उम्मीदवार

सीलमपुर सीट पर भी आप की रणनीति बदलाव पर केंद्रित रही है।

  • 2013: मसूद अली खान को टिकट दिया गया, लेकिन वे चौथे स्थान पर रहे।
  • 2015: इशराक ने जीत दर्ज की।
  • 2020: अब्दुल रहमान को उम्मीदवार बनाया गया, और उन्होंने भी जीत हासिल की।
  • 2025: जुबैर अहमद को टिकट दिया गया है, जो चौधरी मतीन अहमद के बेटे हैं।

आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार बदलने का यह प्रयोग कुछ सीटों पर बेहद सफल रहा है, जबकि कुछ पर इसे चुनौती का सामना करना पड़ा है। इन पांच सीटों पर पार्टी की रणनीति और परिणामों पर सबकी नजर है।

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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