महाराष्ट्र न्यूज़ (Maharashtra News)
Maharashtra News
Last Updated: February 3, 2026
Sunetra Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. डिप्टी मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को पुणे और बीड जिले का पालक मंत्री नियुक्त किया गया है. महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनीं सुनेत्रा पवार को आबकारी, खेल, अल्पसंख्यक और वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है. अजित पवार के निधन के बाद उन्हें यह अहम भूमिका सौंपी गई है.
Maharashtra News
Last Updated: January 21, 2026
BMC Mayor Election: बीएमसी मेयर पद को लेकर महाराष्ट्र में सियासी खींचतान तेज हो गई है. बीजेपी और एकनाथ शिंदे शिवसेना दोनों ही इस अहम कुर्सी पर दावा कर रहे हैं. बीजेपी सबसे ज्यादा सीटों के साथ मेयर पद चाहती है, जबकि शिवसेना मुंबई की पारंपरिक जमीन होने का तर्क देती है. बहुमत महायुति के पास है, लेकिन मेयर कुर्सी किसके हाथ आएगी, यह अब सियासी रणनीति पर निर्भर करेगा.
Maharashtra New
Last Updated: January 17, 2026
BMC Results: मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है. पहली बार BJP ने BMC पर कब्जा किया, महायुति गठबंधन ने बहुमत हासिल किया. शिंदे गुट भाजपा का मजबूत सहयोगी बनकर उभरा, जबकि ठाकरे भाइयों को झटका लगा. AIMIM ने अल्पसंख्यक इलाकों में जबरदस्त बढ़त दर्ज की. कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन सीटें कम मिलीं. ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ के असर से BJP की जीत मजबूत साबित हुई.
Maharashtra News
Last Updated: January 17, 2026
BMC Election: मुंबई सिर्फ एक महानगर नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक धड़कन है और इस धड़कन को संभालने की जिम्मेदारी बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के हाथों में होती है. बीएमसी चुनाव सिर्फ पार्षद चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह तय करते हैं कि मुंबई की सड़कें कैसी होंगी, बाढ़ से निपटने की तैयारी कितनी मजबूत होगी और शहर का विकास किस दिशा में आगे बढ़ेगा.
Maharashtra News
Last Updated: January 15, 2026
महाराष्ट्र में 15 जनवरी 2026 को बीएमसी और 29 नगर निगमों के लिए मतदान का महापर्व चल रहा है. इस चुनाव में मुंबई के 227 वार्डों में 1,700 उम्मीदवार मैदान में हैं और 1.03 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं. मतदान में कई चुनौतियां सामने आईं, जैसे उंगली पर लगी स्याही का आसानी से मिटना, लेकिन नेताओं और बॉलीवुड सितारों ने जनता को वोट डालने के लिए प्रेरित किया.
Maharashtra News
Last Updated: August 7, 2025
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और उनके चचेरे भाई तथा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने उन लोगों को टका सा जवाब दिया है, जो ठाकरे बंधुओं को बिन मांगे सलाह दे रहे थे. कई मुद्दे सहित उपराष्ट्रपति चुनाव (Vice President of India Election) को लेकर दोनों भाइयों के रूख को लेकर भी कई तरह की सियासी बातें कानाफूसी हो रही थीं. अब इस पर विराम लग गया है। साथ ही दूसरे दलों के नेताओं को भी एक तरह से सख्त हिदायत मिली है कि कुछ भी न बोल दिया जाए.
Maharashtra News
Last Updated: July 11, 2025
बेशक हर भारतीय अपनी स्थानीय भाषा के प्रति अपने प्यार को दिखाता और जताता होगा, लेकिन अन्य भाषा के प्रति नफरत यह किसी भी व्यक्ति के मानसिक दिवालिया होने का प्रतीक है.
Maharashtra
Last Updated: July 5, 2025
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की दो दशकों बाद हुई ऐतिहासिक एकजुटता ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल मचा दी है. "विजय रैली" में उद्धव ठाकरे ने मराठी भाषा, संस्कृति और राज्य के हितों की रक्षा के लिए राज ठाकरे के साथ मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया. उन्होंने हिंदी थोपे जाने का विरोध करते हुए भाजपा पर तीखे हमले किए और आरोप लगाया कि भाजपा अपने सहयोगियों का सिर्फ इस्तेमाल करती है. यह साझा मंच मराठी अस्मिता के पक्ष में एक बड़ा संदेश है, जो आगामी चुनावों में राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है.
Maharashtra New
Last Updated: July 5, 2025
राजनीति का कोई स्थायी चरित्र नहीं होता है. दो दशक पहले बाल ठाकरे (Bal Thackeray) के परिवार में फूट हुआ. कई बार कोशिशें हुईं, लेकिन उद्धव (Udhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) को एक साथ कोई नहीं कर पाया. समय का पहिया घूमा और अचानक भाजपा नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस (Devendra Fadanvis) का विरोध करते-करते उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर आ गए. इसे महाराष्ट्र की राजनीति का एक नया अध्याय माना जा रहा है.
Maharashtra News
Last Updated: June 30, 2025
महाराष्ट्र में पहली से पांचवीं कक्षा तक के स्कूलों में हिंदी को लागू करने को लेकर उठे विरोध के बीच राज्य सरकार ने तीन भाषा नीति पर जारी किए गए दो सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया है. सरकार के इस फैसले को विपक्ष के दबाव के बाद लिया गया कदम माना जा रहा है, जहां सरकार पर हिंदी "थोपने" का आरोप लगाया गया था.





