UCC की नई लहर: उत्तराखंड-गुजरात के बाद अब असम में समान नागरिक संहिता की दस्तक
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, May 26, 2026
Updated On: Tuesday, May 26, 2026
Assam UCC Bill: उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम में भी UCC को लेकर हलचल तेज हो गई है. शादी, तलाक, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में नए नियम लागू किए जा रहे हैं. हालांकि हर राज्य का मॉडल अलग है. असम ने आदिवासी समुदायों और धार्मिक परंपराओं को लेकर अलग रुख अपनाया है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Tuesday, May 26, 2026
Assam UCC Bill: देश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर कई सालों से बहस चल रही थी, लेकिन अब यह सिर्फ राजनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रही. उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम ने भी UCC बिल पेश कर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में देश के कई राज्यों में पारिवारिक कानूनों का ढांचा बदल सकता है. शादी, तलाक, संपत्ति, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में एक समान नियम लागू करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है. खास बात यह है कि हर राज्य ने अपने सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे के हिसाब से UCC का अलग मॉडल तैयार किया है.
चार राज्यों में क्या है सबसे बड़ा बदलाव?
गोवा, उत्तराखंड, गुजरात और अब असम ऐसे राज्य बन चुके हैं जहां UCC किसी न किसी रूप में लागू है या लागू होने की प्रक्रिया में है. इन राज्यों में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब अलग-अलग धर्मों के लिए अलग पारिवारिक कानूनों की जगह एक समान कानून की व्यवस्था बनाई जा रही है. यानी शादी, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म के आधार पर अलग नियम नहीं होंगे. इसके अलावा बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार देने पर भी सभी राज्यों ने जोर दिया है. वहीं बहुविवाह पर भी लगभग सभी जगह रोक लगाने की बात कही गई है, जिससे महिलाओं के अधिकार मजबूत होंगे.
लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त नजर
UCC के नए मॉडल में सबसे ज्यादा चर्चा लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर हो रही है. गोवा को छोड़ दें तो उत्तराखंड, गुजरात और असम तीनों राज्यों ने लिव-इन रिलेशनशिप को रजिस्ट्रेशन के दायरे में लाने की तैयारी की है. यानी अब बिना सरकारी जानकारी के साथ रहने वाले जोड़ों को कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकार सुरक्षित होंगे और रिश्तों में पारदर्शिता आएगी. हालांकि कुछ लोग इसे निजी जिंदगी में दखल भी मान रहे हैं. यही वजह है कि UCC को लेकर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिल रहे हैं.
असम मॉडल क्यों माना जा रहा अलग?
असम का UCC मॉडल कई मायनों में बाकी राज्यों से अलग नजर आता है. असम सरकार ने साफ कहा है कि धार्मिक रीति-रिवाजों और पूजा-पद्धति में दखल नहीं दिया जाएगा. साथ ही राज्य के पहाड़ी और मैदानी आदिवासी समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है. यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि असम की जनजातीय और सांस्कृतिक पहचान काफी अलग है. वहीं उत्तराखंड और गुजरात में सिर्फ अनुसूचित जनजातियों को कुछ छूट दी गई है. असम सरकार का कहना है कि उसका मकसद सामाजिक समानता लाना है, न कि धार्मिक परंपराओं को खत्म करना.
आने वाले समय में और राज्यों में बढ़ेगी हलचल
UCC को लेकर अब देश की राजनीति और तेज होने वाली है. मध्य प्रदेश में मसौदा तैयार करने के लिए समिति बनाई जा चुकी है, जबकि राजस्थान, हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है. राजनीतिक दल इसे सामाजिक सुधार का बड़ा कदम बता रहे हैं, वहीं विरोध करने वाले इसे संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं. फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में UCC भारत की राजनीति और समाज दोनों में बड़ा मुद्दा बना रहेगा. अब देखना होगा कि बाकी राज्य किस मॉडल को अपनाते हैं और जनता इसे किस नजर से देखती है.
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