राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला: SIT जांच, 8 गिरफ्तारियां और करोड़ों के कथित घोटाले की पूरी कहानी

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, July 1, 2026

Last Updated On: Wednesday, July 1, 2026

Ayodhya Ram Mandir Chadhawa Chori. राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की SIT जांच और 8 गिरफ्तारियां.
Ayodhya Ram Mandir Chadhawa Chori. राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की SIT जांच और 8 गिरफ्तारियां.

Ayodhya Ram Mandir Chadhawa Chori: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. SIT जांच, आठ आरोपियों की गिरफ्तारी, नकदी बरामदगी और राजनीतिक बयानबाजी के बीच श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में जांच लगातार जारी है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Wednesday, July 1, 2026

Ayodhya Ram Mandir Chadhawa Chori: अयोध्या का राम मंदिर सिर्फ़ एक इमारत नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सदियों के इंतज़ार का नतीजा है. रोज़ हज़ारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी श्रद्धा के मुताबिक नकदी, सोना-चांदी और दूसरी क़ीमती चीज़ें चढ़ाते हैं. लेकिन जून 2026 में इसी मंदिर से जुड़ी एक ख़बर ने पूरे देश को हिला दिया – दान पेटियों यानी हुंडियों से चढ़ावे की रक़म और कीमती सामान की व्यवस्थित चोरी का मामला सामने आया. जिस जगह को पारदर्शिता की मिसाल माना जाता था, वहीं गबन और हेराफेरी के आरोप लगने लगे, और देखते ही देखते यह मामला अदालत, राजनीति और आम जनता की चर्चा का केंद्र बन गया.

विवाद की चिंगारी कैसे भड़की

इस पूरे प्रकरण को सार्वजनिक बहस का विषय बनाने का काम सबसे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी बड़ी रक़म गायब होने की आशंका जताई और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई. इसके बाद उन्होंने लगातार कई पोस्ट कर ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बुलाकर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर स्पष्टीकरण मांगने और मामले की तह तक जाने की बात कही.

हालांकि, स्थानीय स्तर पर चढ़ावे में गड़बड़ी की शिकायतें इससे पहले भी उठती रही थीं. ट्रस्ट में पूर्व लेखा प्रभारी रह चुके एक अधिकारी ने पहले ही दान की गिनती प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत आंतरिक बैठक में की थी, लेकिन कार्रवाई की बजाय उनकी जगह किसी और को ज़िम्मेदारी सौंप दी गई थी. इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि गड़बड़ी की आशंका नई नहीं, बल्कि काफी पुरानी थी.

SIT का गठन और शुरुआती जांच

बढ़ते विवाद और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) बना दिया. इसकी अगुवाई आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत ने की, जबकि टीम में आईपीएस अधिकारी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरत्न कुमार भी शामिल रहे. टीम को दो बड़े काम सौंपे गए – दान गिनने की प्रक्रिया में खामियां खोजना, और यह पता लगाना कि इसके पीछे कोई सुनियोजित साज़िश तो नहीं है.

SIT ने क़रीब छह दिनों तक मंदिर परिसर, काउंटिंग रूम और आरोपियों के घरों की गहन जांच की. इस दौरान करीब 150 लोगों से पूछताछ हुई और दो करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई. जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कुंभ मेले के दौरान का रहा, जब क़रीब दो महीनों तक हर दिन औसतन दस लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां महज़ दो घंटे में नोटों से भर जाती थीं – यही वह समय था जब कथित तौर पर सबसे ज़्यादा गड़बड़ी हुई.

टीम ने अपनी क़रीब 150 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी, जिसमें कई सख्त सिफ़ारिशें की गई थीं.

पहली FIR और गिरफ़्तारियां

SIT की सिफ़ारिशों के आधार पर 25 जून की देर शाम रामजन्मभूमि थाने में ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर पहली एफ़आईआर (अपराध संख्या 90/2026) दर्ज हुई. मामला भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं में दर्ज किया गया जो कर्मचारी द्वारा चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साज़िश से जुड़ी हैं. रात भर चली पूछताछ के बाद सुबह तक सभी आठ आरोपियों की गिरफ़्तारी की पुष्टि कर दी गई. बाद में इन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

कौन-कौन हैं आरोपी, किसकी क्या भूमिका थी

आरोपी का नाम ज़िम्मेदारी मुख्य आरोप
रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू दानपात्रों की निगरानी व बेसमेंट तक पहुंचाना करोड़ों का गबन, अयोध्या के आसपास कई संपत्तियां खरीदना
लवकुश मिश्रा चढ़ावे व नक़दी की गिनती संपत्ति निर्माण; घर से लगभग 12 लाख रुपये बरामद
अनुकल्प मिश्रा काउंटिंग रूम में नक़दी गिनना रक़म छिपाना और उससे संपत्ति बनाना
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव कैश काउंटिंग स्टाफ़ के प्रभारी (रिटायर्ड बैंक कर्मी) निगरानी में लापरवाही, चोरी में संलिप्तता
करुणेश पांडे दान राशि लाना व गिनना संपत्ति अर्जन
मनीष यादव (टिन्नू का भतीजा) नक़दी की गिनती घर से क़रीब 36 लाख रुपये बरामद
अविनाश शुक्ला दान राशि लाना व गिनना संपत्ति खरीदना; 5 जून को सबसे पहले हिरासत में लिया गया
रामशंकर मिश्रा दानपात्र पहुंचाना व निगरानी अन्य आरोपियों के साथ मिलकर गबन

एफ़आईआर में नामज़द सभी आठ लोग उस टीम का हिस्सा थे जो मंदिर के क़रीब 40 दानपात्रों से चढ़ावा लाकर तीर्थयात्री सुविधा केंद्र स्थित काउंटिंग रूम में गिनती किया करती थी.

इनमें से टिन्नू यादव की भूमिका सबसे ज़्यादा चर्चा में रही, क्योंकि वे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के निजी चालक रह चुके थे और बाद में उनके क़रीबी सहयोगी बन गए थे. स्थानीय भाजपा नेता रजनीश सिंह जैसे लोगों का दावा है कि टिन्नू की गाड़ी बिना जांच के मंदिर परिसर में आती-जाती थी, जबकि आम आगंतुकों की सख़्ती से तलाशी ली जाती थी.

पैसा कितना और कहां-कहां मिला

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, बरामदगी का आंकड़ा भी बढ़ता गया.

  • शुरुआती जांच में क़रीब 2 करोड़ रुपये बरामद होने की बात सामने आई थी.
  • अलग-अलग आरोपियों के ठिकानों से मिलाकर बाद में क़रीब 70 से 80 लाख रुपये नकद अतिरिक्त बरामद हुए, और गिनती लगातार जारी रही.
  • सात अलग-अलग बैंकों में आरोपियों के खातों में संदिग्ध लेन-देन के सुराग मिले.
  • विपक्षी दलों के दावे इससे भी आगे गए – समाजवादी पार्टी ने क़रीब 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया, तो आम आदमी पार्टी ने यह आंकड़ा 200 करोड़ रुपये से ऊपर बताया.

सिर्फ़ नक़दी नहीं, गहने और धातुएं भी निशाने पर

जांच के दायरे में सिर्फ़ कैश ही नहीं, बल्कि मंदिर को मिले क़ीमती उपहार भी आए:

  • 200 किलो चांदी की ईंट – साल 2021 में दान की गई इस चांदी की मौजूदा क़ीमत पांच करोड़ रुपये से ज़्यादा आंकी गई है, लेकिन दानकर्ता संस्था को इसकी कोई रसीद नहीं मिली थी.
  • 60 किलो चांदी की शिलाएं – देशभर के सुनारों से इकट्ठा कर दान की गई इन शिलाओं में से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की चांदी जांच में नहीं मिल पाई.
  • हीरे जड़ित हार और सोने की चरण पादुका – एक श्रद्धालु द्वारा भेंट किए गए इन गहनों के बारे में मंदिर के पुजारी ने बताया कि उन्होंने यह वस्तुएं टिन्नू यादव को लौटा दी थीं, जबकि टिन्नू का कहना था कि गहने गलाकर ईंट बनाई गई और यह ज़िम्मेदारी किसी और की थी. इस उलझन में अभी तक न सोने की ईंट मिली है, न कोई रसीद.
  • इसके अलावा एक सोने की गदा और कुछ बहुमूल्य राम-शिलाएं भी गायब बताई जा रही हैं.

SIT जांच के दायरे में चार बड़े नाम

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सिर्फ़ काउंटिंग स्टाफ़ ही नहीं बल्कि ट्रस्ट से जुड़े बड़े पदाधिकारी भी सवालों के घेरे में आते गए:

  1. चंपत राय – ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव और मंदिर की ऑडिट समिति के प्रमुख. बाद में उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
  2. रामशंकर यादव (टिन्नू) – चंपत राय के पूर्व चालक, जिन्हें मामले का केंद्रीय किरदार माना जा रहा है.
  3. डॉ. अनिल कुमार मिश्रा – ट्रस्ट सदस्य और प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान, जिन पर एक पूर्व इंजीनियर ने कमीशन लेने का आरोप लगाया.
  4. गोपाल राव – ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य, जो चंदे की गिनती और मंदिर प्रबंधन का बड़ा हिस्सा संभालते थे.

बाद में जांच का दायरा और चौड़ा हुआ. सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों ने पूछताछ के लिए 70 से 80 लोगों को नोटिस भेजा, जिनमें अनिल मिश्रा और गोपाल राव भी शामिल हैं. आरोपियों के मोबाइल फोन से डिलीट की गई चैट्स को फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है, ताकि डेटा रिकवर किया जा सके. साथ ही एसबीआई, बैंक ऑफ़ बड़ौदा और केनरा बैंक समेत छह बैंकों को भी खातों और लॉकरों की जानकारी के लिए नोटिस दिया गया है.

क्या ट्रस्ट को पहले से पता था?

इस मामले में सबसे विवादास्पद पहलू यह सामने आया कि ट्रस्ट को गड़बड़ी की भनक औपचारिक शिकायत दर्ज होने से काफी पहले लग चुकी थी. एक सामने आए सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक 5 जून 2026 की रात, यानी सार्वजनिक विवाद खड़ा होने से क़रीब दो दिन पहले ही, चंपत राय के निर्देश पर ट्रस्ट के प्रतिनिधि पुलिस टीम के साथ आरोपी अविनाश शुक्ला के ठिकाने पर पहुंचे थे और उसे हिरासत में लेकर नकदी बरामद की गई थी. बावजूद इसके, तत्काल कोई आधिकारिक एफ़आईआर दर्ज नहीं कराई गई.

इसके अलावा यह भी सामने आया कि 2024 और 2025 में ट्रस्ट और बैंक के बीच हुई बैठकों में गिनती प्रक्रिया को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार हुई थी, जिस पर दोनों पक्षों के अधिकारियों ने दस्तख़त भी किए थे. लेकिन आगे चलकर इस एसओपी का पालन नहीं हुआ, जिसे SIT ने अपनी रिपोर्ट में जानबूझकर की गई लापरवाही बताया है.

पूछताछ में चंपत राय ने चोरी में अपनी किसी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि टिन्नू यादव ने ग़लत काम किया और जैसे ही उन्हें जानकारी मिली, उन्होंने संदिग्धों को पकड़वाकर एफ़आईआर दर्ज कराई. हालांकि सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में वे कई सवालों के जवाब संतोषजनक ढंग से नहीं दे पाए.

राजनीति भी हुई गरम

इस मामले ने जल्द ही राजनीतिक रंग ले लिया. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग करती रहीं, तो कुछ नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश से जांच कराने तक की मांग उठाई. इसके उलट भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि जिन दलों ने मंदिर निर्माण में कभी सहयोग नहीं किया, उन्हें सवाल उठाने का नैतिक हक़ नहीं है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि उठे सवाल गंभीर हैं और जांच पूरी होने पर दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ख़ुद कहा कि निष्पक्ष जांच से “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा और आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी को छोड़ा नहीं जाएगा. वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने चंदे से जुड़े सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया.

तिरुपति मॉडल से तुलना क्यों हो रही है?

इस विवाद के बाद यह मांग ज़ोर पकड़ रही है कि राम मंदिर में दान गिनने की प्रक्रिया तिरुपति बालाजी मंदिर जैसी बनाई जाए, जो दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में गिना जाता है. वहां रोज़ाना ढाई से छह करोड़ रुपये तक का चढ़ावा आता है, फिर भी वहां की व्यवस्था कहीं ज़्यादा सख़्त मानी जाती है:

  • चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी बिना जेब के कपड़े (आमतौर पर धोती) पहनते हैं.
  • गिनती से पहले और बाद में तीन-चार बार सघन तलाशी होती है.
  • कर्मचारियों को मोबाइल या पर्स ले जाने की इजाज़त नहीं होती.
  • पूरी प्रक्रिया कांच की दीवारों के पीछे होती है, जिसे भक्त भी देख सकते हैं.
  • IPS रैंक के अधिकारी और बैंक अधिकारी खुद निगरानी करते हैं.

राम मंदिर में फ़िलहाल छह बड़े और बारह से ज़्यादा छोटे दानपात्र हैं, और गिनती का ज़िम्मा एक निजी एजेंसी को दिया गया है. आरोप है कि इस स्टाफ़ की भर्ती में ट्रस्ट पदाधिकारियों की सिफ़ारिश चलती थी, और सुरक्षा नियम पूरी सख़्ती से लागू नहीं हो पाए. शुरुआती जांच में कई अहम सीसीटीवी फुटेज भी ग़ायब मिलीं, जिसने संदेह और गहरा दिया.

संत समाज और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

राम जन्मभूमि आंदोलन के पुराने चेहरों में शामिल विनय कटियार जैसे नेताओं ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की. कुछ प्रमुख कथावाचकों ने भी कड़ी सज़ा की वकालत करते हुए सुझाव दिया कि मंदिर प्रबंधन में संत परंपरा से जुड़े लोगों की भागीदारी बढ़नी चाहिए.

वहीं आम श्रद्धालुओं में इस ख़बर से स्वाभाविक निराशा देखी गई, हालांकि ज़्यादातर लोग यह भी मानते हैं कि दोषियों पर कार्रवाई होने से व्यवस्था पर भरोसा फिर बहाल होगा.

एक नज़र में पूरी घटनाक्रम 

तारीख़ घटना विवरण
5 जून 2026 अनौपचारिक छापेमारी अविनाश शुक्ला के ठिकाने पर अनौपचारिक छापेमारी, नकदी बरामद।
7 जून 2026 मामला सार्वजनिक अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद मामला सार्वजनिक हुआ।
13 जून 2026 SIT का गठन तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया।
15-22 जून 2026 जांच अभियान मंदिर परिसर व आरोपियों के घरों की जांच, क़रीब 150 लोगों से पूछताछ।
25 जून 2026 एफ़आईआर दर्ज पहली एफ़आईआर दर्ज हुई, आठ लोग नामज़द किए गए।
26 जून 2026 गिरफ़्तारी सभी आठ आरोपियों की गिरफ़्तारी, कोर्ट में पेशी और न्यायिक हिरासत।
29 जून 2026 बयान व नोटिस चंपत राय का बयान दर्ज, 70-80 लोगों को नोटिस, बैंकों से रिकॉर्ड तलब।
30 जून 2026 के बाद जांच जारी जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ, बैंक व फॉरेंसिक जांच जारी।

आगे क्या होगा?

फ़िलहाल यह मामला अभी थमा नहीं है. जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और नए-नए नाम सामने आ रहे हैं. संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और गिरफ़्तारियां हो सकती हैं, मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया जा सकता है, और दान-प्रक्रिया को हाई-टेक निगरानी, डिजिटल रिकॉर्डिंग, थर्ड-पार्टी ऑडिट और बायोमेट्रिक व्यवस्था से लैस किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलहाल इस मामले में जल्द सुनवाई से इनकार किया है, यानी जांच का पूरा दारोमदार अभी SIT और राज्य पुलिस पर ही टिका है.

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About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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