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मायावती का बड़ा फैसला: आकाश आनंद BSP से बाहर, यूपी चुनाव से पहले परिवार और पार्टी को लेकर बढ़ा विवाद
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, September 10, 2026
Last Updated On: Thursday, September 10, 2026
मायावती ने आकाश आनंद को बहुजन समाज पार्टी से बाहर कर दिया है. इससे पहले उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था. आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के बीच यह कार्रवाई हुई है. मायावती ने परिवार को पार्टी से ऊपर रखने का आरोप लगाते हुए 2027 चुनाव के लिए पूर्ण बहुमत का लक्ष्य रखा.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, September 10, 2026
Mayawati Akash Anand: बहुजन समाज पार्टी में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है. उन्हें पहले राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया गया था और अब उनकी प्राथमिक सदस्यता भी खत्म कर दी गई है. इस फैसले के साथ मायावती ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और अनुशासन को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है.
आकाश आनंद को लेकर मायावती क्यों नाराज हुईं?
मायावती ने आकाश आनंद पर पार्टी की तुलना में परिवार को अधिक महत्व देने का आरोप लगाया है. उनके मुताबिक आकाश का रवैया स्पष्ट नहीं था और वह ‘डबल माइंड’ होकर काम कर रहे थे. मायावती ने एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि आकाश आमतौर पर उनके पोस्ट रिपोस्ट करते रहे हैं, लेकिन अशोक सिद्धार्थ से संबंधित उनकी पोस्ट को उन्होंने रिपोस्ट नहीं किया. मायावती ने इसे पार्टी के बजाय पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता देने के संकेत के तौर पर देखा.
विवाद के केंद्र में आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ
इस पूरे मामले में आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है. सिद्धार्थ ने हाल ही में राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया. मायावती ने इस फैसले को लेकर कहा कि अगर उन्होंने यह कदम पहले उठा लिया होता, तो पार्टी, बहुजन आंदोलन और खुद आकाश आनंद को इतनी मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता.
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक भूमिका और उनकी कथित निजी महत्वाकांक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए. उनके बयान से साफ है कि आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के फैसले के पीछे परिवार और राजनीतिक भूमिका का मुद्दा अहम रहा है.
3 सितंबर को छीनी गई थी बड़ी जिम्मेदारी
आकाश आनंद के खिलाफ कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इससे पहले 3 सितंबर 2026 को मायावती ने उन्हें बसपा के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया था. अब पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी मुक्त किए जाने के बाद उनका बसपा से रिश्ता पूरी तरह खत्म हो गया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं.
अब 2027 पर मायावती का पूरा फोकस
आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के बाद मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं के सामने चुनावी लक्ष्य भी स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से विरोधियों के राजनीतिक प्रयासों का मजबूती से मुकाबला करने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया. मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत के साथ पूरी ताकत से मैदान में उतरने और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का लक्ष्य रखा है.
पार्टी के लिए आगे की राह अहम
आकाश आनंद को लेकर लगातार हुए फैसलों ने बसपा की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. अब नजर इस बात पर होगी कि पार्टी इस बदलाव के बाद संगठन को किस तरह चुनावी अभियान के लिए तैयार करती है और 2027 में मायावती के पूर्ण बहुमत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं.
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