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रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, भारत समेत 5 देशों पर लग सकता है 100% टैरिफ, सीनेट ने दी मंजूरी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, August 8, 2026
Last Updated On: Saturday, August 8, 2026
100% Tariffs on India: अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर कार्रवाई वाले विधेयक को 86-11 वोटों से मंजूरी दी है. प्रस्ताव में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत, चीन समेत पांच देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है. अब बिल प्रतिनिधि सभा में जाएगा.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, August 8, 2026
100% Tariffs on India: रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका अब और सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है. अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदारों के खिलाफ प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है. इस प्रस्ताव में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है. अगर यह कानून बनता है, तो इसका असर भारत समेत कई बड़े देशों के व्यापार पर पड़ सकता है.
86-11 वोट से पास हुआ प्रतिबंध विधेयक
अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया. इस प्रस्ताव का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को के साथ व्यापार करने वाले देशों को आर्थिक रूप से प्रभावित करना है. प्रस्ताव के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों के उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है.
भारत, चीन समेत ये पांच देश निशाने पर
प्रस्ताव में रूस के तेल और गैस के शीर्ष पांच खरीदारों को लेकर विशेष प्रावधान किया गया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस सूची में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं. इन देशों पर सीधे तौर पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला अभी लागू नहीं हुआ है, बल्कि विधेयक में राष्ट्रपति को ऐसा कदम उठाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है.
भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस लंबे समय से भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल का प्रमुख स्रोत रहा है. ऐसे में अमेरिकी कार्रवाई होने पर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के साथ-साथ ऊर्जा और आयात लागत पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
रूस के साथ-साथ ईरान पर भी कड़ा प्रावधान
यह विधेयक सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है. इसमें ईरान सैंक्शन एक्ट 1996 की अवधि को 2031 तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है. इसके तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर आर्थिक कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा. यानी अमेरिका रूस के साथ ईरान पर भी आर्थिक दबाव बनाए रखने की रणनीति आगे बढ़ा रहा है.
पुतिन और रूसी संस्थानों पर भी निशाना
विधेयक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रमुख कारोबारी समूहों, वित्तीय संस्थानों और अन्य प्रभावशाली लोगों पर प्रतिबंधों को मजबूत करने की बात कही गई है. अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक आधार देती है. इसलिए ऊर्जा कारोबार से जुड़े देशों और संस्थाओं पर दबाव बढ़ाना जरूरी है.
अब अगली परीक्षा प्रतिनिधि सभा में
सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब विधेयक अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा में जाएगा. वहां से पारित होने के बाद ही यह आगे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए पहुंच सकेगा. प्रतिनिधि सभा की अगली बैठक 31 अगस्त को होने की बात कही गई है.
फिलहाल भारत समेत संबंधित देशों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा इस प्रस्ताव को किस रूप में मंजूरी देती है और राष्ट्रपति स्तर पर इसे लेकर क्या फैसला होता है. अगर 100 फीसदी तक टैरिफ का प्रावधान लागू हुआ, तो रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के लिए अमेरिका के साथ व्यापार करना महंगा और जटिल हो सकता है.
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