Special Coverage
ईरान में सत्ता परिवर्तन: मोजतबा खामेनेई बने सर्वोच्च नेता, सेना-IRGC ने जताई निष्ठा, अमेरिका की नाराजगी बढ़ी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, March 9, 2026
Last Updated On: Monday, March 9, 2026
ईरान में सत्ता का बड़ा बदलाव हुआ है. आयतुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है. असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के फैसले के बाद सेना, IRGC और राजनीतिक नेतृत्व ने उनके प्रति वफादारी की शपथ ली, जिससे देश में नए राजनीतिक दौर की शुरुआत मानी जा रही है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, March 9, 2026
Mojtaba Khamenei: ईरान की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ आ गया है. देश के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा हुसैनी खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया गया है. ईरान की 88 सदस्यीय धार्मिक संस्था “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” ने निर्णायक वोट के जरिए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी. इसके साथ ही मोजतबा खामेनेई ईरान के तीसरे सर्वोच्च नेता बन गए हैं. अपने पिता की मौत के कुछ ही समय बाद लिया गया यह फैसला देश और दुनिया की राजनीति में काफी चर्चा का विषय बन गया है.
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का अहम फैसला
ईरान में सर्वोच्च नेता का चयन “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” करती है, जिसमें 88 धार्मिक सदस्य शामिल होते हैं. इस संस्था ने बैठक के बाद मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया. इस फैसले को निर्णायक वोट से मंजूरी दी गई. असेंबली ने देश के धार्मिक विद्वानों, विश्वविद्यालयों और जनता से अपील की है कि वे नए नेता के समर्थन में एकजुट रहें और देश की एकता को मजबूत करें. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ईरान की सत्ता संरचना में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है.
सेना और IRGC ने जताई पूरी वफादारी
मोजतबा खामेनेई के नाम की घोषणा होते ही ईरान की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. देश की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके प्रति वफादारी की शपथ ली. IRGC ने बयान जारी करते हुए कहा कि वह नए सर्वोच्च नेता के हर आदेश का पालन करने के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर देश के लिए बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटेगी. संसद के स्पीकर और सुरक्षा अधिकारियों ने भी इस फैसले को देश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए नए नेतृत्व का समर्थन किया.
पर्दे के पीछे ताकतवर रहे मोजतबा
मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की सत्ता के गलियारों में एक प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते रहे हैं. हालांकि वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी भूमिका काफी मजबूत बताई जाती थी. वे कई वर्षों तक अपने पिता के कार्यालय में काम करते रहे और कई अहम फैसलों में उनकी भागीदारी रही. इसी कारण उन्हें अक्सर “पावर ब्रोकर” और “गेटकीपर” जैसे नामों से भी जाना जाता था. उनकी उम्र लगभग 56 साल है और IRGC के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनके करीबी संबंध बताए जाते हैं.
युद्ध का अनुभव और धार्मिक शिक्षा
मोजतबा खामेनेई का जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा है. युवावस्था में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दिनों में हिस्सा लिया था. उस समय उनकी उम्र लगभग 17 से 18 साल थी और उन्होंने IRGC की हबीब इब्न मजाहिर बटालियन में सेवा दी थी. युद्ध खत्म होने के बाद उन्होंने धार्मिक शिक्षा की ओर रुख किया और ईरान के धार्मिक शहर क़ोम में जाकर शिया इस्लाम की पढ़ाई की. कई प्रमुख कंजर्वेटिव विद्वानों से उन्होंने शिक्षा हासिल की और आज उनकी धार्मिक उपाधि “हुज्जतुल इस्लाम” मानी जाती है. अब सर्वोच्च नेता बनने के बाद उनकी भूमिका देश की राजनीति, धर्म और सुरक्षा नीतियों में बेहद अहम हो गई है.
यह भी पढ़ें :- ईरान-इजराइल जंग के बीच दावा: भारत के पास सिर्फ 25 दिन का तेल स्टॉक, सरकार तलाश रही नए सप्लायर














