बेलगाम हुई पाकिस्तान की सत्ता, कानून संशोधन के बाद ‘तानाशाह’ बना आसिम मुनीर!

Authored By: Ranjan Gupta

Published On: Saturday, November 29, 2025

Last Updated On: Saturday, November 29, 2025

Asim Munir को कानून संशोधन के बाद मिली बड़ी शक्तियां, पाकिस्तान में बढ़ी तानाशाही की आशंका - राजनीतिक हलकों में मचा हड़कंप.
Asim Munir को कानून संशोधन के बाद मिली बड़ी शक्तियां, पाकिस्तान में बढ़ी तानाशाही की आशंका - राजनीतिक हलकों में मचा हड़कंप.

पाकिस्तान में 27वें संवैधानिक संशोधन ने पूरे सत्ता ढांचे को हिला दिया है. नए बदलावों के बाद आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के हाथ में ऐतिहासिक ताकत आ गई है, जबकि न्यायपालिका की शक्तियां कमजोर हो गई हैं. संयुक्त राष्ट्र ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और न्यायिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बताया है.

Authored By: Ranjan Gupta

Last Updated On: Saturday, November 29, 2025

Asim Munir: पाकिस्तान में सत्ता का चेहरा तेजी से बदल रहा है. हाल ही में किए गए 27वें संवैधानिक संशोधन ने पूरे सिस्टम की दिशा ही बदल दी है. इस नए कानून के बाद आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर देश के सबसे ताकतवर शख्स बनकर उभरे हैं. उनके पास अब प्रधानमंत्री से ज्यादा अधिकार हैं. इसके उलट न्यायपालिका की ताकत कम हुई है, जिससे दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. संयुक्त राष्ट्र ने भी साफ कहा है कि ये बदलाव पाकिस्तान की लोकतांत्रिक संस्था और न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं. इस पूरे मसले ने देश की राजनीति, कानून और सत्ता संरचना पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रमुख वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को जारी बयान में चेतावनी दी कि पाकिस्तान में जल्दबाजी में किए गए ये संशोधन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं. उनके अनुसार, इस कदम से सेना का दखल बढ़ने और नागरिक सरकार की भूमिका कमजोर होने की आशंका मजबूत होती है, जो कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

UN ने जताई गंभीर चिंता

UN मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने पाकिस्तान में हुए इस बड़े संवैधानिक बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि सरकार ने यह संशोधन बेहद जल्दबाज़ी में पास किया. न जनता से राय ली गई, न कानूनी विशेषज्ञों से सलाह. किसी तरह की खुली बहस भी नहीं हुई. टर्क का मानना है कि यह तरीका लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बिल्कुल उलट है. उन्होंने कहा कि नए बदलाव उन संस्थाओं के खिलाफ जाते हैं जो पाकिस्तान में मानवाधिकारों और कानून के शासन की रक्षा करती हैं. खास चिंता जजों की स्वतंत्रता को लेकर जताई गई है. टर्क के मुताबिक, यह संशोधन न्यायपालिका की आज़ादी पर सीधा असर डाल सकता है.

जजों की नियुक्ति और तबादलों पर सवाल

UN के बयान में कहा गया कि जजों की नियुक्ति और तबादले से जुड़े नए नियम न्यायपालिका की संरचनात्मक स्वतंत्रता को कमजोर करते हैं. इससे राजनीति का दखल बढ़ सकता है. जोखिम यह है कि अदालतें कार्यपालिका के प्रभाव में आ जाएं. टर्क ने साफ कहा कि अदालतों को किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से दूर रहना चाहिए, वरना न्याय व्यवस्था पर भरोसा डगमगा सकता है.

उन्होंने 27वें संशोधन पर भी सख्त सवाल उठाए. इस संशोधन के तहत राष्ट्रपति और फील्ड मार्शल को आजीवन आपराधिक मामलों और गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल जाती है. टर्क के अनुसार, यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था और मानवाधिकार सिद्धांतों को चोट पहुंचाता है. लंबे समय में इसका असर पाकिस्तान की लोकतांत्रिक दिशा पर गंभीर पड़ सकता है.

राष्ट्रपति ने किया बड़ा हस्ताक्षर

इधर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 13 नवंबर को 27वें संवैधानिक संशोधन पर हस्ताक्षर कर दिए. इसके साथ ही यह कानून बन गया. इस संशोधन के बाद आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की शक्तियां अचानक बहुत बढ़ गई हैं. रिपोर्टों के मुताबिक अब उनके पास प्रधानमंत्री से भी ज्यादा अधिकार हैं. इससे वह देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बनकर सामने आए हैं.

मुनीर को मिली अभूतपूर्व ताकत

27वें अमेंडमेंट में साफ लिखा है कि राष्ट्रपति और फील्ड मार्शल को किसी भी आपराधिक केस या गिरफ्तारी से हमेशा के लिए छूट होगी. इसी संशोधन ने आर्मी चीफ आसिम मुनीर को असाधारण ताकत दे दी है. अब वह सिर्फ सेना के मुखिया नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन चुके हैं. उनकी शक्तियां इतनी बढ़ गई हैं कि वे प्रधानमंत्री से भी ऊपर माने जा रहे हैं.

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About the Author: Ranjan Gupta
रंजन कुमार गुप्ता डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें डिजिटल न्यूज चैनल में तीन वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है. वे कंटेंट राइटिंग, गहन रिसर्च और SEO ऑप्टिमाइजेशन में माहिर हैं. शब्दों से असर डालना उनकी कला है और कंटेंट को गूगल पर रैंक कराना उनका जुनून! वो न केवल पाठकों के लिए उपयोगी और रोचक लेख तैयार करते हैं, बल्कि गूगल के एल्गोरिदम को भी ध्यान में रखते हुए SEO-बेस्ड कंटेंट तैयार करते हैं. रंजन का मानना है कि "हर जानकारी अगर सही रूप में दी जाए, तो वह लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है." यही सोच उन्हें हर लेख में निखरने का अवसर देती है.
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