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UN में टकराईं महाशक्तियां, ईरान को लेकर अमेरिका बनाम रूस-चीन की खुली बहस
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, March 13, 2026
Last Updated On: Friday, March 13, 2026
US-Iran War: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के परमाणु मुद्दे को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की रूस और चीन से तीखी बहस हुई. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई को सही ठहराया, जबकि रूस और चीन ने इसका विरोध किया. इस मुद्दे पर मतदान भी हुआ, जिससे महाशक्तियों के बीच गहरे मतभेद सामने आ गए.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, March 13, 2026
US-Iran War: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हालिया बैठक में इसी मुद्दे को लेकर अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों की रूस और चीन के साथ तीखी बहस देखने को मिली. यह बैठक 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की थी और इस महीने इसकी अध्यक्षता अमेरिका के पास है. बैठक के दौरान अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की और कहा कि उसका उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखना है. वहीं रूस और चीन ने इस रुख पर कड़ा विरोध जताया और कहा कि इस तरह के कदम क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकते हैं. इसी वजह से बैठक का माहौल काफी गर्म और टकराव भरा दिखाई दिया.
1737 समिति पर चर्चा को लेकर हुआ मतदान
बैठक में सबसे ज्यादा विवाद उस समिति को लेकर हुआ जो ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी करती है. इस समिति को आमतौर पर 1737 समिति के नाम से जाना जाता है. रूस और चीन ने परिषद में इस समिति से जुड़ी चर्चा को रोकने की कोशिश की, लेकिन उनका प्रयास सफल नहीं हो पाया. परिषद के 15 सदस्यों में से 11 देशों ने चर्चा जारी रखने के पक्ष में मतदान किया. वहीं रूस और चीन ने इसका विरोध किया, जबकि दो देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. इस परिणाम ने यह साफ कर दिया कि सुरक्षा परिषद के भीतर ईरान मुद्दे को लेकर मतभेद काफी गहरे हैं और महाशक्तियां इस विषय पर अलग-अलग सोच रखती हैं.
अमेरिका ने रूस और चीन पर लगाए आरोप
बैठक के दौरान अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने रूस और चीन पर सीधे आरोप लगाए कि वे ईरान का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना था कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को परमाणु खतरे से बचाना है तो ईरान पर सख्त प्रतिबंध लागू करने होंगे. उन्होंने सभी सदस्य देशों से अपील की कि ईरान को हथियारों की आपूर्ति रोकने, मिसाइल तकनीक के ट्रांसफर पर रोक लगाने और उससे जुड़े आर्थिक संसाधनों को फ्रीज करने जैसे कदम उठाए जाएं. अमेरिका का तर्क था कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट और बड़ा रूप ले सकता है.
रूस और चीन ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
अमेरिका के आरोपों का जवाब देते हुए रूस और चीन ने भी कड़ा रुख अपनाया. संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेवजह डर का माहौल बना रहे हैं. उनका दावा था कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी की रिपोर्टों में इस तरह के आरोपों की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है. वहीं चीन के प्रतिनिधि फू कांग ने भी अमेरिका की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान संकट की जड़ में वाशिंगटन की नीतियां ही हैं. उनके मुताबिक जब बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए था, तब सैन्य दबाव बनाकर हालात और जटिल बना दिए गए.
ट्रंप ने युद्ध की वजह बताया परमाणु कार्यक्रम
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही इस संघर्ष की सबसे बड़ी वजह है. उनका मानना है कि अगर ईरान को परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोका गया तो यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है. इसी तर्क के आधार पर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी. हालांकि इस कदम के बाद मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और कई देश इसे लेकर चिंता जता रहे हैं.
कुल मिलाकर संयुक्त राष्ट्र की यह बहस इस बात का संकेत है कि ईरान मुद्दे पर दुनिया की बड़ी ताकतें दो खेमों में बंटती नजर आ रही हैं, जिससे आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अधिक जटिल हो सकती है.
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