इथियोपिया में 10 हजार साल बाद जगा ज्वालामुखी: राख का तूफान और दुनिया में हड़कंप, दिल्ली-जयपुर पर खतरा…

Authored By: Nishant Singh

Published On: Tuesday, November 25, 2025

Last Updated On: Tuesday, November 25, 2025

Ethiopia Volcano Eruption: 10 हजार साल बाद ज्वालामुखी फटा, राख का तूफान फैलकर दिल्ली-जयपुर में खतरा.
Ethiopia Volcano Eruption: 10 हजार साल बाद ज्वालामुखी फटा, राख का तूफान फैलकर दिल्ली-जयपुर में खतरा.

इथियोपिया के हेली गूब्बी ज्वालामुखी ने 10 हजार साल बाद अचानक विस्फोट कर दुनिया को चौंका दिया. 15 किलोमीटर ऊंचा राख का गुबार आसमान में फैलकर यमन, ओमान होते हुए भारत तक पहुंच गया. दिल्ली और जयपुर तक अलर्ट जारी हुआ और कई फ्लाइटें डायवर्ट या रद्द करनी पड़ीं. वैज्ञानिक इसे अब तक की सबसे दुर्लभ प्राकृतिक घटनाओं में गिन रहे हैं.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Tuesday, November 25, 2025

Ethiopia Volcano Eruption: इथियोपिया के अफार क्षेत्र में हजारों साल से शांत पड़े हेली गूब्बी ज्वालामुखी ने अचानक तेज़ी से गतिविधि दिखाते हुए रविवार सुबह विस्फोट कर दिया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ज्वालामुखी 10–12 हजार साल बाद पहली बार फटा और यह घटना दर्ज इतिहास की सबसे दुर्लभ प्राकृतिक घटनाओं में से एक है. इस धमाके के बाद आसमान में राख और सल्फर डाइऑक्साइड के विशाल बादल उठे, जिसे देखकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और वैज्ञानिक संस्थानों में चिंता बढ़ गई. इस क्षेत्र को टेक्टॉनिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, लेकिन इतने लंबे समय तक पूरी तरह शांत रहने वाले ज्वालामुखी का अचानक सक्रिय हो जाना भू-विज्ञान के लिए एक बड़ा सवाल बन चुका है.

राख का 15 KM ऊंचा गुबार: अंतरिक्ष से भी दिखा खतरा

विस्फोट के कुछ ही मिनटों में ज्वालामुखी से उठी राख 10 से 15 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच गई, जिसे NASA और वैश्विक सैटेलाइट सिस्टम ने साफ तौर पर रिकॉर्ड किया. टूलूज़ वोल्कैनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर ने बताया कि राख का यह बादल कमजोर नहीं हो रहा बल्कि हवा की दिशा में तेजी से फैल रहा है और लगभग लाल सागर पार करते हुए यमन और ओमान तक पहुंच चुका है. सैटेलाइट तस्वीरों में यह राख का गुबार बेहद बड़ा दिखाई दे रहा है, जैसे किसी देश के ऊपर ग्रे रंग की चादर तान दी गई हो. विशेषज्ञों की मानें तो यह राख सिर्फ काला धुआं नहीं, बल्कि बेहद महीन ग्लास-टाइप पार्टिकल्स है जो मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और विमान इंजनों के लिए बेहद खतरनाक है.

एयर ट्रैफिक पर बड़ा असर: फ्लाइटें रद्द और रूट बदले

इस ज्वालामुखी विस्फोट का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय उड्डयन पर पड़ा, क्योंकि राख वाले क्षेत्र में उड़ान भरना दुनियाभर में प्रतिबंधित है. इसी कारण कन्नूर से अबू धाबी जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E 1433 को अहमदाबाद डायवर्ट किया गया, जहां विमान सुरक्षित उतारा गया. इसके बाद एयर इंडिया और अन्य कई एयरलाइनों ने अपनी उड़ानें रद्द या मार्ग परिवर्तित किए. DGCA ने सभी भारतीय और विदेशी एयरलाइंस को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि वे राख वाले क्षेत्रों से दूर रहें. एविएशन प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसे कण विमान के इंजन, नेविगेशन सिस्टम और विंडशील्ड को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं. अकासा एयर और KLM ने भी यात्रियों को सुरक्षा संबंधी अपडेट जारी किए और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

राख पहुंची भारत: दिल्ली-जयपुर तक खतरा

सोमवार देर रात राख का यह बादल 4300 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए दिल्ली, राजस्थान और उत्तर भारत के आसमान तक पहुंच गया. हालांकि यह राख जमीन से काफी ऊंचाई पर थी, इसलिए आम लोगों की सांस लेने वाली गतिविधियों पर सीधा असर फिलहाल कम दिखा, लेकिन मौसम विभाग और DGCA इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हवा की दिशा बदलती है तो भारत में वायु गुणवत्ता पर असर दिख सकता है, खासकर उन लोगों पर जिन्हें सांस या एलर्जी की समस्या है.

वैज्ञानिक हैरान: क्यों अचानक फटा ज्वालामुखी?

वैज्ञानिकों के बीच इस विस्फोट ने उत्सुकता और चिंता दोनों बढ़ा दी है, क्योंकि हेली गूब्बी ज्वालामुखी एक टेक्टॉनिक रिफ्ट ज़ोन में आता है जहां धरती की प्लेटें एक-दूसरे से दूर जा रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के भीतर मैग्मा काफी समय से दबाव बना रहा था और अब यह सतह पर आ गया है. एमिरात एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह विस्फोट शुरुआत हो सकता है, और आने वाले हफ्तों में दोबारा सक्रियता सामने आ सकती है. वैज्ञानिक अब इस ज्वालामुखी को भविष्य के रिसर्च केंद्र के रूप में देख रहे हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि इतने लंबे समय बाद यह कैसे जागा.

धरती ने याद दिलाया – वो आज भी ज़िंदा है

इथियोपिया के इस ज्वालामुखी विस्फोट ने पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि पृथ्वी अभी खत्म नहीं हुई कहानी है- उसके अंदर अब भी ऊर्जा, गर्मी और बदलाव बह रहे हैं. जहां एक ओर यह घटना वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का बड़ा मौका है, वहीं दुनियाभर की एयरलाइंस, सरकारें और पर्यावरण एजेंसियां इससे जुड़े खतरे के प्रति अलर्ट मोड में हैं. आने वाले दिनों में राख की दिशा, मात्रा और प्रभाव दुनिया के लिए निर्णायक जानकारी लेकर आएगा. अभी के लिए यह विस्फोट केवल इथियोपिया में नहीं, बल्कि दुनिया भर में चिंता और अध्ययन का केंद्र बन चुका है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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