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खर्ग आईलैंड पर हमला, आखिर क्यों इतना अहम है ईरान का यह छोटा सा द्वीप
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, March 14, 2026
Last Updated On: Saturday, March 14, 2026
खर्ग आईलैंड फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का बेहद महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है, जहां से देश का लगभग 90% कच्चा तेल दुनिया भर में भेजा जाता है. हाल ही में इस द्वीप पर हमले के दावे ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है और इसकी रणनीतिक अहमियत फिर चर्चा में आ गई है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, March 14, 2026
Kharg Island Attack: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच खर्ग आईलैंड अचानक वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के इस महत्वपूर्ण द्वीप पर जोरदार बमबारी की है. उनके अनुसार यह कार्रवाई क्षेत्र के इतिहास की सबसे शक्तिशाली सैन्य कार्रवाइयों में से एक थी. ट्रंप ने कहा कि इस हमले में द्वीप पर मौजूद कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वहां के तेल से जुड़े ढांचे को निशाना नहीं बनाया गया है.
खर्ग आईलैंड कहां है
खर्ग आईलैंड फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का एक रणनीतिक द्वीप है. यह बुशहर बंदरगाह से करीब 55 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में और ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 28 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है. आकार में यह लगभग 8 किलोमीटर लंबा और करीब 4 से 5 किलोमीटर चौड़ा है. इसके आसपास का समुद्र काफी गहरा है, जिससे बड़े-बड़े तेल टैंकर आसानी से यहां तक पहुंच सकते हैं. यही वजह है कि यह द्वीप ईरान के लिए व्यापारिक और सामरिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है.
क्यों कहा जाता है ‘ईरान का दिल’
खर्ग आईलैंड को अक्सर ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का दिल कहा जाता है. दरअसल, देश के कुल कच्चे तेल का लगभग 90 प्रतिशत निर्यात इसी द्वीप से होता है. यहां बड़े तेल भंडारण टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और आधुनिक लोडिंग टर्मिनल मौजूद हैं, जहां से तेल टैंकरों में भरकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक भेजा जाता है. यही कारण है कि इस द्वीप को नुकसान पहुंचना सीधे तौर पर ईरान की आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.
पहली बार बना सीधा निशाना
अब तक अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल बेस और परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया गया था, लेकिन खर्ग आईलैंड पर सीधा हमला पहले नहीं हुआ था. हाल ही में आई कुछ रिपोर्टों में संकेत मिले थे कि अमेरिकी प्रशासन इस इलाके को लेकर नई सैन्य रणनीति पर विचार कर रहा है. ऐसे में इस द्वीप पर हमले के दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और चर्चा दोनों बढ़ा दी हैं.
हमले के पीछे क्या हो सकता है कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि खर्ग आईलैंड पर दबाव बनाना ईरान की तेल आपूर्ति को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. खबरों के मुताबिक अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैनिकों और एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप को भेजने के निर्देश भी दिए हैं. अगर इस द्वीप के तेल ढांचे को नुकसान पहुंचता है तो ईरान के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है. वहीं ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर उनके ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया तो क्षेत्र में मौजूद तेल और गैस सुविधाओं पर कड़ी जवाबी कार्रवाई की जा सकती है. यही वजह है कि खर्ग आईलैंड केवल एक भौगोलिक जगह नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट की ऊर्जा और राजनीति का एक बेहद संवेदनशील केंद्र बन चुका है.
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