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भारत की पहल के बाद क्यों परेशान दिख रहे युनूस, रद्द किया ये डील
Authored By: सतीश झा
Published On: Tuesday, December 10, 2024
Last Updated On: Tuesday, December 10, 2024
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद युनूस की सरकार ने भारत के साथ कई महत्वपूर्ण समझौतों की समीक्षा करने और उन्हें रद्द करने की धमकी दी थी, और अब यह धमकी हकीकत बन गई है। बांग्लादेश ने भारत के साथ किए गए इंटरनेट बैंडविड्थ समझौते को रद्द कर दिया है, जिसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में इंटरनेट सेवाओं को मजबूत करने के लिए किया गया था। इस फैसले से भारत में बड़ा आक्रोश फैल गया है और देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Tuesday, December 10, 2024
बांग्लादेश ने समिट कम्युनिकेशन (Summit Communication) और फाइबर एट द होम (Fiber at the Home) जैसी कंपनियों के जरिए यह समझौता भारत के एयरटेल (Airtel) कंपनी के साथ किया था, जिसके तहत इंटरनेट बांग्लादेश की अखोड़ा सीमा से होकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंचाया जाता था। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि यह समझौता उनके क्षेत्रीय इंटरनेट क्षमता पर नकारात्मक असर डाल रहा था, और इसलिए इसे रद्द किया गया।
इस फैसले के बाद, भारत के नागरिकों में गुस्सा देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में एक क्लिनिक ने बांग्लादेशी मरीजों का इलाज करने से मना कर दिया और एक पोस्टर लगाया जिसमें लिखा था कि बांग्लादेशी नागरिक भारत के तिरंगे को प्रणाम करने के बाद ही प्रवेश कर सकते हैं। वहीं असम के बराक घाटी में होटल और रेस्टोरेंट ने बांग्लादेशी नागरिकों को प्रवेश देने से इंकार कर दिया और कहा कि जब तक बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार नहीं रुकते, तब तक बांग्लादेशियों का बहिष्कार किया जाएगा।
कोलकाता के पास साल्ट लेक इंटरनेशनल बस टर्मिनल पर प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेशी जामदानी साड़ियों को आग लगा दी और बांग्लादेशी उत्पादों के बहिष्कार की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तिरंगे का अपमान और हिंदुओं पर हमले जारी रहे तो भारत चुप नहीं बैठेगा।
इस मुद्दे पर भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ढाका में बांग्लादेश के विदेश सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन से मुलाकात की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण सहित कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। मिस्री ने कहा कि उनकी चर्चा द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित थी और उन्होंने सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण की सराहना की।
हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमल
अल्पसंख्यकों के घरों में आगजनी और लूटपाट और देवताओं और मंदिरों में तोड़फोड़ और अपवित्रता के मामले भी सामने आए हैं। 25 अक्टूबर को चटगांव में पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के कारण विरोध प्रदर्शन हुआ। भारत ने 26 नवंबर को श्री चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और जमानत से इनकार पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। यहां यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारत ने बांग्लादेश के अधिकारियों से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया था, जिसमें शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी शामिल है।














