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कब होगी देश में जनगणना, क्यों हो रही है 2027 की बात
Authored By: सतीश झा
Published On: Tuesday, September 17, 2024
Last Updated On: Tuesday, September 17, 2024
भारत में जनगणना का कार्य पहले से ही देरी का शिकार हो चुका है, और अब यह संभावना कम नजर आती है कि जनगणना 2027 से पहले सम्पन्न हो सकेगी। इस देरी के कारण जनगणना चक्र पर भी प्रभाव पड़ सकता है, और 2031 में अगली जनगणना कराए जाने की आवश्यकता पर भी प्रश्न उठ सकता है।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Tuesday, September 17, 2024
मौजूदा सरकार के सामने एक और महत्वपूर्ण दुविधा है—जनगणना के साथ जाति गणना कराई जाए या नहीं। जाति गणना की मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, और हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इसकी आवश्यकता को रेखांकित किया है। यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है, और इसके समाधान के लिए सरकार को व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता है। 2021 में होने वाली जनगणना को लेकर हाल में कुछ चिंताजनक संकेत मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जनगणना की प्रक्रिया में न केवल देरी होने की आशंका है, बल्कि यह संभावना भी जताई जा रही है कि यह 2027 से पहले सम्पन्न नहीं हो सकेगी।
सरकारी नीतियों और योजनाओं पर संभावित असर
जनगणना में होने वाली देरी का सीधा असर सरकारी नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ सकता है, क्योंकि वर्तमान में 2011 के आंकड़ों पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। जनगणना के आंकड़े न केवल सरकारी निर्णयों और योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि उद्योग जगत और शोध संस्थाएं भी इन्हीं आंकड़ों का उपयोग करती हैं। इसके अतिरिक्त, संसद, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधित्व का आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों का सीमांकन भी जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर करता है।
यदि प्रस्तावित जनगणना के आंकड़े समय पर उपलब्ध नहीं होते, तो महिला आरक्षण को लागू करने में भी विलंब हो सकता है। संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन आवश्यक है, और इसके लिए अद्यतन जनगणना आंकड़ों की आवश्यकता होगी।
2031 को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं
जनगणना में देरी से इसके चक्र के प्रभावित होने की आशंका भी है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि 2031 में जनगणना की आवश्यकता महसूस की जाएगी या नहीं। मौजूदा सरकार को यह दुविधा भी है कि जनगणना के साथ जाति गणना कराई जाए या नहीं। जाति गणना की मांग बढ़ती जा रही है, और हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी इसकी आवश्यकता जताई है। सरकार का जाति गणना पर जो भी निर्णय हो, यह उम्मीद की जानी चाहिए कि वह जनगणना में अधिक विलंब से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।













