महात्मा बुद्ध के विश्व शांति संदेश का वाहक बनी ‘चरथ भिक्खवे’ यात्रा

Authored By: स्मिता

Published On: Sunday, October 27, 2024

Last Updated On: Sunday, October 27, 2024

mahatma buddha
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महात्मा बुद्ध (Mahatma Buddha) ने सभी प्राणी के प्रति करुणा और दया का भाव रखने का संदेश दिया। साथ ही जनकल्याण करने और देश की सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति आदर्श भाव रखने का भी संदेश दिया। हाल में विश्व शांति के लिए बौद्ध परिपथ की 10 दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक यात्रा सह सचल कार्यशाला 'चरथ भिक्खवे' का आयोजन हुआ।

Authored By: स्मिता

Last Updated On: Sunday, October 27, 2024

आज संपूर्ण विश्व को युद्ध की नहीं, बल्कि बुद्ध के शांति संदेश की जरूरत है। इसलिए बुद्ध के उपदेशों और संदेशों को मानने वाले बौद्ध विचारों का प्रसार करने के लिए यात्राएं आयोजित हो रही हैं।

भारतीय संस्कृति की अद्भुत देन बुद्ध के विचार (Indian Culture Thoughts of the Buddha)

बीएचयू (BHU) के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष व ‘चरथ भिक्खवे’ यात्रा के संयोजक प्रो. सदानंद साही (Prof. Sadanand Sahi) ने कहा, ‘बुद्ध दुनिया में भारतीय संस्कृति की अद्भुत देन हैं। आज युद्ध के अनेक मुहानों पर खड़ी दुनिया के लिए बुद्ध व उनके संदेश सबसे बड़ी जरूरत है। इस यात्रा का उद्देश्य बुद्ध की प्रासंगिकता को प्रसारित करते हुए विश्व शांति का संदेश देना है।’ प्रो. राम सुधार सिंह (Prof. Ram Sudhar Singh) के अनुसार, ‘चरथ भिक्खवे’ यात्रा सारनाथ से शुरू हुई, जहां बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। सारनाथ से यात्रा बोध गया, राजगिरि, नालंदा, वैशाली और पटना, झारखंड और लुम्बिनी तक हुई। यात्रा के दौरान भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन के विविध पहलुओं पर चर्चा हुई।

भीतर की यात्रा है महत्त्वपूर्ण (Inner journey important)

इंग्लैंड में पले-बढ़े और बोधगया में ‘ द रुट फाउंडेशन ‘ के निदेशक कबीर सक्सेना (Kabir Saxena) तिब्बती बौद्ध परम्परा द्वारा नालन्दा ज्ञान परम्परा को वर्तमान समय मे आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। कबीर के अनुसार, भीतर की यात्रा अधिक महत्त्वपूर्ण है। इससे वास्तविक रूप में सब सुखी हो पाएंगे। इस तरह की यात्राएं साहित्यिक और सांस्कृतिक दुनिया के लिए सकारात्मक होती हैं।

सभी प्राणियों के लिए करुणा का संदेश

सभी जीवित प्राणियों के लिए शांति, करुणा और प्रेम का महात्मा बुद्ध का संदेश हमें अपने दिलों को खोलने और अपने मानव परिवार के सभी सदस्यों को गले लगाने के लिए कहता है, खासकर उन लोगों को जो ज़रूरतमंद हैं। बुद्ध ने महसूस किया कि शांति तभी आएगी जब मनुष्य खुश होगा। वह चाहते थे कि मनुष्य सभी द्वेष, घृणा, निम्न इच्छाओं और बुरे विचारों से छुटकारा पा ले। वह इनकी जगह अच्छे विचार, योग्य इच्छाएं, दान और करुणा की भावना, शांति और धैर्य रखे। बुद्ध के अनुसार, “अतीत में मत रहो, भविष्य के सपने मत देखो, मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो।” हर सुबह हम फिर से जन्म लेते हैं। आज हम जो करते हैं, वह सबसे महत्वपूर्ण है।” “आपको अपने क्रोध के लिए दंडित नहीं किया जाएगा, आपको अपने क्रोध से दंडित किया जाएगा।” ये सभी महात्मा बुद्ध की महत्वपूर्ण उक्तियां हैं।

(हिन्दुस्थान समाचार के इनपुट के साथ)

About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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