Karma Puja 2025: कब है और क्या है कर्मा पूजा की कथा

Authored By: स्मिता

Published On: Wednesday, August 20, 2025

Last Updated On: Wednesday, August 20, 2025

Karma Puja 2025 की तिथि और कथा की जानकारी.
Karma Puja 2025 की तिथि और कथा की जानकारी.

Karma Puja 2025 : एकादशी तिथि को पड़ती है करमा पूजा या करम एकादशी. इस वर्ष 3 सितंबर को है करमा पूजा. इस अवसर पर जानें करमा पूजा की कथा.

Authored By: स्मिता

Last Updated On: Wednesday, August 20, 2025

Karma Puja 2025: करम एकादशी को कर्मा, करम पूजा या कर्मा पूजा के नाम से भी जाना जाता है. कर्मा पूजा असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल राज्यों में खूब धूम-धाम से मनाया जाता है. यह एक पारंपरिक फसल उत्सव है. इस दिन (Karma Puja) झारखंड में आधिकारिक रूप से राजकीय अवकाश रहता है.

कब है करमा पूजा (Karma Puja 2025)

करम त्योहार हिंदी महीना भाद्रपद के ग्यारहवें दिन यानी एकादशी को मनाया जाता है. इसलिए इस दिन को करम एकादशी भी कहा जाता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह अगस्त या सितंबर के दौरान पड़ता है. यह त्योहार करम देवता को समर्पित है. उन्हें यौवन और शक्ति के देवता के रूप में पूजा जाता है.

करम पूजा या करम एकादशी : 3 सितंबर (Karam Ekadashi 2025)

करमा पूजा (Karma Puja) और कर्म एकादशी (Karma Ekadashi) दोनों अलग-अलग त्योहार हैं. दोनों में भाई-बहन के रिश्ते को महत्व दिया गया है.

कर्मा उत्सव की उत्पत्ति की कथा (Karam Puja Origin Story)

कर्मा उत्सव की उत्पत्ति के बारे में कई कथाएं हैं. एक कथा के अनुसार, सात भाई अपने खेत में कड़ी मेहनत करते थे. उनके पास दोपहर के भोजन के लिए घर जाने का भी समय नहीं था. इसलिए उनकी पत्नियां हर दिन खेत में खाना लाती थीं. एक दिन पत्नियां खाना नहीं लाईं। भूख और गुस्से के मारे भाई शाम को घर लौटे. उन लोगों ने अपनी पत्नियों को करम के पेड़ की एक शाखा के साथ गाते और नाचते हुए पाया.

सकारात्मक बदलाव (Positive change)

एक भाई को गुस्सा आ गया, उसने अपनी पत्नियों से एक टहनी लेकर नदी में फेंक दी. इससे करम देवता का अपमान हो गया. उसके बाद कड़ी मेहनत के बावजूद भाइयों का परिवार दिन-ब-दिन गरीब होता गया. एक दिन उनकी मुलाकात एक पुजारी से हुई. उसने उनकी कहानी सुनी पुजारी ने उनसे कहा कि उन्हें करम वृक्ष को प्रसन्न करना होगा. अन्यथा वे भूख से मर जायेंगे. दोनों भाई गांव छोड़कर करम वृक्ष की तलाश में जगह-जगह गए. उन्होंने उसकी पूजा की और फिर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव आया.

करम उत्सव से जुड़ी एक और कथा (Karam Puja Mythological Story)

एक अन्य कथा एक धनी व्यापारी के बारे में है. वह दूर देशों से बहुमूल्य वस्तुओं से लदे एक जहाज में लंबी यात्रा के बाद घर लौटा था. उसने उम्मीद की थी कि उसकी पत्नी और रिश्तेदार जैसा कि प्रथा थी, घाट पर उसका स्वागत करेंगे. लेकिन कोई नहीं आया. संयोग से वह करम उत्सव का दिन था. पूरा गांव उत्सव में डूबा हुआ था. अपने परिवार से क्रोधित होकर व्यापारी ने करम वृक्ष को फेंक दिया. इससे स्वाभाविक रूप से देवता क्रोधित हो गए. उसके जहाज को सारे सामान सहित डुबो दिया. अपनी गलती का एहसास होने पर व्यापारी देवता की तलाश में निकल पड़ा. उसे समुद्र में तैरता हुआ करम वृक्ष मिला. उसने देवता को प्रसन्न किया, जिससे उसकी संपत्ति वापस आ गई.

कैसे की जाती है करम पूजा (Karam Puja 2025)

ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियां त्योहार से लगभग एक सप्ताह पहले करम पूजा की तैयारी शुरू कर देती हैं. वे टोकरियों में नौ प्रकार के अनाज (चावल, गेहूं, मक्का, आदि) बोती हैं. वे उन्हें नियमित रूप से पानी देती हैं, ताकि त्योहार शुरू होने से पहले वे अंकुरित हो जाएं. त्योहार की सुबह महिलायें चावल का आटा बनाने के लिए ढेकी (एक पारंपरिक उपकरण) में चावल पीसती हैं. इसका उपयोग त्योहार के लिए पारंपरिक व्यंजन तैयार करने में किया जाता है.

कदंब या करम वृक्ष का महत्व (Significance of Karam Tree)

करम वृक्ष, जिसे कदम, बरफ्लावर-प्लांट, कदंब या लीचहार्ट पाइन भी कहा जाता है. यह उत्सव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सुबह ढोल-नगाड़ों के साथ लोगों का एक समूह करम वृक्ष को खोजने के लिए जंगल में निकल पड़ता है. वे उसकी पूजा करते हैं. कुछ शाखा तोड़ते हैं और उन्हें गांव वापस लाते हैं. शाखाओं को प्रतीकात्मक रूप से गांव के बीचोबीच “रोपा” जाता है.

क्या हैं अनुष्ठान (Karam Puja 2025 Rituals)

गांव के पुजारी देवता को अंकुरित अनाज और मदिरा अर्पित करते हैं. इसके बाद लोग करम की शाखाओं के साथ एक अनुष्ठानिक नृत्य करते हैं. पुजारी करम पूजा के उत्सव की कथा सुनाते हैं. ग्रामीण पूरी रात गाते, नाचते और खाते-पीते हुए बिताते हैं. सुबह करम की शाखाओं को नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है.

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About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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